मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बजट भाषण और बाद की टिप्पणियों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए शीर्ष पदाधिकारियों और विधायकों पर छह महीने की वेतन कटौती और स्थगन उपाय लागू कर रही है। सरकार का कहना है कि 1 अप्रैल से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राज्य पर असाधारण वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, जबकि कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित किए बिना खर्च नियंत्रण पर जोर दिया जा रहा है। सुक्खू के मुताबिक इस बदलाव से राज्य को सालाना 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है, और यह कदम अस्थायी राहत के रूप में पेश किया जा रहा है।
हाइलाइट्स
- हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2026-27 बजट में मुख्यमंत्री के वेतन में 50% और मंत्रियों के वेतन में 30% छह महीने के लिए कटौती की।
- 1 अप्रैल से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हिमाचल प्रदेश को वार्षिक 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
- सरकार ने कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित 3% वेतनवृद्धि छह महीने के लिए टाली और जीएसटी क्षतिपूर्ति में करीब 7,000 करोड़ रुपये का बकाया उजागर किया।
2026-27 बजट में खर्च नियंत्रण की रूपरेखा
राज्य सरकार छह महीने के लिए मुख्यमंत्री के वेतन में 50% कटौती कर रही है, जबकि मंत्रियों के वेतन में 30% कमी की जा रही है। विधायकों के वेतन का 20% हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित किया जा रहा है। सरकार इस कदम को व्यापक मितव्ययिता पैकेज का हिस्सा बता रही है, जिसका उद्देश्य नकदी दबाव कम करना और वित्तीय समेकन को आगे बढ़ाना है।
वरिष्ठ नौकरशाहों, जिनमें मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव और डीजीपी रैंक के अधिकारी शामिल हैं, उनके वेतन का 30% स्थगित किया जा रहा है। अन्य अधिकारियों के लिए 20% स्थगन तय किया गया है। पुलिस विभाग में एडीजीपी से डीआईजी रैंक तक 30% और एसपी स्तर व अन्य कर्मचारियों के लिए 20% स्थगन लागू किया जा रहा है।
कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित 3% वेतनवृद्धि भी छह महीने के लिए टाली जा रही है। समूह डी कर्मचारियों को इस अवधि में यह बढ़ोतरी नहीं मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह स्थायी कटौती नहीं है और वित्तीय स्थिति सुधरने पर स्थगित राशि लौटाई जाएगी।
केंद्र से अनुदान बंद होने का वित्तीय असर
सुक्खू का कहना है कि 1 अप्रैल से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, इससे हिमाचल प्रदेश को हर साल 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। रिपोर्टों के मुताबिक 1952 के बाद यह पहला अवसर है जब राज्य इस विशेष केंद्रीय सहायता के बिना काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि राज्य को ग्रीन बोनस मिलना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय केंद्रीय सहायता बंद हो गई। उन्होंने बीबीएमबी और जीएसटी क्षतिपूर्ति के तहत करीब 7,000 करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा भी उठाया। साथ ही, जीएसटी तर्कसंगतीकरण से 25,000 करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान और बढ़ते कर्ज बोझ को मौजूदा दबाव के प्रमुख कारणों में गिना गया है।
सरकार अब लोकलुभावन फैसलों से दूरी बनाकर राजकोषीय अनुशासन पर जोर दे रही है। प्रशासन का तर्क है कि वेतन स्थगन जैसे कदम अल्पकालिक राहत दे सकते हैं, जबकि दीर्घकाल में राज्य को आत्मनिर्भर वित्तीय ढांचे की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है। इस रुख का असर आने वाले महीनों में राज्य के व्यय प्रबंधन और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों की बहस पर भी पड़ सकता है।
हमने पहले तेलंगाना सरकार के 2026-27 बजट पर रिपोर्ट किया था, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, पोषण और कर्मचारियों/पेंशनरों के स्वास्थ्य कवर को केंद्र में रखा गया था। उस रिपोर्ट में सार्वभौमिक जीवन बीमा, मिड-डे मील के विस्तार और एम्प्लॉइज हेल्थ स्कीम के जरिए कैशलेस इलाज जैसी प्रमुख घोषणाओं का विवरण था।
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