पश्चिम बंगाल में टीएमसी उम्मीदवारों पर आयकर छापे, चुनावी अभियान पर दबाव बढ़ा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और उम्मीदवारों पर की गई आयकर विभाग की कार्रवाई से राज्य की राजनीतिक तनातनी और तेज हो रही है। पार्टी का आरोप है कि छापों के दौरान चुनाव प्रबंधन से जुड़े अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए, जबकि मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होना है।
हाइलाइट्स
- आयकर विभाग ने 26 अप्रैल को टीएमसी उम्मीदवार देबाशीष कुमार और कुमार साहा के आवास व चुनावी दफ्तरों पर तलाशी ली, अभियान पर दबाव बढ़ाया।
- टीएमसी ने छापों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर चुनावी प्रक्रिया प्रभावित कर रही है।
- 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले कई टीएमसी उम्मीदवारों और I-PAC निदेशक प्रतीक चंदेल पर केंद्रीय एजेंसियों की जांच हुई, जिससे पार्टी पर संस्थागत दबाव बढ़ा।
छापों की कार्रवाई और चुनावी पृष्ठभूमि
द हिंदू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को दक्षिण कोलकाता के प्रमुख तृणमूल नेता और रासबिहारी विधानसभा सीट से उम्मीदवार देबाशीष कुमार के आवास और चुनाव कार्यालय पर तलाशी ली। कार्रवाई मनोहरपुकुर रोड स्थित उनके घर और चुनावी दफ्तर तक फैली रही, जबकि इससे पहले उन्हें कई समन भी जारी किए जा चुके थे।देबाशीष कुमार से इससे पहले एक भूमि कब्जा मामले में प्रवर्तन निदेशालय दो बार पूछताछ कर चुका है। रासबिहारी सीट दक्षिण कोलकाता की अहम सीटों में गिनी जाती है, जहां तृणमूल कांग्रेस के देबाशीष कुमार और भाजपा के स्वपन दासगुप्ता के बीच मुकाबला है।
आयकर अधिकारियों ने दक्षिण कोलकाता के ही तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुमार साहा के घर पर भी तलाशी ली। इसके साथ ही अन्य तृणमूल उम्मीदवारों को भी केंद्रीय एजेंसियों की ओर से समन मिलने की खबर है, जिससे चुनावी अभियान के बीच दबाव बढ़ता दिख रहा है।
टीएमसी की प्रतिक्रिया और व्यापक असर
तृणमूल कांग्रेस ने इन छापों को राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार राज्य तंत्र का इस्तेमाल कर उसके उम्मीदवारों को परेशान कर रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि तलाशी के दौरान बूथ स्तर के एजेंटों की सूची समेत चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।रिपोर्टों के मुताबिक, जिन स्थानों पर छापे पड़े वहां तृणमूल कार्यकर्ता जुटे और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब राज्य में चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं और कोलकाता व आसपास के इलाकों में दूसरे चरण के तहत 29 अप्रैल को मतदान होना है।
हाल के दिनों में अन्य मामलों ने भी चुनावी माहौल को और संवेदनशील बनाया है। भंगाबनपुर क्षेत्र से तृणमूल उम्मीदवार मानब कुमार परुआ को इस महीने की शुरुआत में एनआईए के सामने पेश होने को कहा गया था, जबकि बिधाननगर से उम्मीदवार सुजीत बोस के परिवार के सदस्यों को प्रवर्तन निदेशालय ने समन जारी किया था। इसके अलावा, I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक चंदेल से भी पूछताछ हुई है, जबकि यही परामर्श फर्म तृणमूल के 2026 अभियान का प्रबंधन कर रही है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में AAP के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी का विवरण था, जिसमें जालंधर स्थित आवास, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और गुरुग्राम की कुछ कारोबारी इकाइयां शामिल रहीं। लेख में बताया गया था कि जांच कथित FEMA उल्लंघनों से जुड़ी है और AAP ने इसकी टाइमिंग को 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में पेश किया था।
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