राज्य सरकार प्रतिभूति नीलामी में बिहार, गुजरात, केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों ने नियोजित उधारी पूरी की है। कुल 14,800 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से यह संकेत मिलता है कि विभिन्न अवधियों में राज्यों की बाजार उधारी मांग स्थिर बनी हुई है।
हाइलाइट्स
- भारतीय रिजर्व बैंक की राज्य सरकार प्रतिभूतियों की नीलामी में पूरी 14,800 करोड़ रुपये की राशि की बोलियां स्वीकार की गईं।
- लंबी अवधि वाले पुनर्निर्गमों में यील्ड 7.8% के आसपास या उससे ऊपर दर्ज हुई, जबकि कम अवधि के कागजों में यील्ड अपेक्षाकृत नीचे रही।
- दिए गए सभी आकारों में बोलियां स्वीकार होने से स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकारों की उधारी के लिए बाजार में पर्याप्त मांग उपलब्ध है।
नीलामी परिणाम और उधारी संरचना
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकार प्रतिभूतियों की यील्ड या मूल्य आधारित नीलामी में कुल 14,800 करोड़ रुपये की राशि के मुकाबले पूरी 14,800 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार की गईं। विज्ञप्ति पर डिप्टी जनरल मैनेजर, कम्युनिकेशंस, अजीत प्रसाद का नाम दिया गया है और इसे प्रेस रिलीज 2026-2027/418 के रूप में जारी किया गया है।
बिहार ने 1,600 करोड़ रुपये जुटाए और 2051 परिपक्वता वाली 7.92% बिहार एसजीएस के पुनर्निर्गम पर 101.20 रुपये का कट-ऑफ मूल्य तथा 7.8084% यील्ड दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ ने 2031 और 2040 परिपक्वता वाले दो पुनर्निर्गमों के जरिए 500 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये जुटाए, जिन पर क्रमशः 100.76 रुपये, 7.1782% और 99.99 रुपये, 7.8293% परिणाम रहे।
गुजरात ने 11 वर्ष और 14 वर्ष की अवधियों में क्रमशः 1,500 करोड़ रुपये और 1,000 करोड़ रुपये जुटाए, जहां कट-ऑफ यील्ड 7.63% और 7.70% रही। जम्मू और कश्मीर ने 25 वर्ष की अवधि में 500 करोड़ रुपये 7.81% पर जुटाए, जबकि उत्तर प्रदेश ने 12 वर्ष और 20 वर्ष की अवधियों में 700 करोड़ रुपये और 1,000 करोड़ रुपये 7.74% और 7.82% पर उठाए।
केरल ने 2033, 2037 और 2042 परिपक्वता वाले तीन पुनर्निर्गमों के माध्यम से क्रमशः 400 करोड़ रुपये, 1,000 करोड़ रुपये और 1,400 करोड़ रुपये जुटाए। इन पर कट-ऑफ मूल्य और यील्ड 100.36 रुपये, 7.5289%, 100.43 रुपये, 7.7485% और 100.27 रुपये, 7.8282% रहे। तमिलनाडु ने 2033, 2036 और 2041 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गमों में 1,000 करोड़ रुपये, 1,000 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये जुटाए, जिन पर यील्ड क्रमशः 7.4399%, 7.6309% और 7.7495% रही।
मध्य प्रदेश ने 2042 और 2056 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गमों में 1,200 करोड़ रुपये और 600 करोड़ रुपये जुटाए, जिन पर 100.28 रुपये, 7.8271% और 101.21 रुपये, 7.7936% का परिणाम रहा। मणिपुर ने 16 वर्ष की अवधि में 300 करोड़ रुपये 7.79% पर और मिजोरम ने 15 वर्ष की अवधि में 100 करोड़ रुपये 7.79% पर जुटाए।
राज्यों की उधारी लागत और बाजार संकेत
नीलामी परिणाम दिखाते हैं कि अल्प, मध्यम और दीर्घावधि प्रतिभूतियों में राज्यों ने अलग-अलग लागत पर बाजार से धन जुटाया है। कम अवधि वाले कागजों में यील्ड अपेक्षाकृत नीचे रही, जबकि लंबी अवधि और दूर परिपक्वता वाले पुनर्निर्गमों में यील्ड 7.8% के आसपास या उससे ऊपर भी दिखाई दी।पूरी प्रस्तावित राशि का स्वीकार होना यह बताता है कि राज्यों की उधारी आवश्यकताओं के लिए बाजार में पर्याप्त मांग मौजूद है। साथ ही, विभिन्न राज्यों और अवधियों में यील्ड के अंतर से यह भी स्पष्ट होता है कि निवेशक अवधि, कूपन और पुनर्निर्गम संरचना के आधार पर मूल्य निर्धारण कर रहे हैं।
पिछली रिपोर्ट में भारत सरकार के उधारी कार्यक्रम और FY27 के लिए वित्तपोषण जोखिमों पर चर्चा की गई थी, जहां बताया गया था कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद घरेलू वित्तीय संसाधनों को पर्याप्त मानते हुए उधारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिख रही है। उसी कवरेज में RBI के FY27 वृद्धि अनुमान में कटौती और महंगाई अनुमान में बढ़ोतरी का जिक्र था, साथ ही कच्चे तेल की कीमतों व कमजोर मानसून को प्रमुख जोखिम बताया गया था।
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