पश्चिम बंगाल में चुनाव-तैयारी समीक्षा बैठक के बाद सीईसी पर तृणमूल ने धमकी का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल में अप्रैल में अपेक्षित विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची प्रक्रिया पर सियासी खींचतान तेज हो गई है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कोलकाता में अपनी धरना-स्थल से कहा कि चुनाव आयोग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य अधिकारियों से कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में बात की, जिसे उन्होंने अस्वीकार्य बताया।
हाइलाइट्स
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग समीक्षा बैठक में सीईसी पर अधिकारियों के प्रति धमकी भरे व्यवहार और अस्वीकार्य भाषा का आरोप लगाया।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानून-व्यवस्था में चूक पर कड़ी कार्रवाई, नार्कोटिक्स एडवाइजरी कमेटी की कमी और चुनावी निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए।
- ममता बनर्जी ने एसआईआर के तहत मतदाता सूची संशोधन को नागरिकों के मतदान अधिकार छीनने का प्रयास बताया और सभी को वोट देने की गारंटी की मांग की।
चुनाव आयोग की बैठक और आरोपों का घटनाक्रम
बैठक में चुनाव आयोग की पूरी पीठ ने राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि समीक्षा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने अधिकारियों से कठोर और धमकी भरे अंदाज में बात की, जैसा कि Financial Express ने रिपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। बनर्जी के मुताबिक, उन्होंने सीईसी को यह संदेश दिया कि साहस अच्छा है, लेकिन दिखावटी बहादुरी ठीक नहीं।बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानून-व्यवस्था में किसी भी चूक को बर्दाश्त न किए जाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि जिम्मेदारियां ठीक से न निभाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसी संदर्भ में, सीईसी ने राज्य में नार्कोटिक्स एडवाइजरी कमेटी के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने चुनाव से पहले निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए।
एसआईआर मतदाता सूची संशोधन पर तृणमूल की आपत्ति
मुख्यमंत्री ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों के संशोधन की प्रक्रिया की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि इस अभ्यास का दुरुपयोग कर नागरिकों से उनके मतदान अधिकार छीने जा सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य आग्रह यह है कि सभी को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार, मतदान अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना ही उनका प्रमुख उद्देश्य है।बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने और कथित तौर पर डराने-धमकाने की रणनीतियों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोगों पर हमले, डराने और मतदाता सूची से नाम हटाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब चुनावी गतिविधि बढ़ रही है और प्रशासनिक तैयारी के साथ-साथ चुनावी प्रक्रियाएं भी कड़ी निगरानी में हैं। इस पृष्ठभूमि में एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
हमने पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे और आर एन रवि को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के घटनाक्रम पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया था कि इस फैसले की टाइमिंग और प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक निरंतरता, केंद्र-राज्य संबंधों और संवैधानिक परंपराओं पर बहस को तेज कर सकती है।
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