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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
Pawan Khera के अनुसार, कर छूट के बावजूद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय बॉन्ड बाजार पर भरोसा कम नजर आ रहा है। 5 जून से 16 जून के बीच FPIs ने ₹13,000 करोड़ से अधिक के सरकारी प्रतिभूतियां बेचीं, जिसमें ₹11,000 करोड़ से अधिक के केंद्रीय सरकारी बॉन्ड और शेष अन्य सरकारी प्रतिभूतियां शामिल थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में जारी वैश्विक अनिश्चितता और प्रतिफल को लेकर चिंता निवेश प्रवाह को प्रभावित कर रही है। वित्त मंत्रालय और नियामक, FPI निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत पहल जारी रखे हुए हैं, लेकिन तात्कालिक रूप से बिक्री का दबाव बरकरार है।
Pawan Khera has recently commented on broader economic concerns, including the impact of medicine price hikes on household budgets. In a previous article, he detailed how rising prices were affecting consumers and market sentiment. This context comes as investors weigh domestic pressures alongside global market uncertainty.