आरबीआई ने 20,100 करोड़ रुपये के राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी परिणाम जारी किए
25 अगस्त 2026 को हुई राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में कई राज्यों ने अलग-अलग अवधि वाले बॉन्ड के जरिए कुल 20,100 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस निर्गम में आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु की प्रतिभूतियां शामिल हैं, जबकि कुल प्रतिस्पर्धी बोलियां 53,804.5 करोड़ रुपये तक पहुंची हैं।
हाइलाइट्स
- आरबीआई की राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी में 20,100 करोड़ रुपये अधिसूचित राशि के मुकाबले कुल 53,804.5 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
- कट-ऑफ यील्ड में अंतर रहा—महाराष्ट्र SGS 2031 पर 7.09%, गुजरात SGS 2036 पर 7.47% और राजस्थान SGS 2053 सहित दीर्घकालिक बॉन्ड्स पर 7.68%-7.69%।
- गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 155 बोलियों के मुकाबले 1,320.858 करोड़ रुपये आवंटन दर्शाता है कि खुदरा व फंड संस्थागत मांग मजबूत बनी रही।
नीलामी के परिणाम और उधारी का आकार
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार (Reserve Bank of India), 25 अगस्त 2026 को आयोजित इस नीलामी में कुल 20,100 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 53,804.5 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 18,779.142 करोड़ रुपये और गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 1,320.858 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिससे कुल आवंटन अधिसूचित राशि के बराबर 20,100 करोड़ रुपये रहा।नीलामी में आंध्र प्रदेश ने 2039 और 2051 परिपक्वता वाली प्रतिभूतियां, गुजरात ने 2036 और 2041, हरियाणा ने 2035 और 2048, महाराष्ट्र ने 2031, 2039 और 2049, पंजाब ने 2030 और 2039, राजस्थान ने 2044 और 2053, तथा तमिलनाडु ने 2036, 2041 और 2051 परिपक्वता वाली प्रतिभूतियां पेश कीं। कई निर्गम पुनर्निर्गम के रूप में आए, जिनमें जुलाई और अगस्त 2026 में पहले जारी किए गए बॉन्ड भी शामिल हैं।
कट-ऑफ यील्ड विभिन्न प्रतिभूतियों में अलग-अलग रही। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र SGS 2031 पर 7.09% की कट-ऑफ यील्ड रही, जबकि महाराष्ट्र SGS 2049 पर यह 7.70% रही। पंजाब SGS 2030 पर कट-ऑफ यील्ड 7.2764% और गुजरात SGS 2036 पर 7.47% दर्ज की गई, जो छोटी और मध्यम अवधि के कागजों में अपेक्षाकृत कम उधारी लागत को दर्शाती है।
राज्यों की मांग, मूल्य निर्धारण और बाजार संकेत
कुल बोलियों का आकार यह संकेत देता है कि राज्य विकास ऋण बाजार में निवेशकों की मांग मजबूत बनी हुई है, हालांकि अलग-अलग परिपक्वताओं और राज्यों के लिए मूल्य निर्धारण में स्पष्ट अंतर दिखता है। लंबी अवधि वाले कुछ निर्गमों, जैसे राजस्थान SGS 2053, आंध्र प्रदेश SGS 2051 और तमिलनाडु SGS 2051, में यील्ड 7.68% से 7.69% के आसपास रही, जो लंबी अवधि के जोखिम और निवेशक प्रतिफल अपेक्षाओं को दिखाती है।कई निर्गमों में आंशिक आवंटन भी किया गया, जिससे पता चलता है कि राज्यों ने अपनी अधिसूचित उधारी सीमा और वांछित मूल्य स्तर को बनाए रखने की कोशिश की है। गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 155 बोलियों के जरिए 1,417.244 करोड़ रुपये की मांग आई, जिनमें से 1,320.858 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए, यह दर्शाता है कि खुदरा और संस्थागत गैर-प्रतिस्पर्धी भागीदारी भी सक्रिय रही है।
यह नीलामी राज्यों के लिए चालू वित्तीय वर्ष में बाजार उधारी कार्यक्रम का हिस्सा है। अलग-अलग परिपक्वताओं पर निकली यील्ड आगे राज्य उधारी लागत, निवेशक मांग और उप-राष्ट्रीय ऋण बाजार के मूल्य निर्धारण के लिए एक संकेतक का काम करती है।
ICRA की ताजा क्रेडिट रेटिंग कार्रवाइयाँ हमारे पिछले लेख का केंद्र थीं, जिनमें Veritas Finance, Axis Wind Farms (Rayalaseema) और Orange Retail Finance India के विभिन्न ऋण साधनों पर रेटिंग अपडेट शामिल थे। हमने बताया था कि securitisation लेनदेन, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और NCDs पर ये रेटिंग निर्णय जारीकर्ताओं की साख और पुनर्भुगतान क्षमता को लेकर बाजार को अहम संकेत देते हैं। ऐसे अपडेट निवेशकों के पूंजी आवंटन और उधारी लागत/मूल्य निर्धारण की समझ को बेहतर बनाते हैं—जो मौजूदा राज्य विकास ऋण (SGS) नीलामी के यील्ड संकेतों को पढ़ने में भी मददगार संदर्भ देता है।
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