असम चुनाव में युवा उम्मीदवारों की एंट्री से दलों की रणनीति बदली
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनाव में 40 वर्ष से कम उम्र के कई उम्मीदवार प्रमुख सीटों पर मुकाबले को नया रूप दे रहे हैं। 126 सदस्यीय सदन के लिए यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब भाजपा, कांग्रेस, असम जातीय परिषद और राइजोर दल जैसे दल पहली बार वोट डालने वाले 6.28 लाख मतदाताओं और शहरी-युवा वर्ग को साधने पर जोर दे रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में उम्मीदवार चयन केवल चेहरे बदलने का मामला नहीं, बल्कि संगठन, पहचान और स्थानीय विकास के मुद्दों पर नई राजनीतिक पेशकश भी बन रहा है।
हाइलाइट्स
- भाजपा ने 18 मार्च को 88 उम्मीदवारों की पहली सूची में कई मौजूदा विधायकों को हटाकर नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दी।
- कुनकी चौधरी, राहुल चेत्री और रुपाली लांगथासा समेत अनेक अंडर-40 उम्मीदवार शहरी व क्षेत्रीय सीटों पर चुनावी समीकरणों को नया स्वरूप दे रहे हैं।
- 18-19 वर्ष आयु वर्ग और पहली बार मतदान कर रहे युवाओं को साधने के उद्देश्य से दलों ने उम्मीदवार चयन में अनुभव और स्थानीय पहचान पर जोर दिया है।
टिकट वितरण में पीढ़ीगत बदलाव
भाजपा ने 18 मार्च को जारी अपनी पहली सूची में 88 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर कई मौजूदा विधायकों को बाहर कर नए चेहरों और दल-बदल कर आए नेताओं को जगह दी। पार्टी ने इस कदम के जरिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनाव अभियान को नई ऊर्जा देने की कोशिश की है। दिसपुर सीट पर पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को उतारना इसी रणनीति का प्रमुख उदाहरण है, जहां मौजूदा विधायक अतुल बोरा की जगह नया दांव खेला गया है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए छह महिलाओं को टिकट देना भी अनुभव और नई सामाजिक अपील के मिश्रण के तौर पर देखा जा रहा है.
एनडीए के सीट बंटवारे में भाजपा 89, असम गण परिषद 26 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वरिष्ठ नेताओं को हटाने का फैसला आंतरिक असंतोष का जोखिम भी पैदा करता है, और एक विधायक के इस्तीफे का उल्लेख इसी दबाव को दिखाता है। फिर भी, सत्ताविरोधी रुझान को संतुलित करने और लंबे समय से सत्ता में रहने के बाद संगठन को ताजा दिखाने के लिए यह बदलाव भाजपा की केंद्रीय चुनावी गणना का हिस्सा बन रहा है।
अंडर-40 चेहरे शहरी और क्षेत्रीय सीटों पर केंद्र में
असम जातीय परिषद की कुनकी चौधरी को मीडिया रिपोर्टों में गुवाहाटी सेंट्रल से राज्य की सबसे युवा दावेदारों में गिना जा रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, गैर-वंशवादी प्रोफाइल और सामाजिक क्षेत्र का अनुभव उन्हें शहरी मतदाताओं के बीच अलग पहचान देता है। राइजोर दल के राहुल चेत्री को मार्घेरिटा सीट पर नामांकन जांच के बाद अंतिम मंजूरी मिल चुकी है, जिससे पार्टी को उस क्षेत्र में प्रचार तेज करने का आधार मिला है।
कांग्रेस के तंजिल हुसैन समागुड़ी में युवावस्था और राजनीतिक परिवार, दोनों के मेल के साथ मैदान में हैं, जबकि जूबेइर अनम मजूमदार बराक वैली की अल्गापुर-कटलीछेरा सीट पर संगठनात्मक अनुभव के सहारे चुनौती पेश कर रहे हैं। राइजोर दल की ज्ञानश्री बोरा मरियानी में स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन को मुख्य मुद्दा बना रही हैं। भाजपा की रुपाली लांगथासा हाफलोंग में आदिवासी प्रतिनिधित्व, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास के एजेंडे के साथ युवा नेतृत्व का अलग मॉडल पेश कर रही हैं।
मतदाता समीकरण और क्षेत्रीय असर
इन युवा उम्मीदवारों की मौजूदगी 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर खास असर डाल सकती है। कई उम्मीदवार वैश्विक शिक्षा, छात्र राजनीति, सामाजिक आंदोलन या पेशेवर पृष्ठभूमि के साथ स्थानीय पहचान को जोड़ रहे हैं, जिससे पारंपरिक जातीय और दलगत गणित के बीच नया चुनावी विमर्श बन रहा है। गुवाहाटी, मार्घेरिटा, मरियानी, समागुड़ी और बराक वैली जैसी सीटों पर यह बदलाव करीबी मुकाबलों में निर्णायक कारक बन सकता है।
व्यापक स्तर पर यह रुझान दिखाता है कि असम की राजनीति में केवल वंश, संगठन या सत्ता का अनुभव ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की विश्वसनीयता भी चुनावी पूंजी बन रही है। हालांकि अंतिम नतीजा 4 मई को सामने आएगा, मौजूदा अभियान में युवा चेहरों ने पहले ही दलों को संदेश दे दिया है कि उम्मीदवार चयन अब विकास, पहचान और बदलाव के संयुक्त एजेंडे से अलग नहीं रह सकता। इससे राज्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अधिक बहुस्तरीय और मतदाता-केंद्रित होती दिख रही है।
हमने पहले असम विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के चुनावी संदेश और प्रचार-रैली के प्रमुख मुद्दों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में यूनिफॉर्म सिविल कोड, अवैध घुसपैठ और जनजातीय कल्याण को अभियान के केंद्र में रखने, जनजातीय क्षेत्रों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने, तथा डेयरी संयंत्र और जनजातीय परिवारों के लिए पशुधन जैसी घोषणाओं का उल्लेख था।
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