RBI के जून आंकड़ों में वाणिज्यिक बैंकों की ऋण, जमा दरों में मिला-जुला रुख
भारत के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की ऋण और जमा दरों के जून 2026 के आंकड़े बैंकिंग क्षेत्र में उधारी और फंडिंग लागत के अलग-अलग रुझान दिखाते हैं। मई 2026 में ताजा रुपये ऋणों पर भारित औसत ऋण दर हल्की बढ़त के साथ 8.51 प्रतिशत पर रही, जबकि बकाया ऋणों और बकाया सावधि जमाओं पर दरों में मामूली नरमी दर्ज हुई।
हाइलाइट्स
- मई 2026 में ताजा रुपये ऋणों पर भारित औसत ऋण दर 8.51 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल 2026 में यह 8.50 प्रतिशत थी।
- मार्च 2026 के अंत तक बकाया floating rate रुपये ऋणों में EBLR से जुड़े ऋणों की हिस्सेदारी बढ़कर 67.6 प्रतिशत हो गई, MCLR की हिस्सेदारी घटकर 30.2 प्रतिशत रह गई।
- मई 2026 में ताजा़ रुपये सावधि जमाओं पर औसत दर 5.84 प्रतिशत रही, जबकि बकाया जमाओं पर दर घटकर 6.57 प्रतिशत पर आ गई।
जून 2026 के दर आंकड़े और संरचना
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के जून 2026 के जारी आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, जिनमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और small finance banks शामिल नहीं हैं, की ऋण और जमा दरों का ब्योरा तालिका 1 से 9 में दिया गया है। मई 2026 में ताजा रुपये ऋणों पर भारित औसत ऋण दर 8.51 प्रतिशत रही, जो अप्रैल 2026 के 8.50 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।वहीं, बकाया रुपये ऋणों पर भारित औसत ऋण दर अप्रैल 2026 के 8.98 प्रतिशत से घटकर मई 2026 में 8.97 प्रतिशत पर आ गई। एक वर्ष की median Marginal Cost of Funds based Lending Rate, MCLR, जून 2026 में 8.50 प्रतिशत रही, जो मई 2026 के 8.65 प्रतिशत से कम है। RBI के अनुसार, मई 2026 में ताजा और बकाया दोनों रुपये ऋणों की दरों में क्षेत्रों के बीच मिला-जुला रुख दिखा।
बेंचमार्क लिंकिंग और जमा दरों का असर
मार्च 2026 के अंत तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल बकाया floating rate रुपये ऋणों में External Benchmark based Lending Rate, EBLR, से जुड़े ऋणों की हिस्सेदारी 67.6 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2025 के अंत में 65.5 प्रतिशत थी। इसी अवधि में MCLR से जुड़े ऋणों की हिस्सेदारी 32.0 प्रतिशत से घटकर 30.2 प्रतिशत रह गई, जिससे बाहरी बेंचमार्क आधारित मूल्य निर्धारण की ओर झुकाव और स्पष्ट होता है।जमा पक्ष में, ताजा रुपये सावधि जमाओं पर भारित औसत घरेलू सावधि जमा दर मई 2026 में 5.84 प्रतिशत रही, जो अप्रैल 2026 के 5.79 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, बकाया रुपये सावधि जमाओं पर यह दर अप्रैल 2026 के 6.59 प्रतिशत से घटकर मई 2026 में 6.57 प्रतिशत पर आ गई, जिससे संकेत मिलता है कि बैंकों की देनदारी लागत में भी मिश्रित रुख बना हुआ है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में मई 2026 के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के 5.1% पर तेज होने और इसमें बिजली, विनिर्माण व जल आपूर्ति जैसे खंडों की भूमिका पर चर्चा की गई थी। उस लेख में नई IIP श्रृंखला (2022-23 आधार वर्ष) और कुछ मदों के लिए WPI की जगह Output Producer Price Index अपनाने से विनिर्माण सहित वृद्धि दरों पर पड़ने वाले असर को भी रेखांकित किया गया था।
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