भारतीय रिजर्व बैंक 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी 1 जुलाई को करेगा

भारतीय रिजर्व बैंक 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी 1 जुलाई को करेगा
RBI ट्रेजरी नीलामी जुलाई

भारत सरकार के अल्पकालिक उधारी कार्यक्रम के तहत 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों की नई नीलामी 1 जुलाई 2026 को आयोजित हो रही है। इस पेशकश के तहत कुल 24,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने हैं और सफल बोलीदाताओं के लिए निपटान 2 जुलाई 2026 को तय है।

हाइलाइट्स

  • भारतीय रिजर्व बैंक 1 जुलाई 2026 को 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी बहु-मूल्य पद्धति से आयोजित करेगा।
  • नीलामी में 91-दिवसीय टी-बिल के लिए 9,000 करोड़ रुपये, 182-दिवसीय के लिए 8,000 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय के लिए 7,000 करोड़ रुपये की राशि अधिसूचित है।
  • खुदरा निवेशकों के लिए गैर-प्रतिस्पर्धी आवंटन अधिसूचित राशि के 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा, जबकि संस्थागत निवेशकों को साधारणत: पूर्ण आवंटन मिलेगा।

नीलामी का आकार और प्रक्रिया

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 9,000 करोड़ रुपये, 182-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 8,000 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 7,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि तय की गई है। यह नीलामी बहु-मूल्य पद्धति के तहत मूल्य-आधारित होगी और इसके परिणाम नीलामी वाले दिन ही घोषित किए जाएंगे।

नीलामी 1 जुलाई 2026, बुधवार को होगी, जबकि सफल बोलीदाताओं को भुगतान 2 जुलाई 2026, गुरुवार को करना होगा। बिक्री भारत सरकार की 26 मार्च 2025 की सामान्य अधिसूचना F.No.4(2)-B(W&M)/2018 तथा समय-समय पर किए गए संशोधनों की शर्तों के अधीन रहेगी।

प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां भारतीय रिजर्व बैंक की Core Banking Solution, E-Kuber प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में जमा की जानी हैं। प्रतिस्पर्धी बोलियों का समय सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक और गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों का समय सुबह 10:30 बजे से 11:00 बजे तक निर्धारित है।

खुदरा और संस्थागत भागीदारी पर असर

राज्य सरकारें, विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश, भारत के पात्र भविष्य निधि कोष, नामित विदेशी केंद्रीय बैंक और बैंक द्वारा निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति या संस्थान गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग ले सकते हैं। इस श्रेणी के लिए आवंटन अधिसूचित राशि से बाहर रहेगा।

व्यक्तिगत निवेशक भी खुदरा निवेशकों के रूप में गैर-प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग ले सकते हैं, हालांकि उनके लिए आवंटन अधिसूचित राशि के अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। व्यक्तिगत निवेशक Retail Direct पोर्टल के माध्यम से भी बोली लगा सकते हैं, जिससे सरकारी प्रतिभूतियों के प्राथमिक बाजार तक खुदरा पहुंच बनी रहती है।

प्रणाली विफल होने की स्थिति में ही भौतिक बोलियां स्वीकार की जाएंगी और उन्हें निर्धारित प्रपत्र में नीलामी समय समाप्त होने से पहले Public Debt Office में जमा करना होगा। तकनीकी कठिनाइयों के लिए Core Banking Operations Team और नीलामी संबंधी अन्य कठिनाइयों के लिए IDMD नीलामी टीम से संपर्क की व्यवस्था भी दी गई है।

हमारी पहले की रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन के पीछे पूंजी की ऊंची लागत की भूमिका पर चर्चा की गई थी, जहां 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की करीब 7% जोखिम-मुक्त दर और अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम मिलकर इक्विटी के लिए अपेक्षित रिटर्न की बाधा बढ़ाते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि घरेलू निवेश विकल्प सीमित होने और वैश्विक पूंजी प्रवाह के कारण कीमतों व वास्तविक आय क्षमता के बीच अंतर बढ़ता है, जिससे विदेशी निवेशकों को ऊंचे वैल्यूएशन का लाभ मिल सकता है।

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