भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रतिभूतिकरण नोट्स की जारी करने और बाद के हस्तांतरण ढांचे में दक्षता, तरलता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से मसौदा संशोधन निर्देश जारी किए हैं। ये प्रस्ताव वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होते हैं।
हाइलाइट्स
- RBI ने 27 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए प्रतिभूतिकरण नोट्स पर चार मसौदा संशोधन निर्देश जारी किए।
- प्रस्तावित संशोधन वाणिज्यिक बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, एनबीएफसी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए SNs के निर्गम व हस्तांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएंगे।
- इन बदलावों से भारत के प्रतिभूतिकरण बाजार में नियामक स्पष्टता, द्वितीयक हस्तांतरण की प्रक्रिया तथा सभी प्रतिभागियों के लिए अनुपालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मसौदा ढांचा
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए चार मसौदा संशोधन निर्देश जारी किए हैं, जिनका फोकस Securitisation Notes, या SNs, के निर्गम और उनके बाद के हस्तांतरण को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाना है। प्रस्तावित संशोधन Reserve Bank of India (Commercial Banks - Securitisation Transactions) Amendment Directions, 2026, Reserve Bank of India (Small Finance Banks - Securitisation Transactions) Amendment Directions, 2026, Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies - Securitisation Transactions) Amendment Directions, 2026, और Reserve Bank of India (All India Financial Institutions - Securitisation Transactions) Amendment Directions, 2026 को कवर करते हैं。RBI ने कहा है कि मसौदा दिशानिर्देशों पर आम जनता और अन्य हितधारकों से 27 अगस्त 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं। प्रतिक्रिया रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध 'Connect2Regulate' अनुभाग के लिंक के माध्यम से भेजी जा सकती है, जबकि वैकल्पिक रूप से इसे मुख्य महाप्रबंधक, Credit Risk Group, Department of Regulation, Central Office, Reserve Bank of India, मुंबई को डाक या ईमेल से भी भेजा जा सकता है।
बाजार तरलता और नियामकीय प्रभाव
यह पहल भारत के प्रतिभूतिकरण बाजार में द्वितीयक हस्तांतरण तंत्र को अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में नियामकीय कदम के रूप में देखी जाती है। यदि मसौदा संशोधन लागू होते हैं, तो वे विभिन्न विनियमित संस्थाओं के लिए SNs के निर्गम और ट्रेडिंग प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता ला सकते हैं।प्रस्तावित बदलावों का दायरा बैंकिंग और गैर-बैंकिंग दोनों खंडों तक फैला है, जिससे संकेत मिलता है कि RBI पूरे वित्तीय तंत्र में प्रतिभूतिकरण लेनदेन के लिए अधिक एकरूप ढांचा विकसित करना चाहता है। इससे निवेशकों, मूल ऋणदाताओं और अन्य बाजार भागीदारों के लिए अनुपालन और लेनदेन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में निफ्टी फिक्स्ड इनकम बेंचमार्क्स में 31 जुलाई 2026 से लागू होने वाले पुनर्संतुलन और उनके तहत विभिन्न G-Sec तथा डेट उप-सूचकांकों में प्रतिभूतियों की जोड़-घट और वेटेज बदलावों पर चर्चा की गई थी। उस लेख में बताया गया था कि ऐसे इंडेक्स बदलाव पोर्टफोलियो रिबैलेंसिंग, ट्रैकिंग रणनीतियों और निष्क्रिय ऋण निवेश उत्पादों की संरचना व अवधि प्रोफाइल को प्रभावित कर सकते हैं।
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