पश्चिम बंगाल में CPI(M) ने चुनावी एकता पर जोर दिया

पश्चिम बंगाल में CPI(M) ने चुनावी एकता पर जोर दिया
CPI(M) का चुनावी गठबंधन

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में CPI(M) के पश्चिम बंगाल सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि हुमायूं कबीर की पार्टी से संक्षिप्त संपर्क का मकसद किसी समझौते को अंतिम रूप देना नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में उभर रहे राजनीतिक रुझानों को समझना था। उनके अनुसार पार्टी की प्राथमिकता तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ समान सोच वाले समूहों के साथ सबसे व्यापक एकजुटता बनाना है, लेकिन सांप्रदायिक राजनीति के किसी भी रूप को वामपंथी खेमे में जगह नहीं दी जा सकती।

हाइलाइट्स

  • CPI(M) ने 1 अप्रैल को घोषणा की कि वह 252 सीटों पर सीधे लड़ेगा और 42 सीटों पर सहयोगियों को समर्थन देगा, सीट बंटवारा नामांकन पूर्व ही स्पष्ट किया गया।
  • सीपीआई(एम) ने वरिष्ठ नेताओं को प्रचार-प्रसार एवं संगठन सुदृढ़ीकरण में लगाया, उम्मीदवार चयन में युवा व समाजिक प्रतिनिधित्व पर फोकस किया।
  • बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट से उत्पन्न असंतोष के चलते CPI(M) शून्य सीट से चुनाव में प्रासंगिकता बढ़ाने की रणनीति अपना रही है।

सीट बंटवारे और बातचीत की शर्तें

सलीम ने कहा कि CPI(M) पिछले दो वर्षों से अति वाम धड़ों, सामाजिक संगठनों और अन्य राजनीतिक समूहों के साथ संवाद कर रही है। उन्होंने बताया कि हुमायूं कबीर के साथ बातचीत इसी व्यापक राजनीतिक आकलन का हिस्सा थी, लेकिन आगे बढ़ने के लिए पार्टी ने सांप्रदायिक राजनीति के विरोध को स्पष्ट पूर्वशर्त बनाया। सलीम के मुताबिक यह संवाद शुरुआती स्तर से आगे नहीं बढ़ा क्योंकि दोनों पक्षों के बीच मतभेद ऐसे थे जिन्हें पाटा नहीं जा सका।

वाम मोर्चे ने 1 अप्रैल को घोषणा की कि वह 252 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ेगा और 42 सीटों पर सहयोगी दलों को समर्थन देगा। सलीम ने कहा कि इस बार नामांकन से पहले ही सीटों का बंटवारा स्पष्ट कर दिया गया, जिसे उन्होंने कई वर्षों में पहली बार अपेक्षाकृत सुचारु प्रक्रिया बताया। उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM जैसे दलों के साथ किसी तरह की साझेदारी वामपंथ के लिए स्वीकार्य नहीं है।

वाम एकजुटता और चुनावी रणनीति

सलीम के अनुसार पार्टी ने इस बार वरिष्ठ नेताओं को बड़े पैमाने पर प्रचार, संगठन के पुनर्स्थापन और जमीनी ढांचे को मजबूत करने के काम में लगाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि राज्य पार्टी सम्मेलन में यह तय किया गया था कि राज्य सचिवालय की दो महिला सदस्यों को छोड़कर अन्य वरिष्ठ सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे। उम्मीदवार चयन में अनुभवी, युवा और मध्य आयु वर्ग के चेहरों का मिश्रण रखने की रणनीति अपनाई गई है।

उन्होंने कहा कि इस बार कई आदिवासी और अनुसूचित जाति उम्मीदवार सामान्य सीटों पर भी मैदान में हैं, जिससे सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश दिखती है। सलीम ने यह भी रेखांकित किया कि CPI-ML लिबरेशन जैसे समूह अब सहयोगी के रूप में साथ आ रहे हैं और अन्य अति वाम धड़े भी अभियान में मदद कर रहे हैं। उनके मुताबिक देश में अति दक्षिणपंथी राजनीति के उभार ने विभिन्न वाम धाराओं को मुख्यधारा वाम के करीब लाने का काम किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर संभावित असर

सलीम ने दावा किया कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी ने राज्य में राजनीतिक विकल्प की मांग बढ़ाई है। उन्होंने पर्यावरणीय गिरावट को भी जनता की असंतुष्टि का एक कारण बताया और कहा कि यही परिस्थितियां वामपंथ के पुनरुत्थान के लिए आधार बना रही हैं। इस आकलन के जरिए CPI(M) अपने शून्य सीट वाले वर्तमान स्तर से आगे बढ़कर चुनाव में प्रासंगिकता हासिल करना चाहती है।

हुमायूं कबीर के साथ संपर्क पर उठे सवालों के बीच सलीम की टिप्पणी वामपंथ की धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर आई आलोचना का जवाब भी मानी जा रही है। उनका कहना है कि मंदिर-मस्जिद के मुद्दों को चुनावी राजनीति से जोड़ना बंगाल में स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसे में पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को व्यापक विपक्षी एकता और वैचारिक सीमाओं, दोनों के संतुलन के रूप में पेश कर रही है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में मालदा के कालीचक इलाके में मतदाता सूची सत्यापन के दौरान न्यायिक अधिकारियों को रोके जाने की घटना और उससे जुड़े प्रशासनिक जवाबदेही व चुनावी सुरक्षा के सवालों पर चर्चा की गई थी। उसमें मतदाता सूची पुनरीक्षण, कथित नाम कटने के आरोप, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जांच के निर्देशों के साथ-साथ इस विवाद के चुनावी नैरेटिव पर संभावित असर को भी रेखांकित किया गया था।

इस सामग्री में तृतीय-पक्ष की राय शामिल हो सकती है, इस वेबपेज पर कोई भी डेटा और जानकारी हमारे अस्वीकरण के अनुसार निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। जबकि हम सख्त संपादकीय अखंडता का पालन करते हैं, इस पोस्ट में हमारे भागीदारों के उत्पादों के संदर्भ शामिल हो सकते हैं।