RBI की ट्रेजरी बिल नीलामी में 91-दिवसीय कागज पर 5.5586% यील्ड तय

RBI की ट्रेजरी बिल नीलामी में 91-दिवसीय कागज पर 5.5586% यील्ड तय
91-दिवसीय बांड यील्ड फिक्स

भारतीय रिजर्व बैंक ने 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों की नीलामी के पूर्ण नतीजे जारी किए हैं। 91-दिवसीय खंड में 12,000 करोड़ रुपये के अधिसूचित आकार के मुकाबले 32,311.79 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलीं, जिससे अल्पकालिक सरकारी उधारी की मजबूत मांग दिखती है।

हाइलाइट्स

  • RBI की 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामी में कट-ऑफ मूल्य 98.6331 और यील्ड 5.5586% तय, 11,400 करोड़ रुपये का प्रतिस्पर्धी आवंटन हुआ।
  • 91-दिवसीय बिल के भारित औसत मूल्य 98.6359 और औसत यील्ड 5.5471% के साथ प्रतिस्पर्धी मांग 32,311.790 करोड़ रुपये रही, पर आवंटन सीमित रहा।
  • 182-दिवसीय और 364-दिवसीय बिलों के लिए अधिसूचित राशि 6,000-6,000 करोड़ रुपये रही, और दोनों में निवेशकों की मांग व भागीदारी मजबूत दिखी।

नीलामी परिणाम और आवंटन

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/378 के अनुसार, 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए कट-ऑफ कीमत 98.6331 और यील्ड 5.5586% तय हुई है। इस खंड में 126 प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त हुईं, जिनकी कुल राशि 32,311.790 करोड़ रुपये रही, जबकि 48 बोलियां स्वीकार की गईं और 11,400 करोड़ रुपये का प्रतिस्पर्धी आवंटन हुआ है.

इसी खंड में दो बोलियों पर 23.7420% का आंशिक आवंटन हुआ है। 91-दिवसीय बिल का भारित औसत मूल्य 98.6359 और भारित औसत यील्ड 5.5471% रही है।

गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 91-दिवसीय बिल के लिए 7 बोलियां 3,725.588 करोड़ रुपये की प्राप्त हुईं, जिनमें 3,700 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए हैं। इस श्रेणी में आंशिक आवंटन प्रतिशत 95.9098 रहा है।

182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों के लिए अधिसूचित राशि क्रमशः 6,000 करोड़ रुपये और 6,000 करोड़ रुपये रही है। 182-दिवसीय खंड में 53 प्रतिस्पर्धी बोलियां 7,940.590 करोड़ रुपये की और 364-दिवसीय खंड में 74 प्रतिस्पर्धी बोलियां 11,106.000 करोड़ रुपये की प्राप्त हुई हैं। गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 182-दिवसीय बिल के लिए 5 बोलियां 3,511.493 करोड़ रुपये की और 364-दिवसीय बिल के लिए 4 बोलियां 1,325.441 करोड़ रुपये की मिली हैं।

सरकारी उधारी और बाजार संकेत

इन नतीजों से पता चलता है कि अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, खासकर 91-दिवसीय अवधि में जहां अधिसूचित राशि की तुलना में प्रतिस्पर्धी मांग काफी अधिक रही है। इससे RBI को नियोजित उधारी कार्यक्रम के तहत बाजार से धन जुटाने में समर्थन मिलता है।

91-दिवसीय बिल में कट-ऑफ यील्ड और भारित औसत यील्ड के बीच सीमित अंतर यह संकेत देता है कि बोली मूल्य निर्धारण अपेक्षाकृत सघन दायरे में रहा है। 182-दिवसीय और 364-दिवसीय कागजों के लिए प्राप्त बोलियों का आकार भी यह दर्शाता है कि विभिन्न परिपक्वता अवधियों में निवेशकों की भागीदारी जारी है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक और 5 जून को आने वाले नीतिगत फैसले की समयरेखा पर फोकस किया गया था। उसमें बताया गया था कि अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति 4% लक्ष्य से नीचे रहने के बावजूद ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, कमजोर रुपया और कमजोर मानसून की आशंका जैसे जोखिम बढ़े हैं, जिनके बीच बाजार रेपो दर के 5.25% पर स्थिर रहने की उम्मीद कर रहा है।

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