रूस-भारत रणनीतिक साझेदारी पर पुतिन का भरोसा, द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब U.S. डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

रूस-भारत रणनीतिक साझेदारी पर पुतिन का भरोसा, द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब U.S. डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
रूस-भारत व्यापार साझेदारी

सेंट पीटर्सबर्ग आर्थिक मंच में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत को विश्वसनीय भागीदार बताते हुए मॉस्को-नई दिल्ली संबंधों के दीर्घकालिक विस्तार पर भरोसा जताते हैं। वह यह भी कहते हैं कि भारत के U.S. सहित अन्य देशों के साथ बढ़ते रिश्तों से रूस-भारत सहयोग पर कोई गंभीर नकारात्मक असर नहीं दिखता।

हाइलाइट्स

  • पुतिन ने कहा कि रूस-भारत द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा लगभग 58–60 अरब U.S. डॉलर से बढ़कर अगले वर्षों में 100 अरब U.S. डॉलर तक पहुंच सकता है।
  • रूस ने घोषणा की कि वह भारत के साथ Su-57 लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली जैसी उन्नत सैन्य परियोजनाओं पर बिना किसी आपूर्ति या विकास बाधा के सहयोग को तैयार है।
  • पुतिन ने बताया कि तमिलनाडु स्थित Kudankulam Nuclear Power Plant का निर्माण जारी है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए मंच उभर रहे हैं।

व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग का दायरा

Financial Express के अनुसार, पुतिन मंच में कहते हैं कि रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार आने वाले वर्षों में 100 अरब U.S. डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मौजूदा स्तर लगभग 58 अरब से 60 अरब U.S. डॉलर के बीच है। उनके अनुसार दोनों देशों के पास ऊर्जा, निवेश और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की मजबूत नींव मौजूद है।

पुतिन यह भी कहते हैं कि रूस उन्नत सैन्य परियोजनाओं पर भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है, जिनमें Su-57 लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणालियां शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन परियोजनाओं पर आपूर्ति और आगे के विकास को लेकर रूस के सामने कोई बाधा या सीमा नहीं है।

ऊर्जा सहयोग के मोर्चे पर वह परमाणु ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों का विशेष उल्लेख करते हैं। पुतिन के अनुसार, तमिलनाडु में Kudankulam Nuclear Power Plant का निर्माण जारी है और आगे भी नए मंचों पर सहयोग उभरता है।

भारत-U.S. निकटता के बीच रूस का रुख

पुतिन कहते हैं कि भारत पर बाहरी दबाव, खासकर रूस के साथ कुछ क्षेत्रों में सहयोग को लेकर, संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाता। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंधों के लिए प्रतिकूल है, लेकिन अभी तक इसके कोई गंभीर दुष्परिणाम नजर नहीं आते।

रूसी राष्ट्रपति भारत और रूस के संबंधों को दशकों से विकसित एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी बताते हैं। वह 1947 में सोवियत संघ और भारत के बीच स्थापित राजनयिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि यह रिश्ता हाल के वर्षों का नहीं, बल्कि लंबे समय से निर्मित ढांचा है।

पुतिन भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में एक बताते हैं और उसकी तेज आर्थिक वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकारी प्रयासों तथा भारतीय जनता की मेहनत को देते हैं। वह यह भी कहते हैं कि रूस भारत के अन्य देशों के साथ संबंध बढ़ाने का स्वागत करता है और भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार साझेदारियां विकसित करने का पूरा अधिकार है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की सरकारी रणनीति और इसे गति देने वाले नए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लॉन्च पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि E20 लक्ष्य, उत्पादन क्षमता के विस्तार और संभावित रूप से किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ कच्चे तेल के आयात व उत्सर्जन दबाव घटाने में यह पहल कैसे मदद कर सकती है।

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