भारतीय सरकारी उधारी कार्यक्रम के तहत 24 जून 2026 को 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामियों के परिणाम घोषित किए गए हैं। इन तीनों श्रेणियों में कुल 24,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि पूरी तरह स्वीकार की गई, जिससे अल्पकालिक उधारी की मांग और प्रतिफल का संकेत मिलता है।
हाइलाइट्स
- 24 जून 2026 की 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामी में 12,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि पर कट-ऑफ मूल्य 98.7086 और प्रतिफल 5.2476% रहा।
- 182-दिवसीय और 364-दिवसीय टी-बिल्स के लिए क्रमशः 6,000 करोड़ रुपये की राशि पर कट-ऑफ यील्ड 5.4499% और 5.6387% दर्ज की गई।
- तीनों टी-बिल्स की नीलामी में अधिसूचित राशि के बराबर स्वीकृति और बढ़ती यील्ड्स अल्पकालिक ब्याज दरें तथा सरकारी प्रतिभूति मांग का संकेत देती हैं।
24 जून की टी-बिल नीलामी के परिणाम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामियां 24 जून 2026 को आयोजित हुईं और प्रत्येक खंड में अधिसूचित राशि के बराबर स्वीकृति दी गई। 91-दिवसीय टी-बिल के लिए 12,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि पर कट-ऑफ मूल्य 98.7086 रहा और कट-ऑफ मूल्य पर निहित प्रतिफल 5.2476% दर्ज किया गया।182-दिवसीय टी-बिल के लिए 6,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि पर कट-ऑफ मूल्य 97.3544 रहा, जबकि निहित प्रतिफल 5.4499% रहा। 364-दिवसीय टी-बिल में 6,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले कट-ऑफ मूल्य 94.6761 और निहित प्रतिफल 5.6387% रहा।
अल्पकालिक उधारी और बाजार संकेत
तीनों नीलामियों में कुल स्वीकृत राशि अधिसूचित मूल्य के बराबर रहने से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र की अल्पकालिक उधारी योजना नियोजित स्तर पर आगे बढ़ रही है। अलग-अलग अवधियों में प्रतिफल का क्रमशः बढ़ना यह भी दिखाता है कि लंबी परिपक्वता वाले ट्रेजरी बिल पर निवेशकों ने अधिक प्रतिफल की मांग की।ये परिणाम मनी मार्केट, बैंकों, म्यूचुअल फंडों और अन्य संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं, क्योंकि ट्रेजरी बिल की कट-ऑफ यील्ड अल्पकालिक ब्याज दरों की दिशा और सरकारी प्रतिभूतियों की मांग का आधार प्रदान करती है।
हमारी पहले की रिपोर्ट में भारत के आठ प्रमुख आधारभूत उद्योगों (कोर सेक्टर) की वृद्धि मई में घटकर 0.5% रहने और आठ में से पांच क्षेत्रों में संकुचन दर्ज होने पर चर्चा की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और उर्वरक उत्पादन में गिरावट के बावजूद बिजली, सीमेंट और इस्पात में बढ़त से कुल सूचकांक सकारात्मक बना रहा, जिससे औद्योगिक गति पर मिले-जुले संकेत मिले।
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