दिल्ली बिजली शुल्क बढ़ाने की तैयारी में, डिस्कॉम बकाया निपटान का रास्ता साफ

दिल्ली बिजली शुल्क बढ़ाने की तैयारी में, डिस्कॉम बकाया निपटान का रास्ता साफ
दिल्ली बिजली दर बढ़ेगी?

पीटीआई की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली में 1 अप्रैल से बिजली बिलों पर नियामक परिसंपत्ति अधिभार बढ़ सकता है, क्योंकि प्रशासन निजी वितरण कंपनियों के बकाये की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप भुगतान ढांचा तैयार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब सरकार उपभोक्ताओं पर असर कम करने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी का विकल्प भी देख रही है, जबकि 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना जारी रहने के संकेत दिए जा रहे हैं। अंतिम प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा सरकार अपने ऊपर लेती है।

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रशासन को सात वर्षों में 38,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया तीन निजी डिस्कॉम को चुकाने का निर्देश दिया।
  • अधिभार वृद्धि की संभावना के चलते 1 अप्रैल से उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ सकते हैं, हालांकि 200 यूनिट से कम खपत वालों के लिए सब्सिडी योजना जारी रह सकती है।
  • नए अधिभार से डिस्कॉम की नकदी वसूली और लागत की मान्यता स्पष्ट होगी, लेकिन सब्सिडी विस्तार से राज्य वित्त पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट निर्देश और वसूली योजना

दिल्ली में बिजली दरों पर दबाव इसलिए बन रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को तीन निजी डिस्कॉम को सात वर्षों में 38,000 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का निर्देश देता है। पाठ के अनुसार, इस राशि की वसूली बिजली बिलों में बढ़े हुए नियामक परिसंपत्ति अधिभार के जरिये होने की संभावना है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग, डीईआरसी, ने जनवरी में अपीलीय न्यायाधिकरण को बताया था कि राजधानी में कुल नियामक परिसंपत्तियां 38,552 करोड़ रुपये तक पहुंचती हैं। अदालत डीईआरसी को वसूली योजना तैयार करने, ब्याज लागत का हिसाब शामिल करने और लागत वसूली में लंबी देरी की विस्तृत ऑडिट कराने का भी निर्देश देती है.डीईआरसी फाइलिंग के अनुसार बकाया राशि में बीआरपीएल के लिए 19,174 करोड़ रुपये, बीवाईपीएल के लिए 12,333 करोड़ रुपये और टीपीडीडीएल के लिए 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं। ये वे स्वीकृत खर्च हैं जो डिस्कॉम बिजली आपूर्ति के दौरान वहन करते हैं। पिछले एक दशक में टैरिफ वृद्धि लागू नहीं होने से नियामक परिसंपत्तियां तेज़ी से बढ़ती रही हैं। देरी बढ़ने के साथ ब्याज जुड़ने से मूल राशि भी और ऊपर जाती रही है।

उपभोक्ताओं, सब्सिडी और दिल्ली बाजार पर असर

1 अप्रैल से अधिभार बढ़ने की संभावना सीधे उपभोक्ता बिलों में दिख सकती है, हालांकि सरकार राहत देने के लिए सब्सिडी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, इसलिए अंतिम टैरिफ संरचना सरकारी फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी। अधिकारियों के संकेत बताते हैं कि 200 यूनिट से कम खपत वालों के लिए मुफ्त बिजली योजना जारी रहने की उम्मीद है। इसका मतलब यह है कि भार का एक हिस्सा राजकोष और दूसरा हिस्सा बिल उपभोक्ताओं के बीच बांटा जा सकता है.ऊर्जा क्षेत्र के नजरिये से यह कदम दिल्ली के वितरण कारोबार की नकदी वसूली और लागत मान्यता के लिए महत्वपूर्ण है। अगर अधिभार लागू होता है, तो डिस्कॉम के स्वीकृत खर्चों की वसूली का रास्ता अधिक स्पष्ट होता है और लंबित दायित्वों पर दबाव कुछ कम हो सकता है। दूसरी ओर, सब्सिडी का विस्तार राज्य वित्त पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। इसलिए आने वाले आदेश में उपभोक्ता राहत और बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन सबसे अहम मुद्दा रहता है।

हमने पहले हिमाचल प्रदेश सरकार के 2026-27 बजट में वित्तीय दबाव कम करने के लिए घोषित मितव्ययिता उपायों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में वेतन कटौती/स्थगन, 1 अप्रैल से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के असर और खर्च नियंत्रण के जरिए नकदी दबाव संभालने की रणनीति के प्रमुख बिंदुओं का विवरण था।

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