NSE IPO की तैयारी के बीच अशिष्कुमार चौहान की बाजार पुनर्निर्माण भूमिका पर नजर

NSE IPO की तैयारी के बीच अशिष्कुमार चौहान की बाजार पुनर्निर्माण भूमिका पर नजर
NSE IPO में नई भूमिका

सेबी की जनवरी में मिली नो-ऑब्जेक्शन के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपनी लिस्टिंग की औपचारिक तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है, और इसी संदर्भ में उसकी साख बहाली में प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी अशिष्कुमार चौहान की भूमिका फिर केंद्र में है. एक्सचेंज 2022 में उनके लौटने के बाद प्रौद्योगिकी स्थिरता, प्रशासनिक सुधार और निवेशक भरोसे की मरम्मत पर लगातार काम कर रहा है. देश के सबसे ज्यादा देखे जा रहे संभावित आईपीओ में शामिल यह प्रक्रिया उस संस्था के लिए अहम मानी जा रही है, जिसकी सार्वजनिक निर्गम योजना पहले को-लोकेशन मामले से जुड़ी जांचों के कारण अटक गई थी.

हाइलाइट्स

  • एनएसई का कुल बाजार पूंजीकरण 2024 में पहली बार 5 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया और फरवरी तक 464 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
  • 5 जून 2024 को एनएसई ने एक दिन में 29 करोड़ ट्रेड निष्पादित किए और 23 जुलाई 2024 को 2,000 करोड़ से अधिक ऑर्डर संसाधित किए।
  • आईपीओ की प्रगति चौहान की नेतृत्व क्षमता और एनएसई की संस्थागत विश्वसनीयता की परीक्षा बनेगी, जिससे भारतीय पूंजी बाजार का नियामकीय भरोसा प्रभावित होगा।

आईपीओ तैयारी और भरोसा बहाली

मुंबई स्थित एनएसई ने 2016 में पहली बार आईपीओ के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में उसे वापस लेना पड़ा. 2015 की सेबी जांच में को-लोकेशन व्यवस्था के दुरुपयोग से कुछ ब्रोकरों को अनुचित लाभ मिलने के आरोप सामने आए थे, जिससे एक्सचेंज की पारदर्शिता और प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठे. 2022 में चौहान की वापसी ऐसे समय हुई, जब संस्था को नई तकनीक खड़ी करने से अधिक अपने नाम और प्रक्रियाओं पर भरोसा लौटाने की जरूरत थी.

चौहान का कामकाजी तरीका बड़े सार्वजनिक बदलावों के बजाय क्रमिक सुधारों पर आधारित रहा है. इसमें तकनीकी गड़बड़ियों को एक-एक कर ठीक करना, सिस्टम अपग्रेड को चरणबद्ध ढंग से लागू करना और प्रशासनिक अनुशासन को रोजमर्रा के कामकाज में मजबूत करना शामिल है. एनएसई अब अपने आईपीओ की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए ये सुधार केवल संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूंजी बाजार के सामने उसकी विश्वसनीयता का आधार भी बन रहे हैं.

एनएसई का एकीकृत कारोबार मॉडल लिस्टिंग, ट्रेडिंग, क्लियरिंग और सेटलमेंट, इंडेक्स, मार्केट डेटा, टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस और वित्तीय शिक्षा तक फैला है. एक्सचेंज ट्रेडिंग और क्लियरिंग सदस्यों तथा सूचीबद्ध कंपनियों के अनुपालन की निगरानी भी करता है. इस कारण उसकी साख में सुधार का असर केवल उसके शेयर निर्गम पर नहीं, बल्कि व्यापक बाजार ढांचे पर भी पड़ता है.

रिकॉर्ड कारोबार और उत्पाद विस्तार

एनएसई भारत में इक्विटी टर्नओवर के हिसाब से लगभग तीन दशक से सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बना हुआ है, जैसा कि सेबी बताता है. फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार 2025 में यह ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज रहा, जबकि वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के मुताबिक इक्विटी ट्रेडों की संख्या में इसका वैश्विक स्थान तीसरा रहा. एक्सचेंज की प्रतिक्रिया गति लगभग 100 माइक्रोसेकंड है और यह प्रति सेकंड 50 से 60 लाख लेनदेन संसाधित कर सकता है.

2024 में एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पहली बार 5 ट्रिलियन डॉलर के पार गया था. एनएसई इमर्ज खंड का बाजार पूंजीकरण भी 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा. जनवरी में अद्वितीय पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.7 करोड़ के पार गई और फरवरी में खातों की संख्या 25 करोड़ से अधिक हो गई.

उत्पाद नवाचार भी एक्सचेंज की वृद्धि का प्रमुख आधार बना हुआ है. 2023 में एनएसई ने डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल, नैचुरल गैस और कई बेस मेटल्स पर कमोडिटी डेरिवेटिव्स शुरू किए, जबकि सोशल स्टॉक एक्सचेंज को अलग खंड के रूप में लॉन्च किया गया. 5 जून 2024 को एक्सचेंज ने एक दिन में 29 करोड़ ट्रेड निष्पादित किए और 23 जुलाई 2024 को 2,000 करोड़ से अधिक ऑर्डर संसाधित किए, जिन्हें वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय परिचालन उपलब्धि माना गया.

भारतीय पूंजी बाजार पर व्यापक असर

चौहान उन शुरुआती पेशेवरों में रहे जिन्होंने 1990 के दशक में एनएसई की बुनियाद खड़ी की और भारत में स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग, सैटेलाइट-आधारित कनेक्टिविटी, निफ्टी सूचकांक और डेरिवेटिव्स बाजार के विकास में भूमिका निभाई. बाद के वर्षों में उन्होंने बीएसई का नेतृत्व भी किया, जहां 2017 का आईपीओ पूरा हुआ और प्रौद्योगिकी उन्नयन के जरिए पुरानी संस्था को प्रतिस्पर्धी ढांचे में ढाला गया. इस पृष्ठभूमि के कारण एनएसई में उनकी दूसरी पारी को केवल प्रबंधकीय नियुक्ति नहीं, बल्कि संस्थागत मरम्मत के रूप में देखा जा रहा है.

भारत का इक्विटी बाजार आकार के लिहाज से अब दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है, और एनएसई की स्थिति इस विस्तार में केंद्रीय है. फरवरी तक एनएसई-सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 464 लाख करोड़ रुपये, यानी 5.1 ट्रिलियन डॉलर, तक पहुंच गया. 1994-95 के 3.6 लाख करोड़ रुपये की तुलना में यह 128 गुना वृद्धि पूंजी बाजार के औपचारिककरण, डिजिटलीकरण और निवेशक आधार के विस्तार को दर्शाती है.

आईपीओ की प्रगति अब इस बात की बड़ी परीक्षा बन रही है कि एनएसई ने शासन और पारदर्शिता से जुड़े पुराने विवादों से कितनी दूरी बनाई है. अगर यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक आगे बढ़ती है, तो इससे भारत के एक्सचेंज कारोबार, बाजार अवसंरचना कंपनियों और वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय भरोसे को बल मिल सकता है. इसी वजह से चौहान के कार्यकाल को बाजार हिस्सेदारी या कारोबार रिकॉर्ड से आगे बढ़कर संस्थागत विश्वसनीयता की कसौटी पर भी परखा जा रहा है.

हमारी पिछली रिपोर्ट में प्रेस नोट 3 के तहत भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले गैर-नियंत्रक एफडीआई पर नियमों में सीमित ढील और स्वचालित मार्ग की अनुमति पर चर्चा की गई थी। उस लेख में बताया गया था कि संवेदनशील क्षेत्रों में मंजूरी की शर्त बरकरार रखते हुए, चुनिंदा क्षेत्रों के लिए प्रक्रिया तेज करने का लक्ष्य पूंजी प्रवाह, प्रौद्योगिकी साझेदारियों और निवेश माहौल की पूर्वानुमेयता बढ़ाना है।

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