केरल में Milma जल्द दूध कीमत बढ़ाने की तैयारी में

केरल में Milma जल्द दूध कीमत बढ़ाने की तैयारी में
Milma दूध महंगा होगा?

केरल में राज्य संचालित डेयरी सहकारी Kerala Cooperative Milk Marketing Federation, यानी Milma, बढ़ती लागत और दुग्ध किसानों के हितों के बीच दूध के दाम संशोधित करने की तैयारी कर रही है। सहकारी संस्था का कहना है कि बढ़ोतरी की मात्रा पर अंतिम फैसला बोर्ड बैठक में होगा, जबकि चुनाव आचार संहिता के कारण रुकी चर्चा अब फिर शुरू हो गई है।

हाइलाइट्स

  • Milma जल्द दूध की कीमतों में संशोधन करेगी, अंतिम निर्णय बोर्ड बैठक के बाद लिया जाएगा और राज्य सरकार से परामर्श भी हो चुका है।
  • Ernakulam Regional Co-operative Milk Producers' Union की मांग और इनपुट लागत में तेज वृद्धि के आधार पर समिति ने 6 रुपये प्रति लीटर मूल्यवृद्धि की सिफारिश की है।
  • FY26 में किसानों पर केंद्रित उपायों के चलते Milma की दूध खरीद लगभग 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी मूल्य संशोधन पर विचार जारी है।

कीमत संशोधन की रूपरेखा

Financial Express की एक Financial Express रिपोर्ट के मुताबिक, Milma के चेयरमैन K S Mani ने कहा कि दूध कीमत में बढ़ोतरी जरूरी है और इसे जल्द लागू किया जाएगा, हालांकि वृद्धि की सटीक मात्रा पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। उनका कहना है कि सहकारी संस्था को दुग्ध किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के हितों का ध्यान रखना है।

Mani ने कहा कि कीमत बढ़ोतरी पर अंतिम निर्णय बोर्ड बैठक के बाद लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि Milma अपने स्तर पर कीमत संशोधित कर सकती है, लेकिन व्यापक उपभोक्ता प्रभाव को देखते हुए उसने राज्य सरकार से भी परामर्श किया है.

दूध उत्पादकों की ओर से दबाव बढ़ने के बाद यह कदम आगे बढ़ रहा है। मवेशी चारे, श्रम और अन्य इनपुट लागत में तेज वृद्धि के बीच Milma की Ernakulam Regional Co-operative Milk Producers' Union के सदस्यों ने हाल में तत्काल मूल्यवृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। PTI के अनुसार, एक समिति ने 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की सिफारिश भी की थी।

Milma ने यह भी कहा कि किसानों पर केंद्रित उपायों से FY26 में उसकी दूध खरीद लगभग 13 प्रतिशत बढ़ी है, जो रिकॉर्ड स्तर है।

डेयरी उद्योग पर व्यापक असर

कीमत बढ़ाने का दबाव केवल केरल तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में भी डेयरी कंपनियां बढ़ती इनपुट लागत और आपूर्ति बाधाओं के कारण कीमत संशोधन पर विचार कर रही हैं।

उद्योग से जुड़े प्रतिभागियों का कहना है कि कंपनियां अब तक ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने के लिए लागत खुद वहन करती रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च खुदरा कीमतों में संशोधन को मजबूर कर सकते हैं। Chilate Diary के Nikhil Chitale ने कहा कि यह कारोबार बहुत पतले मार्जिन पर चलता है, जिससे अतिरिक्त लागत को लंबे समय तक समाहित करने की गुंजाइश सीमित रहती है।

Indian Dairy Association के अध्यक्ष Sudhir Kumar Singh ने पहले ANI से कहा था कि कीमतों में संशोधन तभी किया जाता है जब कंपनियां बढ़ती लागत के कारण मजबूर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है।

भारत 2024-25 में अनुमानित 247.87 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना हुआ है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में कमजोर मानसून के अनुमान और पश्चिम एशिया से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण उर्वरक, ईंधन और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति व कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन किया गया था। इसमें बताया गया था कि ये दबाव ग्रामीण मांग और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों तक फैल सकते हैं, जिससे कंपनियों के लिए कीमतें स्थिर रखना कठिन हो जाता है। यही पृष्ठभूमि डेयरी सेक्टर में Milma जैसी सहकारी संस्थाओं द्वारा दूध के दाम संशोधित करने की मजबूरी को समझने में मदद करती है।

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