भारत में ईंधन महंगाई के बीच राहुल गांधी ने आर्थिक संकट की आशंका जताई

भारत में ईंधन महंगाई के बीच राहुल गांधी ने आर्थिक संकट की आशंका जताई
आर्थिक संकट की चेतावनी

पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता बढ़ने के बीच भारत में महंगाई और बाहरी दबाव को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो रहा है। रायबरेली दौरे पर राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि मौजूदा आर्थिक ढांचा बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा बोझ आम लोगों पर पड़ेगा।

हाइलाइट्स

  • राहुल गांधी ने 19 मई को केंद्र की आर्थिक नीतियों को आड़े हाथ लेते हुए देश को 'आर्थिक तूफान' की ओर बढ़ता बताया और सामाजिक वर्गों के लिए जोखिम की आशंका जताई।
  • दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये और डीजल 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई, जिससे लागत और महंगाई बढ़ने की संभावनाएं हैं।
  • CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और बढ़ती आयात निर्भरता से भारत का तेल व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2027 में तेज़ी से बढ़ सकता है।

आर्थिक चेतावनी और राजनीतिक आरोप

Financial Express के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार, 19 मई को केंद्र की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश एक "आर्थिक तूफान" की ओर बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में बना मौजूदा आर्थिक ढांचा कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के पक्ष में झुका हुआ है, जबकि किसान, मजदूर, युवा और छोटे कारोबारी अधिक जोखिम में हैं।

रायबरेली में मीडिया से बात करते हुए गांधी ने कहा कि यह संरचना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है और जब इसमें गिरावट आएगी तब सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को होगा। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के युवाओं, किसानों, श्रमिकों और छोटे व्यवसाय मालिकों पर सबसे बड़े असर की आशंका जताते हुए कहा कि आगे बहुत कठिन समय है।

गांधी ने प्रधानमंत्री की उस अपील की भी आलोचना की जिसमें लोगों से वैश्विक अनिश्चितता के बीच अनावश्यक विदेशी यात्रा और खर्च कम करने को कहा गया है। उनका कहना है कि सरकार गहरी संरचनात्मक आर्थिक समस्याओं का समाधान करने के बजाय समायोजन का बोझ नागरिकों पर डाल रही है।

ईंधन कीमतों, आयात दबाव और महंगाई का असर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पेट्रोल और डीजल की हालिया कीमत बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज किया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को "सरकार द्वारा पैदा किया गया संकट" बताते हुए आरोप लगाया कि नीतिगत विफलताओं की कीमत आम लोगों से वसूली जा रही है, जबकि बड़े कारोबारी हित सुरक्षित रखे जा रहे हैं।

दिल्ली में ताजा संशोधन के बाद पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। बढ़ती ईंधन लागत से परिवहन, खाद्य कीमतों, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी और घरेलू बजट पर व्यापक असर की आशंका बढ़ रही है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अगर वैश्विक तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो बाहरी क्षेत्र पर दबाव और बढ़ सकता है। CRISIL की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंचे कच्चे तेल दाम, कमजोर पेट्रोलियम निर्यात और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता के कारण वित्त वर्ष 2027 में भारत का तेल व्यापार घाटा तेज़ी से बढ़ सकता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर और CNG के दाम 2 रुपये बढ़ने के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद और महंगाई पर संभावित असर को रेखांकित किया गया था। उसमें विपक्ष के इस आरोप का उल्लेख था कि ईंधन महंगाई से उपभोक्ता खर्च और वृद्धि अनुमान पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल रुझानों से जुड़ा कदम बताया था।

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