Ashutosh Sureka

भारत का GCC क्षेत्र विस्तार और विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा

भारत का GCC क्षेत्र विस्तार और विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा
GCC से बढ़ेगा निवेश

दिल्ली में माइंडमाइन समिट 2026 के दौरान भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती हैं कि देश का global capability centre, GCC, विस्तार पारंपरिक प्रौद्योगिकी केंद्रों से निकलकर टियर 2 शहरों तक पहुंच रहा है। उन्होंने इस रुझान को रोजगार, डेटा सेंटर निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक गतिविधि के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए विदेशी पूंजी जुटाने तथा कृषि आय पर दबाव जैसे समानांतर जोखिमों पर भी जोर दिया।

हाइलाइट्स

  • FY24 में भारत में लगभग 1,700 GCC हैं, जिनकी संयुक्त आय 60 प्रतिशत बढ़कर $64.6 अरब हुई, और सरकार 2030 तक $105 अरब लक्ष्य रखती है।
  • RBI ने 30 सितंबर तक FCNR(B) जमा और सार्वजनिक इकाइयों को concessional forex swap window की अनुमति दी, जिससे ECB के जरिए विदेशी पूंजी जुटाना सस्ता होगा।
  • मई 2025 से मई 2026 के बीच वैश्विक यूरिया कीमतें 141 प्रतिशत बढ़ने की अनुमानित हैं, जिससे भारत की कृषि लागत और खाद्य सुरक्षा जोखिम बढ़ेंगे।

GCC विस्तार और पूंजी जुटाने की नीति

Forbes India के अनुसार, सीतारमण ने कहा कि भारत की GCC वृद्धि अब केवल बेंगलुरु, हैदराबाद, नोएडा या गाजियाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि तुमकुर और मंगलुरु जैसे शहर भी उच्च मूल्य निवेश आकर्षित कर रहे हैं। उनके अनुसार टियर 2 शहर डेटा सेंटरों की मेजबानी भी करने लगे हैं, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि का दायरा बढ़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में FY24 में करीब 1,700 GCC हैं, जिनमें लगभग 1.9 मिलियन लोग कार्यरत हैं। FY19 के 40.4 अरब डॉलर से FY24 में इस क्षेत्र का संयुक्त राजस्व 60 प्रतिशत बढ़कर 64.6 अरब डॉलर हो जाता है, जबकि सरकार 2030 तक 2,400 केंद्रों, 2.8 मिलियन पेशेवरों और 105 अरब डॉलर के क्षेत्रीय आकार का अनुमान रखती है।

सीतारमण राज्य सरकारों की सक्रिय भूमिका को इस विस्तार का प्रमुख आधार बताती हैं। उनके अनुसार राज्य केवल नीतियां नहीं बना रहे, बल्कि निवेशकों से सीधे संपर्क कर GCC परियोजनाओं को आकर्षित करने की कोशिश भी कर रहे हैं।

वित्त मंत्री यह भी कहती हैं कि सरकार ने बॉन्ड बाजार निवेशकों के लिए अनुकूल withholding tax व्यवस्था बढ़ाई है, लेकिन यह कदम अंतिम नहीं है। उनके अनुसार Reserve Bank of India ने 30 सितंबर तक लागू दो उपाय शुरू किए हैं, जिनके तहत बैंक 3 से 5 वर्ष की FCNR(B) डॉलर जमा को सीधे RBI के साथ swap कर सकते हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को concessional forex swap window दी गई है ताकि वे External Commercial Borrowings के जरिये कम लागत पर विदेशी पूंजी जुटा सकें।

उन्होंने कहा कि विनिमय दर जोखिम RBI पर आने से उधार लेने वाली संस्थाओं के लिए हेजिंग का बड़ा अवरोध हटता है। इससे बैंक बाहरी बाजारों से पूंजी जुटाने में अधिक स्वतंत्रता पाते हैं, और सरकार आने वाले समय में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए और कदम उठाने की आवश्यकता को स्वीकार करती है।

रोजगार, डेटा सुरक्षा और कृषि पर असर

सीतारमण GCC और डेटा सेंटर विस्तार को आने वाले दशक के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक अवसरों में से एक बताती हैं। उनके अनुसार जब यह निवेश भारत में होता है, तो इससे डेटा सुरक्षा को लाभ मिलता है और रोजगार सृजन के माध्यम से अर्थव्यवस्था में नई गतिशीलता आती है।

कृषि मोर्चे पर उन्होंने उर्वरक आपूर्ति में अस्थिरता को लगातार बनी हुई चुनौती बताया। उनके अनुसार केंद्रीय बजट के बाद से बाजार कई बार तेज उतार-चढ़ाव से गुजरता है, हालांकि सरकार खरीफ मौसम की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त प्रावधान करती है और नवंबर से रबी सीजन की तैयारी भी शुरू कर रही है।

मई 2025 से मई 2026 के बीच वैश्विक यूरिया कीमतों में कथित तौर पर 141 प्रतिशत उछाल आता है। भारत अपनी घरेलू यूरिया जरूरत का लगभग 15 प्रतिशत, यानी करीब 5.6 मिलियन टन, आयात करता है और इसके लिए ओमान, सऊदी अरब, कतर तथा रूस जैसे साझेदारों पर निर्भर रहता है, जबकि पश्चिम एशिया में युद्ध DAP और phosphoric acid जैसे प्रमुख इनपुट की लागत बढ़ाता है।

पिछले वर्ष से बचे buffer food stock व्यापक खाद्य कमी के जोखिम को सीमित करते हैं, लेकिन सीतारमण मानती हैं कि किसानों के लिए यह मौसम कठिन रहने वाला है। El Nino के प्रभाव से असमान मानसून की आशंका के बीच कृषि आय पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI के उपायों पर चर्चा की गई थी, जिनमें सरकारी बॉन्ड पर एफपीआई के लिए टैक्स राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के कदम शामिल थे। लेख में रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो और FCNR(B) जमा पर हेजिंग लागत जैसी व्यवस्थाओं के जरिए भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग दबाव कम होने की संभावित भूमिका भी बताई गई थी।

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