आंध्र प्रदेश में अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने वाला विधेयक लोकसभा से पारित

आंध्र प्रदेश में अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने वाला विधेयक लोकसभा से पारित
अमरावती बनी राजधानी

लोकसभा में बुधवार को पेश आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी मिलती है, और विधेयक के पाठ के अनुसार इसका उद्देश्य अमरावती को 2 जून 2024 से राज्य की वैधानिक राजधानी के रूप में स्पष्ट दर्ज करना है। यह कदम 2014 के पुनर्गठन कानून में संशोधन से जुड़ा है, जिसमें हैदराबाद को सीमित अवधि के लिए साझा राजधानी माना गया था और उसके बाद आंध्र प्रदेश के लिए नई राजधानी का प्रावधान रखा गया था। संसदीय बहस में कांग्रेस, भाजपा और टीडीपी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने किसान मुआवजे और वित्तपोषण पर आपत्तियां उठाईं।

हाइलाइट्स

  • लोकसभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित करने वाला विधेयक पारित किया, जिससे प्रशासनिक और नीति अनिश्चितता कम हो सकती है।
  • वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने किसान मुआवजा, भूमि व पुनर्वास सहित वित्तीय संरचना की स्पष्टता की मांग करते हुए विधेयक का विरोध किया।
  • राज्य में बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट और शहरी सेवाओं के लिए राजधानी की स्पष्टता से परियोजना योजना और निवेश भरोसा बढ़ सकता है।

विधेयक का दायरा और संसदीय समर्थन

बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर कहते हैं कि उनकी पार्टी इस कानून का समर्थन करती है, हालांकि वह आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग भी दोहराती है। टीडीपी सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर सदन से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील करते हैं और इसे राज्य के लिए स्थायी राजधानी सुनिश्चित करने वाला कदम बताते हैं। भाजपा सांसद सी एम रमेश का कहना है कि इस बदलाव के बाद भविष्य में आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर अनिश्चितता की गुंजाइश नहीं रहेगी और इससे राजस्व तथा व्यापक विकास को बल मिल सकता है।

विधेयक का मकसद राज्य विधानसभा के 28 मार्च के प्रस्ताव को कानूनी रूप देना है, जिसमें केंद्र से पुनर्गठन अधिनियम की धारा 5 में संशोधन का अनुरोध किया गया था। प्रस्तावित संशोधन के तहत अमरावती का नाम आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में अधिनियम में जोड़ा जाता है। विधेयक यह भी रेखांकित करता है कि अमरावती और उसके आसपास प्रशासनिक, विधायी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।

किसानों, फंडिंग और क्षेत्रीय विकास पर विवाद

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि किसानों के हितों की स्पष्ट सुरक्षा और मुआवजे की समयसीमा के बिना इसका व्यावहारिक महत्व सीमित है। पार्टी सांसद पी वी मिधुन रेड्डी कहते हैं कि 34,000 एकड़ भूमि राजधानी विकास के लिए ली गई थी और प्रभावित परिवारों को विकसित भूखंड, आवास और बच्चों के लिए शिक्षा जैसी सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इन्हें पूरा नहीं किया गया। उनका कहना है कि विधेयक में इन प्रतिबद्धताओं को शामिल किए बिना किसानों की चिंताओं का समाधान नहीं होता।

रेड्डी बड़े पैमाने की राजधानी परियोजना के लिए धन के स्रोत पर भी सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि इतनी विशाल विकास योजना के वित्तीय ढांचे पर स्पष्टता नहीं है। उन्होंने 2019 से 2024 के बीच वाईएसआरसीपी सरकार के तीन राजधानियों के मॉडल का बचाव करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं। इसके विपरीत, समर्थक दलों का तर्क है कि एकल राजधानी का कानूनी दर्जा प्रशासनिक स्पष्टता, निवेश भरोसे और दीर्घकालिक राज्य विकास के लिए जरूरी है।

नीतिगत असर और निवेश संकेत

अमरावती को एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिलने से राज्य की प्रशासनिक संरचना पर लंबे समय से चल रही नीति अनिश्चितता कम हो सकती है। बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट, शहरी सेवाएं और सार्वजनिक निर्माण से जुड़े क्षेत्रों के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजधानी की स्थिति स्पष्ट होने पर परियोजना योजना और पूंजी आवंटन अधिक निश्चित हो सकते हैं। हालांकि, जमीन अधिग्रहण से जुड़े वादों, पुनर्वास और परियोजना फंडिंग पर स्पष्ट अमल की दिशा निवेश धारणा को प्रभावित करती रहेगी।

राजनीतिक स्तर पर यह विधेयक आंध्र प्रदेश की राजधानी पर बहु-वर्षीय विवाद को औपचारिक कानूनी ढांचे में समेटने की कोशिश है। यदि यह कानून बनता है, तो राज्य और केंद्र दोनों के लिए अगली बड़ी परीक्षा अमरावती विकास के क्रियान्वयन, वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था और प्रभावित किसानों के दावों के निपटारे में दिखेगी। यही कारक तय करेंगे कि राजधानी का यह निर्णय केवल विधायी स्पष्टता तक सीमित रहता है या व्यापक आर्थिक गतिविधि में भी बदलता है।

हमने पहले टियर-II और टियर-III शहरों में जमीन की कीमतों और निर्माण लागत में संभावित बढ़ोतरी की पृष्ठभूमि में रियल एस्टेट डेवलपर्स के मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) परियोजनाओं की ओर बढ़ते रुझान पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि आवास, रिटेल, ऑफिस और हॉस्पिटैलिटी को एक ही परियोजना ढांचे में जोड़कर डेवलपर लागत दबाव, अधिग्रहण चुनौतियों और बदलती शहरी मांग के बीच राजस्व विविधीकरण और दीर्घकालिक मूल्य सृजन की कोशिश कर रहे हैं।

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