तेलंगाना 2026-27 बजट में सार्वभौमिक कल्याण पर दांव

तेलंगाना 2026-27 बजट में सार्वभौमिक कल्याण पर दांव
तेलंगाना बजट में कल्याण फोकस

तेलंगाना सरकार ने शुक्रवार को 2026-27 के लिए 3.24 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, पोषण और कर्मचारी स्वास्थ्य कवर पर बड़ा जोर है। यह घोषणा ऐसे समय में आती है जब दक्षिणी राज्यों में चुनावी हलचल बढ़ रही है और कल्याण मॉडल की राजनीतिक तथा वित्तीय व्यवहार्यता पर नजर रखी जा रही है। बजट का केंद्र परिवारों, छात्रों, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए सीधे लाभ बढ़ाने पर है, जबकि राज्य अपनी वृद्धि दर को इस खर्च का आधार बता रहा है।

हाइलाइट्स

  • तेलंगाना बजट 2026-27 में 2 जून से 1.15 करोड़ परिवारों को सार्वभौमिक 5 लाख रुपये जीवन बीमा कवर देने की घोषणा हुई।
  • मिड-डे मील योजना के विस्तार से प्री-प्राइमरी से इंटरमीडिएट तक के छात्रों को नाश्ता, जिसमें तीन दिन दूध और अन्य दिन रागी माल्ट मिलेगा।
  • 23.51 लाख कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए एम्प्लॉइज हेल्थ स्कीम के तहत 2,000 बीमारियों पर कैशलेस इलाज और दुर्घटनाओं में मृत्यु पर 2 करोड़ रुपये मुआवजा मिलेगा।

बीमा, पोषण और स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार

इंदिरम्मा फैमिली लाइफ इंश्योरेंस स्कीम इस बजट की सबसे प्रमुख घोषणा है। 2 जून से राज्य के 1.15 करोड़ परिवार 5 लाख रुपये के जीवन बीमा के लिए पात्र होंगे। योजना की खास बात यह है कि इसे सार्वभौमिक आधार पर लागू किया जा रहा है, यानी सामाजिक या आर्थिक वर्ग के आधार पर पात्रता सीमित नहीं है। सरकार का उद्देश्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु की स्थिति में परिवारों को वित्तीय झटके से बचाना है। मिड-डे मील योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है और अब प्री-प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के छात्रों को नाश्ता मिलेगा। कार्यक्रम के तहत सप्ताह में तीन दिन दूध और बाकी दिनों में रागी माल्ट दिया जाएगा। पहली बार सरकारी जूनियर कॉलेजों के छात्रों को भी इस दायरे में लाया गया है। सरकार इसे किशोरावस्था में पोषण और संज्ञानात्मक विकास सुधारने की पहल के रूप में पेश कर रही है। कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए हाल में अधिसूचित एम्प्लॉइज हेल्थ स्कीम के तहत 23.51 लाख लाभार्थियों को कैशलेस इलाज मिलेगा। यह कवर सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में लगभग 2,000 बीमारियों के उपचार पर लागू होगा। दुर्घटना बीमा योजना को भी अद्यतन किया गया है, जिसके तहत 7.57 लाख कर्मचारी और पेंशनर शामिल हैं। ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर 1.20 करोड़ रुपये, 60 वर्ष तक 10 लाख रुपये का जीवन कवर और हवाई दुर्घटना में मृत्यु पर 2 करोड़ रुपये मुआवजे का प्रावधान रखा गया है।

तेलंगाना की वृद्धि कथा और क्षेत्रीय असर

वित्त मंत्री का कहना है कि राज्य की आर्थिक प्रगति इन कल्याण योजनाओं की वित्तीय नींव बन रही है। उनके अनुसार तेलंगाना का जीडीएसपी वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 2.7 प्रतिशत अधिक है। राज्य प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी देश में अग्रणी होने का दावा कर रहा है। यही तर्क सरकार भारी सामाजिक व्यय और विकास निवेश के संतुलन के पक्ष में रख रही है। बजट का असर केवल राजकोषीय प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घरेलू खर्च, शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी पड़ता है। सार्वभौमिक बीमा और विस्तारित छात्र पोषण योजनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों परिवारों के लिए जोखिम कम करने का प्रयास हैं। कर्मचारी स्वास्थ्य और दुर्घटना कवर में वृद्धि से सार्वजनिक क्षेत्र के कार्यबल को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। इससे कल्याण-प्रधान शासन मॉडल पर दक्षिण भारत में व्यापक राजनीतिक और नीतिगत बहस तेज हो सकती है।

हमने पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं के विस्तार के रोडमैप पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में ‘दुआरे चिकित्सा’ के तहत स्थानीय स्तर पर वार्षिक स्वास्थ्य शिविर, ‘लक्ष्मी भंडार’ में बढ़ी हुई मासिक सहायता, और नए जिले/ब्लॉक-नगरपालिकाएं बनाकर प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने जैसे वादों का विवरण था। यह पृष्ठभूमि बताती है कि कैसे राज्यों में कल्याण-आधारित शासन मॉडल और सेवा-वितरण विस्तार एक प्रमुख नीति-बहस का विषय बने हुए हैं।

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