बेंगलुरु में ईंधन आपूर्ति आश्वासन के बीच ऑटो एलपीजी भराई की मांग बढ़ी

बेंगलुरु में ईंधन आपूर्ति आश्वासन के बीच ऑटो एलपीजी भराई की मांग बढ़ी
बेंगलुरु में एलपीजी डिमांड

केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के अनुसार देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच आपूर्ति को लेकर आशंकाओं से बेंगलुरु में ऑटो एलपीजी स्टेशन पर लंबी कतारें दिख रही हैं। सरकार कह रही है कि रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर चल रही हैं और खुदरा बिक्री केंद्रों पर किसी कमी की सूचना नहीं है। इसके बावजूद कई शहरों में उपभोक्ता एहतियातन अधिक ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर दबाव दिखाई दे रहा है।

हाइलाइट्स

  • ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से ऊपर जाने के बावजूद पेट्रोल, डीजल व एलपीजी के खुदरा दाम स्थिर रखे गए हैं।
  • बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में ऑटो एलपीजी की डर आधारित खरीदारी ने स्थानीय वितरण नेटवर्क पर मांग का दबाव बढ़ा दिया है, हालांकि वास्तविक कमी की पुष्टि नहीं है।
  • सरकार ने ओएमसी को 2023 में लगभग 22,000 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए 30,000 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता दी, जिससे खुदरा मूल्य स्थिरता की लागत स्पष्ट हुई।

आपूर्ति स्थिति और सरकारी हस्तक्षेप

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार की ब्रीफिंग में कहा कि भारत के कच्चे तेल का भंडार अगले दो महीनों के लिए पर्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और खुदरा आउटलेट्स पर किसी कमी की रिपोर्ट नहीं है। सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति पर दबाव के बावजूद घरेलू बाजार के लिए आवश्यक उपलब्धता बनाए रखी जा रही है।

शर्मा ने बताया कि करीब दो महीने पहले ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में था और अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है। इसके बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मूल्य अस्थिरता से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती और अन्य उपाय लागू हैं।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम 6 अप्रैल 2022 से नहीं बढ़े हैं, जबकि मार्च 2024 में 2 रुपये की कटौती अब भी प्रभावी है। सरकार ने घरेलू बाजार में एटीएफ और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात शुल्क भी लगाया है। इससे तेल विपणन कंपनियों पर अंडर-रिकवरी का दबाव पड़ रहा है, जिसे सरकारी समर्थन से संभाला जा रहा है।

बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में मांग का दबाव

बेंगलुरु में ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशन पर ऑटो रिक्शा की लंबी कतार इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता आशंकित होकर ईंधन भरवा रहे हैं। इसी तरह मुंबई महानगर क्षेत्र, खासकर मुंबई, ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई में भी वाहन चालकों ने घंटों कतारों में इंतजार किया। चेम्बूर क्षेत्र के एक ऑपरेटर के हवाले से कहा गया कि ग्राहक डर के कारण टैंक भरवा रहे हैं।

हैदराबाद में भी सुबह से शुरू हुई कतारें देर रात तक जारी रहीं। यह स्थिति दिखाती है कि आधिकारिक आश्वासनों के बावजूद उपभोक्ता व्यवहार में सतर्कता बढ़ गई है। बाजार में वास्तविक कमी की पुष्टि नहीं होने पर भी डर आधारित खरीदारी स्थानीय वितरण नेटवर्क पर तात्कालिक दबाव बना रही है।

पश्चिम एशिया में U.S.-इजराइल और ईरान संघर्ष के कारण होरमुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट प्रभावित होने की आशंका ने इस चिंता को बढ़ाया है। यह मार्ग भारत के मध्य पूर्व से कच्चे तेल आयात के लिए अहम है। ऐसे में सरकार का फोकस आपूर्ति भरोसा बनाए रखने और घबराहट में खरीदारी को कम करने पर है।

एलपीजी लागत, सब्सिडी और तेल कंपनियों पर असर

सरकार के अनुसार भारत की एलपीजी आयात निर्भरता लगभग 60 प्रतिशत है। संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतें, सऊदी सीपी बेंचमार्क के आधार पर, 522 डॉलर से बढ़कर 780 डॉलर तक पहुंच गई हैं। इसके बावजूद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है।

शर्मा ने कहा कि इस अतिरिक्त बोझ को सरकार वहन कर रही है और तेल विपणन कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। 2023 में सरकार ने ओएमसी को लगभग 22,000 करोड़ रुपये दिए थे, जबकि 2025-26 के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह संकेत देता है कि खुदरा मूल्य स्थिर रखने की नीति का राजकोषीय और कॉर्पोरेट लागत प्रभाव जारी है।

आपूर्ति मोर्चे पर उन्होंने कहा कि किसी भी एलपीजी वितरक केंद्र पर सूखने जैसी स्थिति की सूचना नहीं है और एक दिन में लगभग 60 लाख सिलेंडर वितरित किए गए। वाणिज्यिक एलपीजी के लिए सरकार ने लगभग 70 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैकल्पिक ईंधन के रूप में अतिरिक्त केरोसिन भी आवंटित किया गया है।

हमने पहले पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में आवश्यक आपूर्ति की सरकारी समीक्षा पर रिपोर्ट किया था। उस कवरेज में LNG/LPG के वैकल्पिक स्रोत जोड़ने, घरेलू LPG कीमतें स्थिर रखने, जमाखोरी पर कार्रवाई और बिजली-उर्वरक सहित अहम सेक्टरों में समन्वित शमन उपायों पर फोकस था।

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