भारतीय मनी मार्केट में अल्पकालिक उधारी की ताजा दिशा दिखाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन की ट्रेजरी बिल नीलामी के पूर्ण परिणाम जारी किए हैं। कुल 24,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले तीनों अवधियों में निवेशकों की मांग इससे काफी अधिक रही, जिससे कट-ऑफ यील्ड 5.2476% से 5.6387% के दायरे में तय हुई।
हाइलाइट्स
- RBI ने 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के ट्रेजरी बिलों की नीलामी में कुल 24,000 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें सभी अवधियों में मजबूत मांग रही।
- कट-ऑफ मूल्य क्रमशः 98.7086 रुपये, 97.3544 रुपये और 94.6761 रुपये रहा, जबकि यील्ड टू मैच्योरिटी 5.2476%, 5.4499% और 5.6387% निर्धारित हुई।
- प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी दोनों में, आवंटन आंशिक रहा और एक-वर्षीय ट्रेजरी बिल की प्रतिस्पर्धी मांग अधिसूचित राशि से काफी अधिक रही।
नीलामी परिणाम और आवंटन विवरण
RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/527 के अनुसार, 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के ट्रेजरी बिलों के लिए क्रमशः 12,000 करोड़ रुपये, 6,000 करोड़ रुपये और 6,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि रखी गई थी। प्रतिस्पर्धी बोलियों की प्राप्त राशि 91-दिन के लिए 30,225.550 करोड़ रुपये, 182-दिन के लिए 22,303.650 करोड़ रुपये और 364-दिन के लिए 23,780.150 करोड़ रुपये रही, जो सभी अवधियों में मजबूत मांग को दर्शाती है।कट-ऑफ मूल्य 91-दिन के लिए 98.7086 रुपये, 182-दिन के लिए 97.3544 रुपये और 364-दिन के लिए 94.6761 रुपये रहा। इन पर यील्ड टू मैच्योरिटी क्रमशः 5.2476%, 5.4499% और 5.6387% तय हुई।
प्रतिस्पर्धी बोलियों में RBI ने 91-दिन के 42 बिड्स के जरिए 11,400 करोड़ रुपये, 182-दिन के 30 बिड्स के जरिए 5,700 करोड़ रुपये और 364-दिन के 2 बिड्स के जरिए 5,700 करोड़ रुपये स्वीकार किए। आंशिक आवंटन प्रतिशत 91-दिन में 95.3900, 182-दिन में 58.1040 और 364-दिन में 94.8333 रहा।
वेटेड एवरेज प्राइस 91-दिन के लिए 98.7114 रुपये, 182-दिन के लिए 97.3580 रुपये और 364-दिन के लिए 94.6761 रुपये रहा। संबंधित वेटेड एवरेज यील्ड क्रमशः 5.2360%, 5.4423% और 5.6387% दर्ज की गई।
बाजार मांग और तरलता पर संकेत
गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के लिए क्रमशः 6, 5 और 3 बोलियां प्राप्त हुईं, जिनकी राशि 1,714.404 करोड़ रुपये, 1,115.444 करोड़ रुपये और 316.458 करोड़ रुपये रही। इनमें से स्वीकार राशि क्रमशः 1,700 करोड़ रुपये, 1,100 करोड़ रुपये और 300 करोड़ रुपये रही।गैर-प्रतिस्पर्धी आवंटन का आंशिक प्रतिशत 91-दिन में 97.6556, 182-दिन में 95.1040 और 364-दिन में 94.7993 रहा। नतीजे संकेत देते हैं कि अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशकों की भागीदारी व्यापक बनी हुई है, जबकि लंबी अवधि वाले एक-वर्षीय ट्रेजरी बिल पर भी अधिसूचित राशि की तुलना में काफी अधिक प्रतिस्पर्धी मांग दर्ज हो रही है।
हमारी पहले की रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन के पीछे ‘पूंजी की ऊंची लागत’ के तर्क पर चर्चा की गई थी, जहां 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की लगभग 7% जोखिम-मुक्त दर और अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम इक्विटी के लिए अपेक्षित रिटर्न को ऊपर धकेलते हैं। लेख में यह भी बताया गया था कि घरेलू पूंजी के सीमित विकल्पों और वैश्विक स्तर पर अधिक आकर्षक यील्ड के चलते विदेशी निवेशक ऊंचे वैल्यूएशन का लाभ उठा सकते हैं, जबकि घरेलू निवेशकों के लिए रिटर्न की अपेक्षाएं चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।
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