सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, 15-29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर फरवरी में बढ़कर 14.8% हो जाती है, जो चार महीने का उच्च स्तर है और यह संकेत देती है कि युवाओं के लिए नौकरी के अवसर अपेक्षाकृत कमजोर रहते हैं।
हाइलाइट्स
- फरवरी में 15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 14.8% रही, जिसमें ग्रामीण युवाओं के लिए यह 13.1% और शहरी युवाओं के लिए 18.3% रही।
- समग्र बेरोजगारी दर (15+ आयु वर्ग) फरवरी में 4.9% पर रही, जिसमें शहरी बेरोजगारी 6.6% और ग्रामीण बेरोजगारी 4.2% पर स्थिर रही।
- Labour Force Participation Rate फरवरी में 55.9% और Worker Population Ratio 53.2% रही, जबकि महिला श्रम भागीदारी और शहरी रोजगार में वृद्धि देखी गई।
PLFS के ताजा आंकड़े और रुझान
Financial Express के अनुसार, 15-29 वर्ष के आयु समूह में ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी फरवरी में 13.1% तक पहुंचती है, जो इस खंड के लिए चार महीने का उच्च स्तर है। शहरी क्षेत्रों में इसी आयु वर्ग की बेरोजगारी जनवरी के 18.6% से घटकर फरवरी में 18.3% पर आती है। युवा महिलाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 14.6% तक पहुंचती है, जो मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 15-29 आयु वर्ग में कुल महिला बेरोजगारी फरवरी में 17.6% रहती है, जबकि पुरुष बेरोजगारी 13.6% से मामूली बढ़कर 13.7% हो जाती है।
समग्र बेरोजगारी, ग्रामीण बनाम शहरी संकेतक
Current Weekly Status (CWS) पद्धति के आधार पर 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए समग्र बेरोजगारी दर फरवरी में 4.9% पर आती है, जो जनवरी के 5% के बाद मामूली नरमी को दिखाती है। 15+ आयु समूह में शहरी बेरोजगारी जनवरी के 7% से घटकर फरवरी में 6.6% होती है, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी 4.2% पर स्थिर रहती है। शहरी महिलाओं (15+) में बेरोजगारी फरवरी में 8.7% तक घटती है, जो सात महीने का निचला स्तर है। कुल महिला बेरोजगारी (15+) 5.6% से घटकर 5.1% होती है, जबकि पुरुष बेरोजगारी 4.8% पर स्थिर बनी रहती है।रोजगार भागीदारी, WPR और विशेषज्ञ का आकलन
O.P. Jindal Global University के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल सिंह के अनुसार, युवा बेरोजगारी अपेक्षाकृत ऊंची बनी रहती है क्योंकि रोजगार सृजन, शिक्षित युवा प्रवेशकों की बढ़ती संख्या के साथ कदम नहीं मिला पाता। उन्होंने कहा कि 15+ आयु वर्ग में बेरोजगारी में दिख रही मामूली गिरावट मुख्यतः शहरी सेवाओं में बेहतर भर्ती, निर्माण तथा अनौपचारिक गतिविधियों में कुछ तेजी, और महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि से संचालित दिखाई देती है। मंत्रालय के मुताबिक CWS अनुमान सात दिनों की संदर्भ अवधि का औसत चित्र देते हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को बेरोजगार माना जाता है यदि उसने संदर्भ सप्ताह में किसी भी दिन एक घंटे भी काम नहीं किया, लेकिन कम से कम एक घंटे के लिए काम खोजा या उपलब्ध रहा। Labour Force Participation Rate (LFPR) फरवरी में 55.9% पर स्थिर रहती है, ग्रामीण LFPR 58.7% पर अपरिवर्तित रहती है और शहरी LFPR 50.3% से हल्का बढ़कर 50.4% हो जाती है। Worker Population Ratio (WPR) फरवरी में 53.1% से बढ़कर 53.2% होती है, जबकि मासिक अखिल भारतीय अनुमान करीब 3.74 लाख व्यक्तियों के सर्वे पर आधारित रहते हैं।हमने पहले फरवरी 2026 के भारत के वस्तु व्यापार घाटे के ताजा आंकड़ों पर रिपोर्ट की थी, जिसमें घाटा घटकर 27.1 अरब डॉलर रहने के बावजूद आयात दबाव और पश्चिम एशिया में संघर्ष के तेज होने से आगे के महीनों में जोखिम बढ़ने की बात सामने आई थी। उस रिपोर्ट में सेवाओं के निर्यात में उछाल से समग्र संतुलन को सहारा मिलने और कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने व समुद्री व्यवधानों के कारण मार्च के आंकड़ों पर संभावित दबाव का भी जिक्र था।
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