पश्चिम बंगाल में ईंधन आपूर्ति और मतदाता सूची पर केंद्रित राजनीतिक जोखिम बढ़ा
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनावी सभा में कहा कि केंद्र सरकार लॉकडाउन लगा सकती है, यह दावा ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईंधन आपूर्ति पर मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक करने वाले हैं। उपलब्ध पाठ के अनुसार, यह टिप्पणी पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईंधन स्थिति, एलपीजी आपूर्ति में देरी और कीमतों को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस से जुड़ी है. बनर्जी ने कहा कि संभावित पाबंदियां उनकी पार्टी के चुनावी अभियान को नहीं रोकेंगी.
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल में घरेलू एलपीजी की कीमत 400 रुपये से बढ़कर 1,100 रुपये हो गई और रसोई गैस सिलेंडर आपूर्ति अवधि अब 25 दिन बताई जा रही है।
- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में 1.20 करोड़ नाम हटाने का लक्ष्य सामने आया, जिसमें पहले चरण में 58 लाख नाम हटाए गए और 60 लाख नाम समीक्षा में रखे गए।
- तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मतदाता नाम हटाने एवं प्रशासनिक पाबंदियों के आरोपों के साथ ईंधन महंगाई व आपूर्ति को चुनावी मुद्दा बनाया।
ईंधन आपूर्ति, एलपीजी देरी और बैठक का संदर्भ
पश्चिम बर्धमान के पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र में प्रचार के दौरान बनर्जी ने रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने में पहले 35 दिन लग रहे थे और अब 25 दिन की बात कही जा रही है, जिसे लेकर उन्होंने भरोसा नहीं जताया। उनके मुताबिक, घरेलू एलपीजी की कीमत पहले 400 रुपये थी और अब 1,100 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि पेट्रोल कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.
उन्होंने इन आरोपों को संभावित प्रशासनिक पाबंदियों की आशंका से जोड़ा और कहा कि लोगों को घरों में सीमित करने की कोशिश की जा सकती है। पाठ के अनुसार, शुक्रवार को होने वाली प्रधानमंत्री की ईंधन आपूर्ति संबंधी बैठक में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया गया है। इससे ईंधन प्रबंधन और चुनावी राजनीति के बीच टकराव का स्वर और तेज होता दिख रहा है.
मतदाता सूची संशोधन पर तृणमूल के नए आरोप
बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा के बीच सांठगांठ का आरोप दोहराया। उन्होंने कहा कि 1.20 करोड़ नाम हटाने का लक्ष्य बताया गया था, जिसमें पहले चरण में 58 लाख नाम हटाए गए और करीब 60 लाख लोगों को तार्किक विसंगति के नाम पर विचाराधीन रखा गया। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया उन सीटों को प्रभावित करती है जहां पिछली बार तृणमूल कांग्रेस जीती थी.
उन्होंने मांग की कि हटाए गए मतदाताओं की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए ताकि प्रभावित लोग उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार अपील कर सकें। बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी कार्यकर्ता ऐसे लोगों से संपर्क करेंगे और मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर तृणमूल ने सड़क और अदालत दोनों जगह विरोध नहीं किया होता तो और अधिक नाम हटाए जा सकते थे.
चुनावी असर और संगठनात्मक प्रतिक्रिया
भाजपा पर हमला तेज करते हुए बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी रात में योजनाएं लागू करती है और मतदाताओं के नाम हटाने के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। यह बयान चुनाव पूर्व राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है.
बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस हर इलाके में शिविर लगाएगी ताकि जिन लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं आएं, उन्हें मदद मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वकील ट्रिब्यूनल में ऐसे मामलों को लड़ने में सहायता देंगे। इस रुख से स्पष्ट है कि पार्टी ईंधन महंगाई, आपूर्ति व्यवधान और मतदाता सूची विवाद, तीनों को एक साथ चुनावी मुद्दे के रूप में उठा रही है.
हमने पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की उपलब्धता को लेकर सरकार के स्पष्टीकरण और अफवाहों से पैदा हुई घबराहट में खरीदारी पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि समग्र आपूर्ति सामान्य रहने के बावजूद अचानक बढ़ी खुदरा मांग से कुछ जगहों पर अस्थायी दबाव दिखा, और एलपीजी रीफिल के लिए शहरी क्षेत्रों में 25 दिन व ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर यथावत बताया गया था।
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