संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के एक दिन बाद, केंद्र सरकार बुधवार शाम 5 बजे पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक आयोजित कर रही है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति, व्यापार मार्गों और आपूर्ति शृंखलाओं पर असर का आकलन किया जाना है। सरकारी ब्रीफिंग और संसद में दिए गए आधिकारिक वक्तव्यों के अनुसार, संघर्ष के लंबे खिंचने की आशंका के बीच ईंधन और एलपीजी उपलब्धता, साथ ही आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, नीति चर्चा के केंद्र में है। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के करने की उम्मीद है, जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर के भी शामिल होने की संभावना है।
हाइलाइट्स
- सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के असर के चलते ईंधन, उर्वरक और आपूर्ति शृंखला पर रणनीति के लिए सात अधिकार प्राप्त समूह बनाए हैं।
- एलपीजी सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता में है, संकट के दबाव में सभी स्रोतों से कच्चा तेल व गैस खरीद जारी है।
- प्रधानमंत्री ने संसद में चेताया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र से ऊर्जा आयात व व्यापार पर दबाव से भारत को लंबी अवधि की आर्थिक तैयारी करनी होगी।
संकट प्रबंधन की तैयारी और बैठक का एजेंडा
सरकार ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की आर्थिक तैयारी और आवश्यक आयातों से है। राज्यसभा में अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने ईंधन, उर्वरक और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दों पर रणनीति बनाने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूह गठित किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष ने गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा किया है और राज्यों को कालाबाजारी तथा जमाखोरी के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए।
चर्चा में एलपीजी आपूर्ति का मुद्दा भी अलग से उठने की संभावना है, क्योंकि पश्चिम एशिया में व्यवधान से आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। सरकारी ब्रीफिंग के अनुसार, घरों और शिक्षा संस्थानों तथा अस्पतालों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने संसद में यह भी कहा कि गैस और कच्चे तेल की खरीद सभी उपलब्ध स्रोतों से करने की कोशिश जारी है।
राजनीतिक स्तर पर भी बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि विपक्ष ने प्रधानमंत्री के संसदीय बयान की आलोचना की है। पीटीआई के अनुसार, कांग्रेस ने उस बयान को आत्मप्रशंसा से भरा तैयार पाठ बताया है। राहुल गांधी ने कहा है कि वह केरल में निर्धारित कार्यक्रम के कारण बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे।
ऊर्जा, व्यापार मार्ग और भारत पर संभावित असर
पश्चिम एशिया का संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापार मार्गों पर असर डाल रहा है। प्रधानमंत्री ने संसद में कहा कि भारत की कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी युद्ध प्रभावित क्षेत्र से पूरा होता है, और यह क्षेत्र भारत के अन्य देशों के साथ व्यापार के लिए भी अहम है। इस कारण संकट का प्रभाव ऊर्जा लागत, आयात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स पर एक साथ महसूस किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में, लंबे समय तक कठिन वैश्विक परिस्थितियां बने रहने की आशंका जताई है। उन्होंने देश को कोविड काल की तरह लंबी तैयारी रखने और एकजुट रहने का संदेश दिया। इससे संकेत मिलता है कि सरकार तत्काल आपूर्ति सुरक्षा के साथ मध्यम अवधि की आर्थिक और प्रशासनिक तैयारी पर भी जोर दे रही है।
कूटनीतिक मोर्चे पर, प्रधानमंत्री मोदी और U.S. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत भी इस बैठक की पृष्ठभूमि का हिस्सा है। आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व पर जोर दिया और प्रधानमंत्री ने कहा कि संवाद और कूटनीति ही आगे का रास्ता है। यह रेखांकित करता है कि भारत घरेलू आपूर्ति प्रबंधन के साथ अंतरराष्ट्रीय समन्वय पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
हमने पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के भारत पर संभावित आर्थिक असर पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिये आपूर्ति बाधित होने की आशंका, कच्चे तेल व एलएनजी की कीमतों में उछाल से मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे पर दबाव, तथा बाजार/रुपये और नीतिगत प्रतिक्रिया से जुड़े जोखिमों का आकलन किया गया था।
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