भारत सरकार ईंधन और विदेशी मुद्रा खर्च घटाने के लिए मितव्ययिता उपाय लाने की तैयारी में
पश्चिम एशिया संघर्ष के गहराते आर्थिक असर के बीच केंद्र सरकार अपने ही खर्च पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक मितव्ययिता कदम तैयार कर रही है। प्रस्तावित उपायों में ईंधन खपत घटाना, आधिकारिक विदेश यात्राएं सीमित करना, औपचारिक आयोजनों पर खर्च कम करना और सरकारी बैठकों को जहां संभव हो डिजिटल मंचों पर स्थानांतरित करना शामिल है।
हाइलाइट्स
- भारत सरकार मंत्रालयों और विभागों में तत्काल ईंधन और विदेशी यात्रा पर खर्च कटौती के आदेश जारी करने की तैयारी कर रही है।
- 2026 की शुरुआत में विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर पर था, लेकिन संघर्ष के बाद इसमें करीब 33 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
- पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही में खुदरा ईंधन बिक्री पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना कर सकती हैं।
मंत्रालयों के लिए खर्च कटौती की रूपरेखा
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालयों और विभागों को प्रशासनिक व्यय में उल्लेखनीय कटौती के लिए तत्काल कदम चिन्हित करने को कहा गया है, खासकर अनावश्यक विदेशी यात्रा और ईंधन उपयोग पर। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये पाबंदियां मंत्रियों और अधिकारियों, दोनों पर लागू होंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित मंत्रालय और विभाग जल्द ही इन मितव्ययिता उपायों पर आदेश जारी कर सकते हैं। व्यय विभाग भी ऐसा ही एक आदेश जारी करने वाला है, जिसका असर सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर पड़ सकता है।
नीतिनिर्माताओं का मुख्य जोर ईंधन मांग को नियंत्रित करने पर है, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति व्यवधान और बढ़ती आयात लागत को लेकर चिंता बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बंदी की अनिश्चितता को एक बड़े जोखिम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
तेल, रुपया और चालू खाते पर बढ़ता दबाव
अधिकारियों ने माना है कि ईंधन की उपलब्धता और वहनीयता सरकार की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। यह आशंका भी बढ़ रही है कि U.S. रूस से तेल और गैस खरीद से जुड़े प्रतिबंध छूट को आगे नहीं बढ़ा सकता, जिससे सरकारी स्तर पर चिंता और गहरी हो रही है।भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति अभी भी मजबूत मानी जाती है, लेकिन उस पर नया दबाव दिख रहा है। 2026 की शुरुआत में विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें करीब 33 अरब डॉलर की गिरावट आई है, जो रुपये को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप को दर्शाती है।
पिछले एक वर्ष में रुपया करीब 11% कमजोर हुआ है, जिसमें संघर्ष तेज होने के बाद 4.7% की गिरावट शामिल है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सोना भंडार, SDRs और RBI की फॉरवर्ड पोजिशन को समायोजित करने के बाद उपयोग योग्य भंडार काफी कम हो सकता है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने हाल में चेतावनी दी है कि भारत का चालू खाता घाटा FY27 में GDP के 2% से ऊपर जा सकता है, जबकि FY26 में यह 1% से नीचे है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य दबाव में आ सकते हैं।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को केवल अप्रैल से जून तिमाही में खुदरा ईंधन बिक्री पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कुल अंडर-रिकवरी का अनुमान 2 लाख करोड़ रुपये तक बताया गया है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट के बीच आयातित ईंधन और अन्य वस्तुओं पर निर्भरता घटाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर फोकस था। उस लेख में ईंधन खपत कम करने (जैसे मेट्रो/कारपूलिंग/EV), विदेशी यात्रा टालने और सोना व खाद्य तेल जैसी आयात-निर्भर खपत में संयम के जरिए विदेशी मुद्रा बचाने तथा बाहरी झटकों के असर को सीमित करने की जरूरत रेखांकित की गई थी।
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