RBI ने निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों पर प्रूडेंशियल मानदंड लागू किए
भारतीय रिजर्व बैंक ने विनियमित संस्थाओं द्वारा अर्जित निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए अंतिम प्रूडेंशियल मानदंड जारी किए हैं। यह कदम 5 मई 2026 को जारी मसौदा दिशानिर्देशों पर हितधारकों से मिली प्रतिक्रिया की समीक्षा और उसमें उपयुक्त संशोधनों को शामिल करने के बाद आया है।
हाइलाइट्स
- RBI ने मसौदा SNFA पर प्राप्त टिप्पणियों के बाद, संशोधित प्रावधानों के साथ गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए अंतिम प्रूडेंशियल मानदंड जारी किए।
- संशोधन वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, NBFC, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों सहित सभी प्रमुख विनियमित वित्तीय संस्थाओं पर लागू होंगे।
- नए मानदंड 2026 तक नियामकीय ढांचे में परिसंपत्ति मान्यता, वर्गीकरण और समाधान प्रक्रियाओं के बीच सुसंगतता एवं स्पष्ट अनुपालन आधार स्थापित करेंगे।
संशोधित दिशानिर्देश और दायरा
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने मसौदा SNFA दिशानिर्देशों पर प्राप्त टिप्पणियों की जांच के बाद अंतिम प्रावधानों को संबंधित संशोधनों के साथ लागू किया है। प्राप्त फीडबैक का एक विवरण परिशिष्ट में दिया गया है, जबकि अंतिम ढांचा विनियमित संस्थाओं के लिए गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रूडेंशियल व्यवहार को स्पष्ट करता है।
इसके साथ RBI ने तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान और आय की मान्यता, परिसंपत्ति वर्गीकरण तथा प्रावधान संबंधी कई संशोधन निर्देश भी जारी किए हैं। ये संशोधन वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों, शहरी सहकारी बैंकों, ग्रामीण सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और लोकल एरिया बैंकों पर लागू होते हैं।
बैंकिंग और एनबीएफसी क्षेत्र पर असर
नए मानदंडों से बैंकिंग और व्यापक वित्तीय क्षेत्र में परिसंपत्ति मान्यता और समाधान ढांचे के बीच अधिक सुसंगत नियामकीय व्यवस्था बनने की संभावना है। इससे विनियमित संस्थाओं को निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और उनके लेखांकन, वर्गीकरण तथा जोखिम प्रबंधन के लिए अधिक स्पष्ट अनुपालन आधार मिलता है।यह कदम ऐसे समय पर आया है जब RBI अलग-अलग श्रेणियों की विनियमित संस्थाओं के लिए तनावग्रस्त परिसंपत्तियों से जुड़े नियमों को अधिक एकरूप बनाने पर काम कर रहा है। जारी संशोधन निर्देश 2026 के नियामकीय ढांचे के तहत विभिन्न प्रकार के उधारदाताओं और वित्तीय संस्थानों के लिए अनुपालन अपेक्षाओं को औपचारिक रूप देते हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI द्वारा Apothecon Pharmaceuticals Private Limited के विदेशी निवेश अनुपालन से जुड़े FEMA उल्लंघनों पर जारी कंपाउंडिंग आदेश की जानकारी दी गई थी। इसमें Form ARF, FCGPR और FLA Return जैसी रिपोर्टिंग में देरी तथा पूर्व स्वीकृति के बिना शेयर आवंटन जैसे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों का निपटान, और कंपाउंडिंग के बाद आगे की जांच/कार्रवाई रुकने की प्रक्रिया को रेखांकित किया गया था।
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