भारत सरकार 19 जून की नीलामी में 32,000 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूति पुनः निर्गम की पेशकश करेगी

भारत सरकार 19 जून की नीलामी में 32,000 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूति पुनः निर्गम की पेशकश करेगी
32,000 करोड़ की नीलामी

भारत सरकार 19 जून 2026 को 32,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की पुनः बिक्री के लिए अंडरराइटिंग नीलामी आयोजित करती है। इस पेशकश में 2029, 2033, 2055 और 2056 परिपक्वता वाली चार प्रतिभूतियां शामिल हैं, जिनके लिए प्राथमिक डीलरों पर न्यूनतम अंडरराइटिंग और बोली प्रतिबद्धताएं लागू होती हैं।

हाइलाइट्स

  • भारत सरकार 19 जून की नीलामी में कुल 32,000 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूतियों का पुनः निर्गम करेगी।
  • 6.03% GS 2029 और 6.68% GS 2033 के लिए 11,000-11,000 करोड़ रुपये तथा 7.24% GS 2055 और 7.50% GOI SGrB 2056 के लिए 5,000-5,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि निर्धारित।
  • प्रत्येक प्राथमिक डीलर के लिए 2029 और 2033 प्रतिभूतियों हेतु 262 करोड़ रुपये व 2055 और 2056 हेतु 120 करोड़ रुपये की न्यूनतम अंडरराइटिंग प्रतिबद्धता लागू।

नीलामी की संरचना और समय-सारिणी

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अंडरराइटिंग नीलामी 19 जून 2026, शुक्रवार को मल्टीपल प्राइस-आधारित पद्धति से आयोजित होती है। प्राथमिक डीलर अंडरराइटिंग नीलामी के दिन सुबह 9:00 बजे से 9:30 बजे तक Reserve Bank of India Core Banking Solution, e-Kuber प्रणाली के माध्यम से ACU नीलामी के लिए अपनी बोलियां इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा कर सकते हैं।

नीलामी के तहत 6.03% GS 2029 और 6.68% GS 2033 के लिए 11,000-11,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि तय है, जबकि 7.24% GS 2055 और 7.50% GOI SGrB 2056 के लिए 5,000-5,000 करोड़ रुपये की राशि अधिसूचित है। 2029 और 2033 प्रतिभूतियों के लिए प्रति प्राथमिक डीलर न्यूनतम अंडरराइटिंग प्रतिबद्धता 262 करोड़ रुपये है, जबकि 2055 और 2056 प्रतिभूतियों के लिए यह 120 करोड़ रुपये है, और ACU के तहत न्यूनतम बोली प्रतिबद्धता भी समान स्तर पर लागू होती है।

प्राथमिक डीलरों पर प्रभाव और भुगतान व्यवस्था

यह नीलामी 14 नवंबर 2007 को अधिसूचित अंडरराइटिंग प्रतिबद्धता योजना के तहत संचालित होती है, जिसके अनुसार प्रत्येक प्राथमिक डीलर के लिए न्यूनतम अंडरराइटिंग प्रतिबद्धता और अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी अंडरराइटिंग बोली दायित्व निर्धारित किए जाते हैं। इससे सरकारी उधारी कार्यक्रम के लिए मांग समर्थन और निर्गम प्रक्रिया में भागीदारी का ढांचा स्पष्ट रहता है।

अंडरराइटिंग कमीशन प्रतिभूतियों के निर्गम के दिन संबंधित प्राथमिक डीलरों के RBI में चालू खाते में जमा किया जाता है। यह व्यवस्था सरकारी प्रतिभूति बाजार में नीलामी निष्पादन और सेटलमेंट प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रखने में मदद करती है।

भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI के उपायों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में चर्चा की गई थी। उसमें सरकारी बॉन्ड पर एफपीआई के लिए कर राहत, Fully Accessible Route के विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के कदमों के साथ FCNR(B) जमा व रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो जैसी व्यवस्थाओं के जरिए बैंकिंग फंडिंग और भुगतान संतुलन दबाव कम होने की संभावित भूमिका बताई गई थी।

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