RBI के 24 जून मनी मार्केट परिचालन में शुद्ध तरलता इंजेक्शन 10,311.89 करोड़ रुपये
24 जून 2026 के मनी मार्केट आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली में रिजर्व बैंक के बकाया और दैनिक परिचालनों को मिलाकर शुद्ध तरलता इंजेक्शन 10,311.89 करोड़ रुपये है। रातोंरात खंड में कुल कारोबार 6,76,503.87 करोड़ रुपये रहा, जहां भारित औसत दर 5.22 प्रतिशत दर्ज होती है।
हाइलाइट्स
- 24 जून 2026 को RBI के दैनिक परिचालन से कुल शुद्ध तरलता इंजेक्शन 10,311.89 करोड़ रुपये रहा, जबकि दिन की गतिविधियों से 1,41,614 करोड़ रुपये की शुद्ध तरलता अवशोषित की गई।
- ओवरनाइट मनी मार्केट में कुल कारोबार 6,76,503.87 करोड़ रुपये रहा, जिसमें कॉल मनी, ट्राइपार्टी रेपो, मार्केट रेपो और कॉरपोरेट बॉन्ड रेपो शामिल हैं; औसत दरें 5.20% से 5.40% के बीच रहीं।
- 31 मई 2026 तक शुद्ध टिकाऊ तरलता अधिशेष 4,86,400 करोड़ रुपये रहा, जिससे बैंकिंग प्रणाली में व्यापक तरलता अधिशेष की पुष्टि होती है।
24 जून के परिचालन और बाजार दरें
RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/534 के अनुसार, 24 जून 2026 को लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी के तहत दिन के परिचालनों से 1,41,614 करोड़ रुपये की शुद्ध तरलता अवशोषित होती है। उसी दिन एक दिन की MSF सुविधा के तहत 724 करोड़ रुपये 5.50 प्रतिशत पर और SDF के तहत 1,42,338 करोड़ रुपये 5.00 प्रतिशत पर दर्ज होते हैं।रातोंरात खंड में कॉल मनी का कारोबार 21,919.29 crore रुपये, ट्राइपार्टी रेपो 4,62,044.80 करोड़ रुपये, मार्केट रेपो 1,87,136.98 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट बॉन्ड में रेपो 5,402.80 करोड़ रुपये रहता है। इन खंडों में भारित औसत दर क्रमशः 5.37 प्रतिशत, 5.20 प्रतिशत, 5.23 प्रतिशत और 5.40 प्रतिशत है।
टर्म खंड में नोटिस मनी 141 करोड़ रुपये पर 5.51 प्रतिशत की भारित औसत दर दिखाती है, जबकि टर्म मनी में 50.50 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज है और दर का दायरा 5.65 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत रहता है। ट्राइपार्टी रेपो 2,007 करोड़ रुपये और मार्केट रेपो 1,049.32 करोड़ रुपये पर क्रमशः 5.20 प्रतिशत और 5.50 प्रतिशत की औसत दर दर्ज होती है।
बैंकिंग प्रणाली की तरलता और रिजर्व स्थिति
बकाया परिचालनों में 23 जून 2026 की सात दिन की रेपो नीलामी के 1,41,171 करोड़ रुपये 30 जून 2026 को परिपक्व होते हैं और इन पर कट-ऑफ दर 5.26 प्रतिशत है। स्टैंडिंग लिक्विडिटी फैसिलिटी के तहत RBI से 10,754.89 करोड़ रुपये की सुविधा ली जाती है, जिससे बकाया परिचालनों से शुद्ध तरलता इंजेक्शन 1,51,925.89 करोड़ रुपये बनता है।दैनिक और बकाया परिचालनों को मिलाकर कुल शुद्ध तरलता इंजेक्शन 10,311.89 करोड़ रुपये रहता है, जो संकेत देता है कि दिन के अवशोषण के बावजूद प्रणाली में समग्र तरलता अधिशेष में बनी रहती है। 24 जून 2026 को अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की RBI के पास नकद शेषराशि 7,71,964.81 करोड़ रुपये है, जबकि 30 जून 2026 को समाप्त होने वाले पखवाड़े के लिए औसत दैनिक नकद आरक्षित अनुपात आवश्यकता 8,01,069 करोड़ रुपये है।
भारत सरकार का नीलामी हेतु गणना किया गया अधिशेष नकद शेष 24 जून 2026 को शून्य है। 31 मई 2026 तक शुद्ध टिकाऊ तरलता अधिशेष 4,86,400 करोड़ रुपये दर्ज होता है, जो व्यापक प्रणालीगत तरलता की पृष्ठभूमि को रेखांकित करता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन के पीछे पूंजी की ऊंची लागत और अपेक्षित रिटर्न–जोखिम प्रीमियम की भूमिका पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि घरेलू पूंजी के सीमित विकल्पों और विदेशी पूंजी की वैश्विक गतिशीलता के कारण वैल्यूएशन और वास्तविक आय क्षमता के बीच अंतर बढ़ता है, और आगे चलकर बाहरी सेक्टर (जैसे व्यापार अधिशेष/चालू खाता) पर दबाव बाजार धारणा को प्रभावित कर सकता है।
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