श्रम मंत्रालय ने पोर्टर, गिगिन के साथ रोजगार विस्तार के लिए समझौते किए
श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, उसने सोमवार को पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ ऐसे समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय करियर सेवा, एनसीएस, पोर्टल पर डिजिटल जॉब मैचिंग को मजबूत करना और नौकरी के अवसर बढ़ाना है। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से सत्यापित जॉब लिस्टिंग और नियोक्ता संपर्क एनसीएस के माध्यम से पंजीकृत उम्मीदवारों तक पहुंचेंगे, जिससे पारदर्शी और विश्वसनीय रोजगार अवसरों की पहुंच बढ़ेगी। यह पहल ऐसे समय में आती है जब पोर्टल पर 0.7 मिलियन से अधिक रिक्तियां सक्रिय हैं और करीब 5.9 मिलियन प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं।
हाइलाइट्स
- पोर्टर ने 2030 तक 30 लाख से अधिक लॉजिस्टिक्स और ड्राइविंग से जुड़े रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य घोषित किया।
- गिगिन और मंत्रालय की साझेदारी हर साल कम से कम 2–3 लाख प्रामाणिक नौकरी अवसरों और 1.5 लाख नए नियोक्ता जुड़ाव की योजना बनाएगी।
- एनसीएस पोर्टल का अन्य डिजिटल और राज्य प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण युवाओं की रोजगार क्षमता और औपचारिक भर्ती ढांचे को मजबूती देगा।
एनसीएस पोर्टल पर साझेदारी का दायरा
मंत्रालय ने कहा है कि पोर्टर बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिक्स और ड्राइविंग से जुड़े अवसर उपलब्ध कराएगा और 2030 तक 30 लाख से अधिक अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखता है। गिगिन के बारे में मंत्रालय का कहना है कि यह साझेदारी हर साल कम से कम 2 से 3 लाख प्रामाणिक नौकरी अवसर तैयार करने में मदद करेगी। इसके साथ ही 1.5 लाख से अधिक नियोक्ता जुड़ाव भी इस सहयोग के तहत जोड़े जाने की योजना है।
मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों का केंद्र बिंदु एनसीएस पोर्टल के जरिए मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर डिजिटल मिलान तैयार करना है। सत्यापित अवसरों को औपचारिक प्लेटफॉर्म पर लाने से नौकरी खोजने वालों के लिए भरोसेमंद विकल्पों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे संगठित डिजिटल भर्ती ढांचे को भी मजबूती मिलती है।
युवा रोजगार और कौशल अंतर पर फोकस
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने एनसीएस पोर्टल को युवाओं को कौशल अनुरूप नौकरियों से जोड़ने वाला प्रभावी वन स्टॉप प्लेटफॉर्म बताया। उन्होंने कहा कि पोर्टर और गिगिन के साथ यह साझेदारी सभी हितधारकों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी साबित होती है और एनसीएस पोर्टल को और मजबूत करती है। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पोर्टल का एकीकरण ई माइग्रेट, SIDH, माई भारत और विभिन्न राज्य पोर्टलों के साथ है, जिससे इसका दायरा और पहुंच व्यापक होती है।
मंडाविया ने भागीदार कंपनियों और एनसीएस से अल्पावधि सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह भी किया है। उनके अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण नौकरी खोजने वालों और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि इससे कौशल अंतर कम करने और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
रोजगार बाजार पर संभावित असर
यह समझौता भारत के डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म तंत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को और गहरा करता है, खासकर लॉजिस्टिक्स, ड्राइविंग और गिग आधारित नियुक्तियों जैसे क्षेत्रों में। एनसीएस के माध्यम से अधिक सत्यापित अवसर आने से अनौपचारिक भर्ती चैनलों पर निर्भरता कुछ हद तक घट सकती है। इससे सरकार के औपचारिक रोजगार संपर्क ढांचे को भी अधिक उपयोगिता मिलती है।
वार्षिक और दीर्घकालिक अवसर सृजन के जो लक्ष्य बताए गए हैं, वे संकेत देते हैं कि मंत्रालय रोजगार पहुंच को सिर्फ पंजीकरण तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि सक्रिय नियुक्ति और नियोक्ता जुड़ाव पर भी जोर दे रहा है। यदि प्रशिक्षण और प्लेटफॉर्म एकीकरण समान गति से आगे बढ़ते हैं, तो यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है। इससे युवाओं, नियोक्ताओं और सार्वजनिक रोजगार अवसंरचना, तीनों को लाभ मिलने की संभावना बनती है।
हमने पहले MOSPI की पायलट स्टडी के आधार पर भारत के असंगठित निर्माण क्षेत्र में ग्रामीण इकाइयों के वर्चस्व पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि शहरी निर्माण प्रतिष्ठान श्रम उपयोग के लिहाज से अपेक्षाकृत अधिक गहन हैं और ग्रामीण निर्माण गतिविधियों तक औपचारिक कर्ज की पहुंच बढ़ती दिख रही है।
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