RBI ने नासिक रोड देओलाली व्यापारी सहकारी बैंक पर नियामकीय उल्लंघन में 2.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में अनुपालन निगरानी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने नासिक के The Nasik Road Deolali Vyapari Sahakari Bank Ltd. पर 2,10,000 रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई निदेशकों, उनके रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को ऋण देने संबंधी RBI निर्देशों के उल्लंघन से जुड़ी है, जबकि निरीक्षण बैंक की 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था।
हाइलाइट्स
- RBI ने 12 जून 2026 के आदेश में नासिक रोड देओलाली व्यापारी सहकारी बैंक पर 2.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
- जुर्माना निदेशकों के रिश्तेदारों को अवैध रूप से ऋण स्वीकृत करने और नियामनुसार अनुपालन में कमी के लिए लगाया गया।
- RBI ने स्पष्ट किया कि यह मौद्रिक दंड आगे अन्य नियामकीय कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता और सहकारी बैंकों के लिए सख्त अनुपालन का संकेत देता है।
जुर्माने का आधार और नियामकीय प्रक्रिया
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 12 जून 2026 के आदेश के तहत यह जुर्माना बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47A(1)(c) को धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पढ़ते हुए दी गई शक्तियों का उपयोग करके लगाया गया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि पर्यवेक्षी निष्कर्षों में अनुपालन संबंधी कमियां मिलने के बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें पूछा गया था कि निर्देशों का पालन न करने पर उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
RBI ने बैंक के लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद पाया कि बैंक ने अपने निदेशकों के रिश्तेदारों को ऋण स्वीकृत किए थे। इसी आरोप के कायम रहने पर मौद्रिक दंड लगाया गया।
वैधानिक निरीक्षण RBI ने बैंक की 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया था। कार्रवाई का केंद्र नियामकीय अनुपालन में कमी है, न कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर असर और आगे की गुंजाइश
यह दंड सहकारी बैंकों के लिए संबंधित पक्षों को ऋण देने के मामलों में आंतरिक नियंत्रण और शासन मानकों की अहमियत को रेखांकित करता है। RBI ने स्पष्ट किया कि यह मौद्रिक दंड किसी अन्य संभावित नियामकीय कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता है, यानी आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।नासिक क्षेत्र के सहकारी बैंकिंग परिदृश्य में यह मामला इस बात का संकेत है कि नियामक निरीक्षण केवल वित्तीय स्थिति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बोर्ड स्तर के आचरण और ऋण स्वीकृति प्रक्रियाओं की भी जांच करता है। इससे क्षेत्र के अन्य सहकारी बैंकों पर भी अनुपालन प्रणालियां मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में EUR/INR में कमजोरी और भारतीय रुपये को मिल रहे समर्थन पर चर्चा की गई थी, जहां RBI के कदमों, कम कच्चे तेल आयात लागत और घरेलू निवेशकों की मजबूत आवक को प्रमुख कारक बताया गया था। लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि तकनीकी संकेतकों के आधार पर जोड़ी सीमित दायरे में रह सकती है और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
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