असम में भाजपा यूसीसी लागू करने का वादा दोहराती है
भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया प्रसारण और अमित शाह के चुनावी भाषण के अनुसार, असम विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड, अवैध घुसपैठ और जनजातीय कल्याण को अपने अभियान के केंद्र में रखती है। दुधनै, गोआलपाड़ा की रैली में शाह यह कहते हैं कि यूसीसी से कथित घुसपैठियों के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पर रोक लगेगी, जबकि जनजातीय क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान और 4 मई को मतगणना के बीच यह संदेश भाजपा के तीसरे लगातार कार्यकाल के प्रयास का प्रमुख हिस्सा बनता है।
हाइलाइट्स
- अमित शाह ने असम में भाजपा सरकार के पुन: चयन पर यूसीसी लागू करने और जनजातीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखने की घोषणा की।
- शाह ने मौजूदा भाजपा सरकार के बेहतर जनजातीय कल्याण बजट तथा हर जिले में नया डेयरी संयंत्र और हर जनजातीय परिवार को एक गाय-भैंस देने का वादा किया।
- भाजपा, असम चुनाव में 126 सीटों पर 31 वादों के घोषणापत्र के साथ लगातार तीसरी जीत का प्रयास कर रही है, वहीं विपक्ष ध्रुवीकरण का आरोप लगाता है।
यूसीसी, घुसपैठ और चुनावी संदेश
दुधनै की सभा में अमित शाह कहते हैं कि भाजपा का प्रस्तावित यूसीसी राज्य में एक समान कानूनी ढांचा लाएगा और कथित अवैध घुसपैठियों द्वारा निजी कानूनों के दुरुपयोग को रोकेगा। वह इसे बहुविवाह और जनसांख्यिकीय प्रभाव के मुद्दे से जोड़ते हुए दावा करते हैं कि ऐसी व्यवस्था राजनीतिक leverage को सीमित करेगी। शाह यह भी स्पष्ट करते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, ताकि संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय पहचान पर असर न पड़े।
भाषण में वह पड़ोसी मेघालय के गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद का उदाहरण भी देते हैं और आरोप लगाते हैं कि बाहरी तत्व विवाह के जरिए राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसी क्रम में वह असम में भाजपा को फिर सत्ता देने की अपील करते हैं और कहते हैं कि पार्टी को पांच साल और मिले तो राज्य को घुसपैठियों से मुक्त किया जाएगा। उनके अनुसार, सरकार ने ऐसे लोगों की पहचान कर ली है और अगला कार्यकाल मिलने पर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जनजातीय कल्याण, डेयरी योजना और बजटीय दावे
शाह रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नाम पर एक जनजातीय विकास रोडमैप पेश करते हैं और कहते हैं कि इसकी पूरी क्रियान्विति भाजपा की वापसी पर निर्भर करती है। वह दावा करते हैं कि मौजूदा सरकार का जनजातीय कल्याण बजट पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों की तुलना में काफी अधिक है। साथ ही वह द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने का उल्लेख कर जनजातीय प्रतिनिधित्व को भाजपा की उपलब्धि के रूप में पेश करते हैं।
ग्रामीण आजीविका के मोर्चे पर शाह कहते हैं कि भाजपा फिर सत्ता में आई तो असम के हर जिले में एक बड़ा डेयरी संयंत्र स्थापित किया जाएगा। वह प्रत्येक जनजातीय परिवार को एक गाय और एक भैंस देने का वादा भी करते हैं। दुधनै को 'दूध की नदी' की छवि से जोड़ते हुए वह आधुनिक डेयरी ढांचे के जरिये स्थानीय आय और पशुपालन अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की बात रखते हैं।
असम चुनाव पर व्यापक राजनीतिक असर
भाजपा अपने अभियान में शांति, संस्कृति संरक्षण और सुरक्षा को मुख्य मुद्दों के रूप में सामने रखती है और दावा करती है कि उसके शासन में असम में स्थिरता आई है। पार्टी, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट जैसे सहयोगियों के साथ 126 सीटों पर लगातार तीसरी जीत का प्रयास कर रही है। उसके घोषणापत्र में 31 उपायों के जरिए असम को 'सबसे उज्ज्वल राज्य' बनाने का वादा शामिल है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला छह दलों का गठबंधन भाजपा के यूसीसी और घुसपैठ संबंधी अभियान को ध्रुवीकरण वाला बताता है। इससे चुनावी मुकाबला पहचान, सुरक्षा और कल्याण योजनाओं के बीच सीधा राजनीतिक जनमत संग्रह जैसा रूप लेता है। एक चरण में होने वाला मतदान अब इस बात की परीक्षा बनता है कि शाह का संदेश, जनजातीय कल्याण और सुरक्षा का मिश्रण, मतदाताओं पर कितना असर डालता है।
हमने पहले असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस के घोषणा पत्र और राहुल गांधी के जोरहाट रैली से जुड़े चुनावी संदेश पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में रोजगार सृजन, किसानों के लिए एमएसपी व बाढ़-रोधी सहायता, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे जैसे वादों के साथ भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और नीतिगत फैसलों को लेकर किए गए हमलों को प्रमुखता दी गई थी।
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