RBI ने वित्तीय उत्पादों के विज्ञापन और बिक्री नियमों में संशोधन जारी किया
भारतीय वित्तीय क्षेत्र में उत्पादों की बिक्री पद्धतियों पर निगरानी कड़ी करते हुए RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए विज्ञापन, विपणन और वित्तीय उत्पादों की बिक्री से जुड़े संशोधित निर्देश जारी किए हैं। ये नियम तृतीय-पक्ष उत्पादों, डायरेक्ट सेलिंग एजेंटों, डार्क पैटर्न और मिस-सेलिंग की रोकथाम जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं और 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
हाइलाइट्स
- RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए संशोधित वित्तीय उत्पाद विज्ञापन और बिक्री निर्देश जारी किए, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
- संशोधन में Direct Selling Agents, Direct Marketing Agents, डार्क पैटर्न और मिस-सेलिंग की रोकथाम हेतु नए प्रावधान शामिल किए गए।
- एजेंसी कारोबार एवं रेफरल सेवाओं के विनियमन में बदलाव से वितरण, विपणन, तथा ग्राहक संरक्षण मानक सख्त हुए, जिससे ऑपरेशनल प्रक्रियाएँ प्रभावित होंगी।
संशोधित निर्देशों का दायरा और समयसीमा
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 11 फरवरी 2026 को जारी मसौदा संशोधन निर्देशों पर हितधारकों से मिली प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के बाद अंतिम संशोधन जारी किए हैं। यह ढांचा बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं, जिनमें तृतीय-पक्ष उत्पाद भी शामिल हैं, के विज्ञापन, विपणन और बिक्री के लिए व्यापक निर्देश तय करता है।
संशोधनों में Direct Selling Agents, Direct Marketing Agents, डार्क पैटर्न और मिस-सेलिंग की रोकथाम से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। RBI ने कहा है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर बदलाव अंतिम निर्देशों में शामिल किए गए हैं, जबकि प्रतिक्रिया का सार Annex I में दिया गया है।
ये दूसरे संशोधन निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, लोकल एरिया बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों, NBFCs और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर लागू होते हैं। सभी संशोधन 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
एजेंसी कारोबार और रेफरल सेवाओं पर असर
RBI ने विनियमित संस्थाओं द्वारा दी जाने वाली एजेंसी बिजनेस और रेफरल सेवाओं से जुड़े नियामकीय ढांचे में भी संशोधन जारी किए हैं। यह कदम Reserve Bank of India (Undertaking of Financial Services) Directions, 2025 के तहत प्रस्तावित बदलावों पर मिली प्रतिक्रिया की समीक्षा के बाद उठाया गया है।केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस पर प्राप्त फीडबैक की जांच कर अंतिम संशोधन निर्देशों में आवश्यक बदलाव शामिल किए गए हैं, जिनका विवरण Annex II में दिया गया है। संबंधित संशोधन वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों तथा NBFCs पर लागू होते हैं।
यह कदम भारत के बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में उत्पाद वितरण, ग्राहक संरक्षण और जिम्मेदार कारोबारी आचरण के मानकों को और सख्त करता है। 2027 से लागू होने वाला यह ढांचा संस्थानों के विपणन तरीकों, साझेदारी मॉडल और ग्राहक तक पहुंच की प्रक्रियाओं पर परिचालन स्तर पर असर डालता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI के कदमों पर चर्चा की गई थी, जिनमें सरकारी बॉन्ड पर FPI को कर छूट, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के उपाय शामिल थे। लेख में बताया गया था कि इन पहलों से भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि संरचनात्मक चुनौतियों के मुकाबले इसे आंशिक समाधान माना गया।
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