तेलंगाना 24x7 मुफ्त कृषि बिजली बनाए रखने, रैतु डिस्कॉम प्रस्ताव आगे बढ़ाने पर जोर देता है
तेलंगाना में किसानों को चौबीसों घंटे मुफ्त बिजली देने की योजना राज्य की कृषि नीति और बिजली सब्सिडी ढांचे के केंद्र में बनी हुई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार इस वादे से पीछे नहीं हटेगी, साथ ही कृषि बिजली उपयोग की निगरानी और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए कदमों की रूपरेखा भी रखी।
हाइलाइट्स
- तेलंगाना सरकार ने किसानों के लिए 24x7 मुफ्त कृषि बिजली योजना जारी रखने और स्मार्ट मीटर की अफवाहों को खारिज किया।
- सरकार ने बिना मीटर आपूर्ति के सब्सिडी लेखांकन के वित्तीय बोझ को कम करने हेतु कृषि बिजली उपयोग पर निगरानी और सब्सिडी हिसाब के लिए 1,300 करोड़ रुपये आवंटित किए।
- मुख्यमंत्री ने रैतु डिस्कॉम स्थापित करने, अधिशेष नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग तथा बिजली वितरण पारदर्शिता बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिससे राजकोषीय बोझ कम होगा।
कृषि बिजली योजना और सरकारी रुख
According to Financial Express, Chief Minister’s Office के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों को 24x7 मुफ्त बिजली देती रहेगी और कृषि पंप सेटों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना को वापस लेने की कोई मंशा नहीं रखती और इस मुद्दे पर Bharat Rashtra Samithi को खुली राजनीतिक चुनौती दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि मुफ्त बिजली योजना कांग्रेस की शुरू की हुई नीति है और यह तेलंगाना की कृषि व्यवस्था का अहम आधार बन चुकी है। उन्होंने पिछली BRS सरकार पर बिजली उपयोगिताओं के वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया और कहा कि 2017 में केंद्र के साथ हुए समझौते के तहत स्मार्ट मीटर से जुड़ी प्रक्रिया पहले शुरू की गई थी।
तेलंगाना में 1 जनवरी 2018 से किसानों को कृषि पंपिंग के लिए बिना मीटर के 24x7 मुफ्त बिजली मिलती है। यह सभी पंजीकृत कृषि कनेक्शनों पर लागू है, इसमें यूनिट या बिल राशि की कोई सीमा नहीं है, जबकि Gruha Jyothi योजना केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति माह 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है और कृषि कनेक्शनों पर लागू नहीं होती।
राज्य में करीब 29 लाख कृषि कनेक्शन इस व्यवस्था के दायरे में आते हैं। बिना मीटर आपूर्ति के कारण सब्सिडी लेखांकन पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है, इसलिए सरकार कृषि बिजली उपयोग पर नजर रखने और सब्सिडी हिसाब को सख्त करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये आवंटित कर रही है।
पारदर्शिता, खरीद दबाव और क्षेत्रीय असर
मुख्यमंत्री ने कृषि और सिंचाई के लिए बिजली खरीद तथा वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से रैतु डिस्कॉम बनाने का प्रस्ताव भी रखा। CMO ने कहा कि प्रस्तावित उपयोगिता अधिशेष नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करेगी, सरकार का राजकोषीय बोझ कम करेगी और कृषि क्षेत्र को सेवा देने वाली बिजली वितरण कंपनियों को मजबूत बनाएगी।रेवंत रेड्डी ने केंद्र की खरीद नीति पर भी दबाव बढ़ाया और कहा कि यदि 15 जून तक धान की खरीद नहीं हुई और अन्य फसलों को घोषित Minimum Support Price पर नहीं खरीदा गया, तो किसानों की उपज BJP और BRS नेताओं के घरों के बाहर डाली जाएगी। उनका कहना है कि जिन फसलों के लिए MSP घोषित है, उनकी पूरी खरीद होनी चाहिए।
CMO के मुताबिक, तेलंगाना की बिजली खपत 15,000 मेगावाट से बढ़कर 18,000 मेगावाट हो गई है, जो आर्थिक गतिविधि और कृषि मांग में वृद्धि को दर्शाती है। सरकार इस बढ़ती मांग को ग्रामीण समृद्धि, निर्बाध बिजली आपूर्ति और किसान-केंद्रित कल्याण उपायों के साथ जोड़कर देख रही है।
उत्तर प्रदेश में जून के बिजली बिलों पर 10% Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) लागू करने के फैसले पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था, जो मार्च 2026 की बिजली खरीद लागत के आधार पर घरेलू, वाणिज्यिक, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है। हमने यह भी रेखांकित किया था कि रिकॉर्ड मांग और बढ़ती खरीद लागत के चलते वितरण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि कई जिलों में आपूर्ति बाधित रहने और स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध की बातें भी सामने आई थीं।
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