भारत सरकार 28,000 करोड़ रुपये के दिनांकित प्रतिभूति पुनर्निर्गम की नीलामी करेगी
भारत सरकार 25 जून, 2026 को 28,000 करोड़ रुपये की दो दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों के पुनर्निर्गम की नीलामी आयोजित करेगी। इस पेशकश में 6.68% GS 2040 और 7.43% GS 2076 शामिल हैं, जबकि सरकार प्रत्येक प्रतिभूति पर 2,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त सदस्यता बनाए रखने का विकल्प भी रखती है।
हाइलाइट्स
- भारत सरकार 6.68% GS 2040 के लिए 17,000 करोड़ रुपये और 7.43% GS 2076 के लिए 11,000 करोड़ रुपये के पुनर्निर्गम की नीलामी 25 जून, 2026 को आयोजित करेगी।
- नीलामी बहु-मूल्य पद्धति से RBI के e-Kuber प्लेटफ़ॉर्म पर होगी, जहां जब-ज़ारी ट्रेडिंग 23 जून से 25 जून, 2026 तक संभव रहेगी।
- अधिसूचित निर्गम का 5% तक हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं को आवंटित होगा और रिटेल निवेशक Retail Direct पोर्टल के माध्यम से भाग ले सकते हैं।
नीलामी संरचना और समयसीमा
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बिक्री मुंबई स्थित रिजर्व बैंक के कार्यालय के माध्यम से बहु-मूल्य पद्धति से कराई जाएगी। 6.68% GS 2040 के लिए 17,000 करोड़ रुपये और 7.43% GS 2076 के लिए 11,000 करोड़ रुपये का अधिसूचित निर्गम रखा गया है, जबकि निपटान 29 जून, 2026 को होगा।
प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी, दोनों तरह की बोलियां 25 जून, 2026 को RBI के e-Kuber सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में जमा की जाएंगी। गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां सुबह 10:30 बजे से 11:00 बजे तक और प्रतिस्पर्धी बोलियां सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक स्वीकार होंगी, जबकि नतीजे उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी अंडरराइटिंग हिस्से के लिए प्राइमरी डीलर सुबह 9:00 बजे से 9:30 बजे तक बोलियां जमा कर सकेंगे। इन प्रतिभूतियों में 23 जून, 2026 से 25 जून, 2026 तक "When Issued" ट्रेडिंग की भी अनुमति रहेगी।
बाजार भागीदारी और ऋण प्रबंधन पर असर
यह निर्गम केंद्र सरकार के बाजार उधारी कार्यक्रम के तहत दीर्घावधि फंडिंग जुटाने का हिस्सा है और इससे निवेशकों को 2040 तथा 2076 परिपक्वता वाले कागजों में भागीदारी का अवसर मिलता है। पुनर्निर्गम प्रारूप आम तौर पर मौजूदा बॉन्ड लाइनों में तरलता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे द्वितीयक बाजार में कारोबार सुगम हो सकता है।RBI के परिचालन दिशानिर्देशों के तहत प्रत्येक प्रतिभूति के अधिसूचित निर्गम का 5% तक हिस्सा पात्र व्यक्तियों और संस्थानों के लिए गैर-प्रतिस्पर्धी बोली सुविधा में आवंटित किया जा सकता है। खुदरा निवेशक Retail Direct पोर्टल के माध्यम से भी बोलियां लगा सकते हैं, जबकि सफल प्रतिभूतियां SGL या CSGL खातों में जमा की जाएंगी और वे प्रचलित नियमों के अनुसार रेपो तथा गैर-निवासी निवेश के लिए भी पात्र रहेंगी।
हमारी पहले की रिपोर्ट में U.S.-ईरान समझौते की संभावनाओं से तेल और उर्वरक कीमतों में आई नरमी और इसके भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक असर पर चर्चा की गई थी। इसमें RBI के डॉलर प्रवाह आसान करने वाले कदमों, मानसून जैसे जोखिमों के बीच कृषि क्षेत्र की स्थिति, और AI/जनसांख्यिकी से जुड़े मध्यम अवधि के दबावों के बावजूद नीतिगत तैयारी व लचीलेपन के संकेतों को भी रेखांकित किया गया था।
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