आरबीआई की राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी में 18,963.348 करोड़ रुपये का आवंटन

आरबीआई की राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी में 18,963.348 करोड़ रुपये का आवंटन
राज्य बांड नीलामी अपडेट

27 अक्टूबर 2026 को हुई राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में कुल 23,300 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 18,963.348 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ। इस नीलामी में तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश ने अपनी कई पेशकशों में पूरा या लगभग पूरा आवंटन लिया, जबकि गुजरात, झारखंड, केरलम और सिक्किम की कुछ प्रतिभूतियों में कोई राशि स्वीकार नहीं की गई।

हाइलाइट्स

  • आरबीआई की 27 अक्टूबर 2026 को हुई राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी में कुल 18,963.348 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ।
  • तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश ने अपने-अपने परिपक्वता वर्षों के विभिन्न बॉंड्स में पूर्ण आवंटन लिया, जबकि गुजरात, झारखंड और केरलम ने कोई आवंटन नहीं लिया।
  • कट-ऑफ यील्ड्स 7.9593 प्रतिशत से 8.28 प्रतिशत के बीच रहीं, निवेशक मांग मजबूत रही लेकिन कई राज्यों ने उधारी लागत नियंत्रित करने के लिए सीमित धन स्वीकार किया।

नीलामी परिणाम और राज्यों की स्वीकृति

आरबीआई की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस नीलामी में अलग-अलग राज्यों ने अपनी उधारी जरूरत और बाजार प्रतिफल के आधार पर भिन्न रुख अपनाया। कुल 1,452 प्रतिस्पर्धी बोलियां 79,748.400 करोड़ रुपये की प्राप्त हुईं, जबकि 180 गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां 1,334.997 करोड़ रुपये की आईं।

बिहार ने 2035 और 2041 प्रतिभूतियों में क्रमशः 1,000 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये का पूरा आवंटन लिया। तमिलनाडु ने 2041, 2046, 2051 और 2056 प्रतिभूतियों में क्रमशः 2,500 करोड़ रुपये, 2,500 करोड़ रुपये, 2,000 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये का पूरा आवंटन किया, जबकि उत्तर प्रदेश ने 2032, 2042, 2051 प्रतिभूतियों में 500 करोड़ रुपये, 1,000 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये जुटाए।

असम ने 2035 की 9-वर्षीय प्रतिभूति में 1,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 606.733 करोड़ रुपये ही स्वीकार किए। नागालैंड ने 2035 की 9-वर्षीय प्रतिभूति में 300 करोड़ रुपये के मुकाबले 256.615 करोड़ रुपये का आंशिक आवंटन लिया। छत्तीसगढ़ ने 2040 और 2048 प्रतिभूतियों में क्रमशः 600 करोड़ रुपये और 600 करोड़ रुपये का पूरा आवंटन किया, जबकि हिमाचल प्रदेश ने 2049 प्रतिभूति में 400 करोड़ रुपये का पूरा आवंटन लिया।

इसके विपरीत, गुजरात ने 2035 और 2038 की पुनः जारी प्रतिभूतियों में कोई राशि स्वीकार नहीं की। झारखंड ने 2033 प्रतिभूति, केरलम ने 14-वर्षीय प्रतिभूति और सिक्किम ने 2030 प्रतिभूति में भी कोई आवंटन नहीं लिया, जबकि सिक्किम 2042 प्रतिभूति में 200 करोड़ रुपये का पूरा आवंटन हुआ। उत्तराखंड ने 2038 प्रतिभूति में 500 करोड़ रुपये का लगभग पूरा आवंटन 499.903 करोड़ रुपये प्रतिस्पर्धी और 0.097 करोड़ रुपये गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों के जरिए पूरा किया।

प्रतिफल स्तर और उधारी बाजार पर असर

नीलामी में कट-ऑफ यील्ड अलग-अलग परिपक्वताओं और राज्यों के हिसाब से बदली। असम 2035 के लिए कट-ऑफ यील्ड 8.15 प्रतिशत रही, बिहार 2035 के लिए 8.18 प्रतिशत और बिहार 2041 के लिए 8.2811 प्रतिशत दर्ज हुई, जबकि तमिलनाडु 2041, 2046, 2051 और 2056 के लिए यह क्रमशः 8.2597 प्रतिशत, 8.2767 प्रतिशत, 8.2656 प्रतिशत और 8.2537 प्रतिशत रही।

उत्तर प्रदेश 2032 की प्रतिभूति 7.9593 प्रतिशत के कट-ऑफ यील्ड पर रही, जो इस सूची में अपेक्षाकृत कम उधारी लागत दिखाती है, जबकि उत्तर प्रदेश 2042 और 2051 के लिए कट-ऑफ यील्ड क्रमशः 8.2789 प्रतिशत और 8.2772 प्रतिशत रही। छत्तीसगढ़ 2040 और 2048, हिमाचल प्रदेश 2049, मणिपुर 2042 और उत्तराखंड 2038 जैसी प्रतिभूतियों में कट-ऑफ यील्ड लगभग 8.23 प्रतिशत से 8.25 प्रतिशत के दायरे में रही।

यह परिणाम दिखाता है कि राज्य उधारी बाजार में निवेशक मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन सभी राज्य हर बोली स्तर पर धन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जिन राज्यों ने ऊंचे प्रतिफल पर भी सीमित या शून्य स्वीकृति दी, वे अपनी उधारी लागत पर सख्त रुख का संकेत देते हैं, जबकि बड़े उधारकर्ता राज्यों ने बाजार से पर्याप्त धन जुटाकर अपनी वित्तपोषण योजनाओं को आगे बढ़ाया।

हमारी पिछली रिपोर्ट में विश्व बैंक की उन बातचीतों पर चर्चा की गई थी, जिनमें बढ़ती ऊर्जा व उर्वरक कीमतों के बीच कर्ज दबाव झेल रहे 30–40 देशों के लिए आपात वित्तपोषण और ऋण-सहायता विकल्पों का दायरा बढ़ाने की संभावनाएं शामिल थीं। लेख में 2026 में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर बाहरी ऋण भुगतान के भारी बोझ, ऊंची उधारी लागत और जोखिम बढ़ने की पृष्ठभूमि के साथ निजी पूंजी जुटाने तथा बैंकॉक बैठकों में कर्ज स्थिरता और संकट सहायता पर फोकस को रेखांकित किया गया था।

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