RBI ने Dhani Loans पर परिसंपत्ति वर्गीकरण उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक ने नियामकीय अनुपालन पर सख्ती जारी रखते हुए Dhani Loans and Services Limited पर 2.70 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 15 जुलाई 2026 के आदेश के तहत की गई है और मामला कुछ ऋण खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत नहीं करने से जुड़ा है।
हाइलाइट्स
- RBI ने Dhani Loans पर 'Asset Classification' दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए RBI अधिनियम 1934 के तहत मौद्रिक दंड लगाया।
- 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति की सांविधिक निरीक्षण के बाद, कंपनी को NPA वर्गीकरण में विफलता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी हुआ।
- RBI ने स्पष्ट किया कि दंड नियामकीय अनुपालन में कमी के कारण है और भविष्य में अतिरिक्त पर्यवेक्षी या प्रवर्तन कदम संभव हैं।
निरीक्षण, नोटिस और दंड का आधार
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह दंड RBI अधिनियम, 1934 की धारा 58G(1)(b) और धारा 58B(5)(aa) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि कंपनी ने 'Asset Classification' संबंधी उसके कुछ निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।RBI ने कंपनी का सांविधिक निरीक्षण 31 मार्च 2025 तक की उसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया था। पर्यवेक्षी निष्कर्षों में अनुपालन की कमी सामने आने के बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें पूछा गया कि निर्देशों का पालन न करने पर उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
कंपनी के जवाब और अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद RBI ने पाया कि उसके खिलाफ लगाया गया आरोप कायम है। नियामक के अनुसार, कंपनी कुछ ऋण खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों, यानी NPA, के रूप में वर्गीकृत करने में विफल रही।
नियामकीय असर और आगे की गुंजाइश
RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों के आधार पर की गई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि इस दंड का उद्देश्य कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई राय देना नहीं है।नियामक ने आगे कहा कि यह मौद्रिक दंड RBI की ओर से भविष्य में की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता। इससे संकेत मिलता है कि अनुपालन संबंधी मामलों में केंद्रीय बैंक अलग से अतिरिक्त पर्यवेक्षी या प्रवर्तन कदम भी उठा सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI द्वारा Apothecon Pharmaceuticals Private Limited को विदेशी निवेश से जुड़े FEMA उल्लंघनों पर जारी कंपाउंडिंग आदेश का विवरण था। इसमें Form ARF, FCGPR, FLA Return जैसी रिपोर्टिंग में देरी और पूर्व स्वीकृति/प्रक्रियात्मक चूकों के निपटान की शर्तें बताई गई थीं, जिनके पूरा होने पर इन मामलों में आगे की जांच/कार्रवाई रुकने का संकेत मिलता है।
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