राज्यों की प्रतिभूति नीलामी में 24,570.053 करोड़ रुपये स्वीकार, पंजाब में आंशिक उठाव
भारतीय राज्यों की उधारी जरूरतों के लिए आयोजित यील्ड और प्राइस आधारित नीलामी में कुल 24,800 करोड़ रुपये के मुकाबले 24,570.053 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए। इस आवंटन में अधिकांश राज्यों ने अपनी पूरी लक्षित राशि जुटाई, जबकि पंजाब की एक पुनर्निर्गम श्रृंखला में मांग के अनुरूप केवल आंशिक स्वीकृति हुई।
हाइलाइट्स
- आठ राज्यों ने राज्य विकास ऋण नीलामी में 24,570.053 करोड़ रुपये स्वीकार किए, जो कुल 24,800 करोड़ रुपये निर्गम आकार से थोड़ा कम है।
- नीलामी में यील्ड का दायरा 7.0383% से 7.7204% तक रहा, जिससे विभिन्न परिपक्वताओं में उधारी लागत का अंतर स्पष्ट हुआ।
- कई राज्यों ने पुनर्निर्गम का उपयोग कर बॉन्ड की तरलता और परिचय बनाए रखते हुए अपने वित्त पोषण कार्यक्रमों को मार्केट डिमांड के अनुसार संतुलित किया।
नीलामी परिणाम और राज्यों का उठाव
जैसा कि Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से बताया गया है, इस राज्य विकास ऋण नीलामी में आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ने अपने-अपने प्रस्तावित निर्गम के मुकाबले पूरी राशि स्वीकार की। कुल स्वीकृत राशि 24,570.053 करोड़ रुपये रही, जो कुल 24,800 करोड़ रुपये के निर्गम आकार से थोड़ी कम है।आंध्र प्रदेश ने 10 वर्ष, 2043 और 2056 परिपक्वता वाले निर्गमों में कुल 3,800 करोड़ रुपये जुटाए। गुजरात ने 9 वर्ष और 12 वर्ष के कागजों के जरिए 2,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए, जबकि महाराष्ट्र ने 2031 से 2054 तक की विभिन्न पुनर्निर्गम श्रृंखलाओं में कुल 10,600 करोड़ रुपये जुटाए। मेघालय ने 300 करोड़ रुपये, मिजोरम ने 100 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 1,500 करोड़ रुपये, तमिलनाडु ने 2,000 करोड़ रुपये और तेलंगाना ने 2,500 करोड़ रुपये स्वीकार किए।
पंजाब ने दो पुनर्निर्गमों में से 2033 परिपक्वता वाले 7.55% SGS के खिलाफ 1,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव में केवल 770.053 करोड़ रुपये स्वीकार किए, जबकि 2044 परिपक्वता वाले 7.92% SGS पुनर्निर्गम में 1,000 करोड़ रुपये की पूरी राशि उठाई गई। इसी आंशिक स्वीकृति के कारण कुल निर्गम आकार और कुल स्वीकृत राशि के बीच अंतर बना।
यील्ड संकेत और बाजार पर असर
नीलामी के नतीजे दिखाते हैं कि विभिन्न राज्यों और परिपक्वताओं में यील्ड का दायरा लगभग 7.0383% से 7.7204% तक रहा, जिससे अल्पावधि और दीर्घावधि उधारी लागत में अंतर साफ दिखाई देता है। एकाधिक राज्यों ने पुनर्निर्गम मार्ग अपनाया, जो मौजूदा राज्य विकास ऋण श्रृंखलाओं में तरलता बनाए रखने और बाजार से परिचित कागजों के जरिए उधारी लागत प्रबंधन की रणनीति को दर्शाता है।महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना के कई निर्गम पुनर्निर्गम के रूप में आए, जिनमें मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई 2026 में जारी पूर्ववर्ती बॉन्ड श्रृंखलाएं शामिल हैं। यह पैटर्न संकेत देता है कि राज्य सरकारें मौजूदा उधारी कार्यक्रमों के भीतर परिपक्वता प्रोफाइल को संतुलित करते हुए बाजार की मांग के अनुसार फंडिंग जुटा रही हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई द्वारा 1–5 जून 2026 के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार के दैनिक मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें FCY/INR और FCY/FCY खंडों में स्पॉट, फॉरवर्ड और खासकर इंटर-बैंक स्वैप वॉल्यूम के जरिए बैंकों की हेजिंग, फंडिंग और अल्पकालिक तरलता प्रबंधन गतिविधि के संकेत बताए गए थे।
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