केरल में यूडीएफ बहुमत जीतने का दावा, आईयूएमएल ने भाजपा गठजोड़ आरोप खारिज किए

केरल में यूडीएफ बहुमत जीतने का दावा, आईयूएमएल ने भाजपा गठजोड़ आरोप खारिज किए
यूडीएफ का बहुमत दावा

एएनआई से बातचीत में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर कहते हैं कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट 9 अप्रैल को होने वाले केरल विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करेगा और जहां वह मैदान में है वहां निर्णायक बढ़त हासिल करेगा। वह मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए यूडीएफ, आरएसएस या भाजपा के कथित गुप्त समझौते के आरोपों को निराधार प्रचार बताते हैं। बशीर ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती का भी स्वागत करते हैं और मौजूदा आर्थिक दबाव, वीजा दिक्कतों तथा यात्रा संबंधी समस्याओं के बीच इसे राहत देने वाला कदम बताते हैं।

हाइलाइट्स

  • यूडीएफ ने आगामी केरल विधानसभा चुनाव में मजबूत बहुमत का दावा किया और भाजपा के साथ गठजोड़ के सभी आरोपों को निराधार बताया।
  • केंद्र सरकार द्वारा ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती को विपक्ष और यूडीएफ ने मौजूदा आर्थिक दबाव के बीच आम जनता के लिए राहतकारी कदम बताया।
  • 9 अप्रैल को चुनाव और 4 मई को मतगणना से पहले राज्य में ईंधन मूल्य, जीवनयापन लागत और गठबंधन की विश्वसनीयता प्रमुख चुनावी मुद्दे बन गए हैं।

चुनावी दावेदारी और आरोपों पर जवाब

बशीर का कहना है कि यूडीएफ आगामी चुनाव में पूरे आत्मविश्वास के साथ उतर रहा है और गठबंधन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार विपक्षी मोर्चे के खिलाफ भाजपा से समझौते की बात राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है, जिसका तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। वह पलटवार करते हुए आरोप लगाते हैं कि सीपीएम ने ही भाजपा के विस्तार में विभिन्न स्तरों पर मदद की है और यही मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बन रहा है।

केरल विधानसभा चुनाव एक ही चरण में 9 अप्रैल को होना तय है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होना है। इस समयसीमा के कारण राज्य की राजनीति में गठबंधन समीकरण, प्रचार की धार और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप तेज बने हुए हैं।

ईंधन शुल्क कटौती और आर्थिक दबाव

बशीर केंद्र सरकार के ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटाने के फैसले को जनता के हित में जरूरी कदम बताते हैं। उनका कहना है कि आर्थिक संकट के दौर में सरकार और विपक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है कि लोगों को राहत देने वाले उपायों का समर्थन करें। उनके मुताबिक कीमतों या करों में कमी को सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए, खासकर तब जब आम नागरिक पहले से कई तरह की लागत संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

वह यह भी कहते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में वीजा और यात्रा से जुड़ी समस्याएं भी लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार से त्वरित हस्तक्षेप और व्यावहारिक फैसलों की अपेक्षा की जा रही है। ईंधन शुल्क में कटौती को इसी व्यापक आर्थिक संदर्भ में राहतकारी नीति कदम के रूप में पेश किया जा रहा है।

केरल की राजनीति और व्यापक असर

चुनाव से पहले ईंधन कीमतों, जीवनयापन लागत और आर्थिक प्रबंधन जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श में प्रमुख बने हुए हैं। यूडीएफ की ओर से बहुमत का दावा और सत्तारूढ़ खेमे पर भाजपा को लाभ पहुंचाने का आरोप, चुनावी नैरेटिव को और तीखा बनाता है। इससे संकेत मिलता है कि केरल का मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि आर्थिक विश्वसनीयता और राजनीतिक गठबंधन की धारणा का भी है।

राज्य में मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ दल अपने समर्थक आधार को मजबूत करने और विरोधियों के आरोपों का जवाब देने में जुटे हैं। इस माहौल में ईंधन कर, महंगाई और शासन क्षमता जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए चुनावी अभियान में राजनीतिक संदेश के साथ आर्थिक राहत के सवाल भी समान रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

हमने पहले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें काबू में रखने के लिए सरकार की रणनीति पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में कर राजस्व त्याग, निर्यात कर जैसे कदमों के जरिए उपभोक्ता राहत देने के साथ-साथ बढ़ते राजकोषीय दबाव और ऊर्जा-आपूर्ति जोखिमों की चर्चा की गई थी।

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