Goldman Sachs ने भारत के चालू खाते के घाटे के अनुमान में कटौती की
भारत के बाह्य क्षेत्र की अपेक्षा से अधिक मजबूती के बीच Goldman Sachs ने 2026 के लिए देश के चालू खाते के घाटे का अनुमान घटाकर जीडीपी के 1.3 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने FY27 के लिए भी अपना अनुमान 0.4 प्रतिशत अंक घटाकर 1.7 प्रतिशत किया है, जिसका आधार कम तेल और सोना आयात, रिकॉर्ड प्रेषण और नीति समर्थन से बढ़ी पूंजी आमद है।
हाइलाइट्स
- Goldman Sachs ने चालू खाते के घाटे के अनुमान में कटौती करते हुए 2026 तक RBI की विदेशी प्रवाह आकृष्ट करने वाली पहलों से $60 अरब Dollar की नई आमद का अनुमान जताया।
- पिछले दो वर्षों में भारत से विदेशी पोर्टफोलियो इक्विटी में लगभग $20 अरब Dollar का शुद्ध बहिर्वाह हुआ है, जबकि 2026 में अकेले $29 अरब Dollar निकल गए।
- Goldman Sachs के अनुसार उच्च वैल्यूएशन, कमजोर कॉर्पोरेट आय और रुपये की कमजोरी के चलते 2026 में $25 अरब Dollar का शुद्ध विदेशी इक्विटी बहिर्वाह रह सकता है।
पूंजी प्रवाह और बाजार पर असर
Forbes India के अनुसार, पूंजी खाते की तरफ Reserve Bank of India ने विदेशी प्रवाह आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें अर्ध-सरकारी उधारकर्ताओं और बैंकों के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप दरें, तीन से पांच वर्ष में परिपक्व होने वाली नई विदेशी मुद्रा जमाओं के लिए पूर्ण हेजिंग समर्थन, और सरकारी प्रतिभूतियों पर ब्याज तथा पूंजीगत लाभ पर विदेशी निवेशकों के लिए कर छूट शामिल हैं। RBI ने अपने Fully Accessible Route के तहत लंबी अवधि के बॉन्ड तक पहुंच भी बढ़ाई है। Goldman Sachs का अनुमान है कि इन पहलों से 2026 में लगभग 60 अरब डॉलर की नई आमद हो सकती है।इसके बावजूद विदेशी पोर्टफोलियो इक्विटी प्रवाह कमजोर बना हुआ है। रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो वर्षों में लगभग 20 अरब डॉलर का शुद्ध बहिर्वाह रहा है, जबकि केवल 2026 में ही 29 अरब डॉलर निकाले गए हैं। फरवरी में भारत-U.S. व्यापार समझौते की घोषणा के बाद थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन पश्चिम एशिया के युद्ध ने जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति फिर बढ़ा दी और यह सुधार टिक नहीं सका।
Goldman Sachs के अनुसार लगातार बिकवाली के पीछे तीन संरचनात्मक वजहें हैं, भारत के शेयर मूल्यांकन समकक्ष देशों की तुलना में महंगे हैं, कॉर्पोरेट आय की रफ्तार कमजोर पड़ी है, और रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित प्रतिफल को घटाया है। बैंक का आकलन है कि 2026 में विदेशी इक्विटी प्रवाह दबा हुआ ही रहता है और 25 अरब डॉलर का शुद्ध बहिर्वाह हो सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकार और RBI द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा की गई थी, जिनमें सरकारी बॉन्ड पर FPI के लिए कर छूट, Fully Accessible Route का विस्तार और FCNR(B) जमा/फॉरेक्स स्वैप जैसी विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने की पहलें शामिल थीं। लेख में यह भी बताया गया था कि इन उपायों से भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निकासी और रुपये की कमजोरी जैसी संरचनात्मक चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
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