भारत में ईंधन कीमतें बढ़ने पर विपक्ष ने केंद्र पर महंगाई का दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया
विधानसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ने से केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव तेज हो गया है। इस बढ़ोतरी के साथ CNG के दाम भी 2 रुपये बढ़ते हैं, जिससे महंगाई, उपभोक्ता खर्च और आर्थिक वृद्धि पर असर को लेकर विपक्ष हमलावर है।
हाइलाइट्स
- केंद्र सरकार ने चुनाव समाप्त होते ही पेट्रोल और डीजल में 3-3 रुपये तथा CNG में 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की घोषणा की।
- विपक्ष का आरोप है कि बढ़ी कीमतें महंगाई को 6 प्रतिशत के करीब ले जा सकती हैं और उपभोक्ताओं एवं आर्थिक वृद्धि अनुमान पर दबाव डालेंगी।
- सरकार का कहना है कि आपूर्ति स्थिर है, किंतु अंतरराष्ट्रीय मूल्य रुझानों के कारण वृद्धि हुई है, जिससे परिवहन लागत व उपभोक्ता मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
कीमत बढ़ोतरी पर राजनीतिक टकराव
FinancialExpress.com के अनुसार, कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि चुनाव समाप्त होते ही आम लोगों पर ईंधन महंगाई का बोझ डाल दिया गया है। पार्टी ने पेट्रोल और डीजल में 3-3 रुपये प्रति लीटर तथा CNG में 2 रुपये की बढ़ोतरी को जनता से “वसूली” करार दिया।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव पूरे होने तक अलोकप्रिय फैसलों को टाला और अब उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत डाल रही है। पार्टी ने इस कदम को बढ़ती महंगाई और घरेलू बजट पर नए दबाव के रूप में पेश किया है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में होती है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर पहले से दबाव है। उनका तर्क है कि जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें पहले नरम थीं तब उसका लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया गया, जबकि अब बढ़ती कीमतों का असर सीधे जनता पर डाला जा रहा है।
रमेश ने यह भी कहा कि पेट्रोल, डीजल और वाणिज्यिक LPG की कीमतों में वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में महंगाई 6 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है और वृद्धि अनुमान घट सकते हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी केंद्र की आलोचना करते हैं और इस फैसले को कमजोर संकट प्रबंधन तथा बढ़ती जन-पीड़ा से जोड़ते हैं।
महंगाई, आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर असर
केंद्र सरकार का पक्ष यह है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है और यह संशोधन घरेलू कमी के कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुझानों के अनुरूप है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी CII Annual Business Summit 2026 में कहते हैं कि भारत ने आपूर्ति झटकों के बावजूद पेट्रोल, डीजल और LPG की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है।सरकार यह भी कहती है कि 2022 से ईंधन कीमतें व्यापक रूप से स्थिर रही हैं, जो नीतिगत समन्वय का परिणाम है। इसके बावजूद एक साथ पेट्रोल, डीजल और CNG महंगे होने से परिवहन लागत, खुदरा कीमतों और उपभोक्ता मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
राजनीतिक रूप से विपक्ष बढ़ोतरी के समय को प्रमुख मुद्दा बना रहा है, क्योंकि यह फैसला चुनावों के बाद आता है और पहले से मौजूद महंगाई चिंताओं के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालता है। इससे ईंधन मूल्य निर्धारण, वैश्विक ऊर्जा जोखिम और घरेलू क्रयशक्ति पर बहस और तेज होने की संभावना है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच अप्रैल 2024 में भारत की थोक महंगाई (WPI) के 42 महीनों के उच्च स्तर 8.3% पर पहुंचने और इसमें ईंधन व बिजली खंड की तेज बढ़त की भूमिका पर चर्चा की गई थी। इसमें यह भी बताया गया था कि ऊंची थोक लागत समय के साथ उपभोक्ता महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है और यदि तेल कीमतें ऊंचे दायरे में बनी रहीं तो खुदरा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ जाता है।
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