भारत का फरवरी में व्यापार घाटा घटा, पश्चिम एशिया संघर्ष से मार्च में जोखिम बढ़ा

भारत का फरवरी में व्यापार घाटा घटा, पश्चिम एशिया संघर्ष से मार्च में जोखिम बढ़ा
व्यापार घाटा घटा, जोखिम कायम

सरकार के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा घटकर 27.1 अरब डॉलर रह जाता है, लेकिन अर्थशास्त्री चेतावनी देते हैं कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के तेज होने और 100 डॉलर से ऊपर कच्चे तेल की कीमतों के असर से मार्च के आंकड़ों में दबाव बढ़ सकता है। फरवरी के आंकड़े संघर्ष के पूर्ण पैमाने पर बढ़ने से पहले के हैं, इसलिए मौजूदा सुधार को अस्थायी माना जा रहा है।

हाइलाइट्स

  • फरवरी 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा घटकर $27.1 अरब रहा, लेकिन आयात सालाना 24 प्रतिशत बढ़कर $63.7 अरब पहुंचा।
  • फरवरी में सेवाओं का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर $39.5 अरब हुआ, जबकि इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात में क्रमशः 10.4 और 4.2 प्रतिशत वृद्धि रही।
  • अप्रैल 2025-फरवरी 2026 के दौरान व्यापार घाटा $311 अरब पहुंचा, मार्च में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर और समुद्री व्यवधानों से खतरा बढ़ा।

फरवरी के आंकड़ों में घाटा घटा, आयात दबाव बना रहा

Forbes India के अनुसार, फरवरी 2026 में वस्तु व्यापार घाटा जनवरी के 34.7 अरब डॉलर से घटकर 27.1 अरब डॉलर पर आता है। इसी महीने निर्यात 0.8 प्रतिशत घटकर 36.6 अरब डॉलर होता है, जबकि आयात सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़कर 63.7 अरब डॉलर पहुंचता है। घाटा फरवरी 2025 के 14.4 अरब डॉलर की तुलना में अब भी काफी अधिक बना रहता है। अर्थशास्त्री कहते हैं कि ये आंकड़े पश्चिम एशिया संघर्ष के बड़े पैमाने पर बढ़ने से पहले के हैं, इसलिए आगे तस्वीर बदल सकती है।

सेवाओं की उछाल से संतुलन को सहारा

फरवरी में सेवाओं का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 39.5 अरब डॉलर हो जाता है, जो फरवरी 2025 के 31.7 अरब डॉलर से अधिक है। सेवाओं का आयात भी 14.5 अरब डॉलर से बढ़कर 16.4 अरब डॉलर होता है, लेकिन शुद्ध सेवा अधिशेष समग्र व्यापार संतुलन के लिए बफर का काम करता है। वस्तु पक्ष पर गैर पेट्रोलियम निर्यात 6.4 प्रतिशत बढ़कर 33.2 अरब डॉलर होता है, जबकि इंजीनियरिंग सामान 10.4 अरब डॉलर और इलेक्ट्रॉनिक सामान 4.2 अरब डॉलर तक बढ़ते हैं। रत्न और आभूषण निर्यात 2.6 अरब डॉलर पर लगभग सपाट रहता है, जबकि गैर पेट्रोलियम आयात 29 प्रतिशत उछलकर 50.7 अरब डॉलर और पेट्रोलियम, कच्चा व उत्पाद आयात 13 अरब डॉलर तक बढ़ता है।

11 महीने का घाटा ऊंचा, मार्च पर बाजार की नजर

वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में व्यापार घाटा 311 अरब डॉलर पर रहता है, जो पिछले साल की समान अवधि के 262 अरब डॉलर से अधिक है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच कुल आयात 8.3 प्रतिशत बढ़कर 714 अरब डॉलर हो जाता है, जिसमें सोने का आयात 28.7 प्रतिशत बढ़ता है और चांदी का आयात 143 प्रतिशत उछलता है; इलेक्ट्रॉनिक्स आयात भी 17.6 प्रतिशत बढ़ता है। इसी अवधि में कुल वस्तु निर्यात 1.8 प्रतिशत बढ़कर 403 अरब डॉलर होता है और बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार इसे इलेक्ट्रॉनिक्स में 28.1 प्रतिशत वृद्धि का सहारा मिलता है। सबनवीस कहते हैं कि पश्चिम एशिया युद्ध का बड़ा असर मार्च में दिखता है, क्योंकि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है और समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान अनिश्चितता बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 100 डॉलर से ऊपर तेल और लॉजिस्टिक बाधाओं के साथ आने वाले आंकड़े रुपये की परीक्षा लेते हैं, हालांकि सबनवीस के मुताबिक रेमिटेंस और एफपीआई जैसी ताकतें भी दिशा तय करने में अहम रह सकती हैं।

हमने पहले ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तथा गैस अवसंरचना विस्तार पर सरकार के जोर की रिपोर्ट की थी। उस रिपोर्ट में आपूर्ति शृंखला बाधाओं, एलपीजी कनेक्शन और एलएनजी टर्मिनलों के विस्तार के साथ-साथ युद्ध-जनित वैश्विक दबावों के बीच आयात निर्भरता घटाने की रणनीति पर भी चर्चा थी।

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