पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदाता सूची संशोधन के बीच रिकॉर्ड मतदान

पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदाता सूची संशोधन के बीच रिकॉर्ड मतदान
बंगाल में रिकॉर्ड मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के 23 अप्रैल के पहले चरण में 92.8 प्रतिशत मतदान होता है, जो राज्य में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सबसे अधिक नाम हटाए गए, वहां औसत मतदान 94.1 प्रतिशत तक पहुंचता है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है।

हाइलाइट्स

  • पहले चरण के बाद मतदाता सूची में 13 लाख की शुद्ध कमी दर्ज हुई, लेकिन मतदान का स्तर समग्र औसत से ऊपर रहा।
  • मतदाता सूची से उच्च विलोपन वाले क्षेत्रों में मतदान 91.8 प्रतिशत से 2.3 प्रतिशत अधिक, कुछ क्षेत्रों में 96 प्रतिशत से ऊपर दर्ज हुआ।
  • 30 लाख निवासियों की मतदान पात्रता अनिश्चित बनी रही, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पुनरीक्षित सूची और मतदान के कार्यक्रम को बरकरार रखा।

मतदाता सूची संशोधन और मतदान रुझान

फोर्ब्स इंडिया के अनुसार, निर्वाचन आयोग के ECINET ऐप के आंकड़े दिखाते हैं कि जिन सीटों पर विशेष गहन पुनरीक्षण, या SIR, के दौरान सबसे अधिक विलोपन हुआ, वहां मतदान का स्तर समग्र औसत से भी ऊपर रहता है। निर्वाचन आयोग 2025 के नवंबर और दिसंबर के बीच पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता है और कहता है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लिकेट प्रविष्टियों, मृत व्यक्तियों और फर्जी मतदाताओं को हटाना है।

आंकड़ों के अनुसार, मतदाताओं के नए नाम जुड़ने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान 91.8 प्रतिशत रहता है, जो उच्च विलोपन वाले क्षेत्रों से 2.3 प्रतिशत अंक कम है। पहले चरण में शामिल सभी निर्वाचन क्षेत्रों में पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में लगभग 13 लाख मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज होती है।

विवाद, कानूनी चुनौती और क्षेत्रीय असर

यह पुनरीक्षण राज्य में तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा करता है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आरोप लगाती है कि नाम हटाने की प्रक्रिया जानबूझकर मताधिकार से वंचित करने वाली है और कई मामलों में अल्पसंख्यक मतदाताओं को चुनिंदा रूप से निशाना बनाकर भाजपा के पक्ष में चुनावी बढ़त बनाने की कोशिश करती है।

इन बड़े पैमाने पर विलोपनों के खिलाफ कानूनी चुनौतियां सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचती हैं, जो अप्रैल के मतदान को तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति देता है। इसके बावजूद, पश्चिम बंगाल में करीब 30 लाख निवासियों की मतदान पात्रता अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

समसेरगंज, जहां मसौदा और अंतिम मतदाता सूची के बीच 32 प्रतिशत नाम हटाए जाते हैं, वहां 96.1 प्रतिशत मतदान दर्ज होता है। लालगोला में 22.4 प्रतिशत विलोपन के साथ 96.4 प्रतिशत मतदान होता है, जबकि रघुनाथगंज, फरक्का, भगबांगोला, मोथाबारी और सूती जैसे क्षेत्रों में 14 प्रतिशत से 20 प्रतिशत विलोपन के बीच मतदान 96 प्रतिशत से ऊपर रहता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटाए जाने के विवाद और उससे पहचान व नागरिकता की बहस के केंद्र में आने पर फोकस किया गया था। उस लेख में बताया गया था कि इन विलोपनों से खासकर कुछ क्षेत्रों में मतदाता आधार घटने और करीबी सीटों पर मुकाबले का संतुलन बदलने की आशंका बढ़ी, साथ ही प्रमुख दलों की रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी असर पड़ा।

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