जम्मू-कश्मीर जलविद्युत क्षमता विस्तार की राह पर, 2026 अंत तक 46% बढ़ोतरी का अनुमान
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा में दिए आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से कहा है कि सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में चल रही जलविद्युत परियोजनियों का निर्माण तेज हुआ है। सरकार के अनुसार, स्थापित जलविद्युत क्षमता मौजूदा 3,540.15 मेगावाट से बढ़कर दिसंबर 2026 तक 5,164.15 मेगावाट होने की उम्मीद है। यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत अप्रैल 2025 से संधि को स्थगन में रखे हुए है और पश्चिमी नदियों पर परियोजनाओं से जुड़ी पुरानी प्रक्रियागत बाधाएं कम होने का दावा कर रहा है।
हाइलाइट्स
- पाकल दुल (1,000 मेगावाट) और किरू (624 मेगावाट) परियोजनाएं दिसंबर 2026 तक जम्मू-कश्मीर की कुल जलविद्युत क्षमता में 46% की अनुमानित बढ़ोतरी करेंगी।
- 18,000 मेगावाट की अनुमानित क्षमता में से केवल 24% का दोहन हुआ है, जिससे भविष्य के निवेश व निर्माण के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं।
- सरकार ने 2035 तक स्थापित जलविद्युत क्षमता को तिगुना करने की रणनीति बनाई है, जिसमें संभावित भंडारण आधारित परियोजनाओं की पहचान की जा रही है।
पाकल दुल और किरू परियोजनाओं से क्षमता वृद्धि
सरकारी जवाब के अनुसार, दिसंबर 2026 तक अनुमानित बढ़ोतरी का मुख्य आधार दो बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं हैं, जिनमें 1,000 मेगावाट की पाकल दुल परियोजना और 624 मेगावाट की किरू परियोजना शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि दोनों परियोजनियों पर 78% काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 12 मेगावाट की करनाह जलविद्युत परियोजना का काम भी जून 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं के चालू होने से केंद्र शासित प्रदेश की नवीकरणीय बिजली क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होने की संभावना है। सरकार ने कहा कि मौजूदा प्रगति से जम्मू-कश्मीर ऊर्जा उत्पादन में एक बड़े मोड़ के करीब पहुंच रहा है। यह विस्तार स्थानीय उत्पादन आधार को मजबूत करने के साथ भविष्य की अतिरिक्त परियोजनाओं के लिए भी आधार तैयार कर रहा है।
18,000 मेगावाट क्षमता में अभी बड़ा अवकाश
जम्मू-कश्मीर सरकार के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश में कुल अनुमानित जलविद्युत क्षमता 18,000 मेगावाट है, जिसमें से 15,000 मेगावाट क्षमता की पहचान पहले ही की जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक केवल लगभग 24% पहचानी गई क्षमता का ही दोहन हुआ है, जिससे आगे निवेश और निर्माण के लिए व्यापक अवसर बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा परियोजनियों की रफ्तार बढ़ने से इस अंतर को कम करने में मदद मिल सकती है।
परियोजना पोर्टफोलियो में 13 यूटी परियोजनाएं शामिल हैं जिनकी कुल क्षमता 1,197.4 मेगावाट है। इसके अलावा छह केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाएं 2,250 मेगावाट क्षमता रखती हैं, जबकि 12 निजी क्षेत्र की परियोजनाएं 92.75 मेगावाट जोड़ती हैं। यह मिश्रित ढांचा संकेत देता है कि क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी, दोनों तरह की भागीदारी से आगे विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है।
2035 तक क्षमता तिगुनी करने की रणनीति
सरकार ने कहा कि उसने 2035 तक स्थापित जलविद्युत क्षमता को तिगुना करने की योजना तैयार की है। आधिकारिक जवाब में यह भी कहा गया है कि शेष जलविद्युत संभावना का अधिकतम उपयोग करने के लिए संभावित भंडारण आधारित परियोजनाओं की पहचान की जा रही है। अगले दशक के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जा चुका है और उस पर अमल चल रहा है।
इस रणनीति का व्यापक असर जम्मू-कश्मीर के ऊर्जा क्षेत्र, बिजली उपलब्धता और बुनियादी ढांचा निवेश पर पड़ सकता है। यदि निर्माण की मौजूदा गति बनी रहती है, तो क्षेत्र U.S. सहित वैश्विक ऊर्जा निवेशकों और घरेलू डेवलपर्स के लिए अधिक आकर्षक बाजार के रूप में उभर सकता है। साथ ही, जलविद्युत उत्पादन बढ़ने से दीर्घकाल में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय क्षमता विस्तार को भी बल मिल सकता है।
हमने पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सर्वे के आधार पर FY27 के लिए निजी पूंजीगत व्यय योजनाओं में 16% की गिरावट पर रिपोर्ट किया था। उस आकलन में यह भी सामने आया था कि कुल सतर्कता के बावजूद कंपनियां विनिर्माण की तुलना में बिजली, गैस और कूलिंग सप्लाई जैसी ऊर्जा-संबंधित परिसंपत्तियों को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि मशीनरी व उपकरण पर खर्च का हिस्सा बढ़ा है।
नवीनतम नेशनल ग्रिड समाचार
- Forex
- Crypto