RBI ने कॉल, नोटिस और टर्म मनी बाजार दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया
भारतीय वित्तीय बाजारों में अल्पकालिक फंडिंग ढांचे को गहरा करने की दिशा में Reserve Bank of India ने कॉल, नोटिस और टर्म मनी बाजारों के लिए 2026 के मसौदा मास्टर डायरेक्शन जारी किए हैं। यह मसौदा भागीदारी और तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से standalone primary dealers की उधारी सीमा बढ़ाने और प्रतिभागियों का दायरा विस्तारित करने पर केंद्रित है।
हाइलाइट्स
- Reserve Bank of India ने 8 अप्रैल 2026 की नीति के अनुपालन में Call, Notice और Term Money Market पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए।
- बैंक, बाजार सहभागियों और अन्य इच्छुक पक्षों से 17 जुलाई 2026 तक मसौदा दिशानिर्देशों पर टिप्पणियां मांगी गई हैं।
- मसौदा का उद्देश्य Term Money Market में भागीदारी की गहराई, तरलता, standalone primary dealers की उधारी सीमा और प्रतिभागी आधार बढ़ाना है।
मसौदा दिशानिर्देश और परामर्श समयसीमा
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मसौदा 8 अप्रैल 2026 की विकासात्मक और नियामकीय नीतियों पर जारी वक्तव्य के अनुपालन में जारी किया गया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों, बाजार सहभागियों और अन्य इच्छुक पक्षों से 17 जुलाई 2026 तक टिप्पणियां मांगी हैं।
प्रतिक्रिया Chief General Manager, Financial Markets Regulation Department, Reserve Bank of India, Central Office Building, शाहिद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई 400001 को भेजी जा सकती है। सुझाव ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं, जिसमें विषय पंक्ति में “Feedback on draft Master Direction – Reserve Bank of India (Call, Notice and Term Money Markets) Directions, 2026” लिखना होगा।
मनी मार्केट गहराई पर संभावित प्रभाव
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सक्रिय टर्म मनी मार्केट बाजार सहभागियों को वैकल्पिक फंडिंग का माध्यम देने के साथ-साथ मौद्रिक नीति के प्रसारण को भी मजबूत करता है। यह ओवरनाइट मनी मार्केट और लंबी अवधि की ब्याज दरों के बीच कड़ी बनाने में मदद करता है।मसौदा दिशानिर्देशों का उद्देश्य टर्म मनी मार्केट खंड में भागीदारी की गहराई और तरलता को और बढ़ाना है। standalone primary dealers के लिए उधारी सीमा बढ़ाने और प्रतिभागी आधार का विस्तार करने से इस खंड में लेनदेन गतिविधि और फंडिंग विकल्पों के व्यापक होने की संभावना है।
हमारी पहले की रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन के पीछे पूंजी की ऊंची लागत और बढ़ती ब्याज दरों के संदर्भ में निवेशकों की अपेक्षित रिटर्न पर दबाव की चर्चा की गई थी। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि घरेलू पूंजी के सीमित विकल्प और विदेशी पूंजी की वैश्विक गतिशीलता बाजार के मूल्यांकन तथा फंडिंग स्थितियों को प्रभावित करती है।
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