पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले ईवीएम सुरक्षा पर सियासी निगरानी बढ़ी
पश्चिम बंगाल में 4 मई की मतगणना से पहले राजनीतिक दल ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा और मतगणना प्रक्रिया पर अपनी निगरानी तेज कर रहे हैं। कोलकाता के भवानीपुर केंद्र में तनाव बढ़ गया है, जहां कड़ी सुरक्षा, धारा 163 और शीर्ष नेताओं की सक्रियता ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
हाइलाइट्स
- कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में स्ट्रॉन्गरूम और मतगणना केंद्र की सुरक्षा सख्त हुई, 200 मीटर दायरे में 5+ लोगों के जमावड़े पर रोक लगी।
- ममता बनर्जी और विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ईवीएम छेड़छाड़ की शिकायतें उठाईं, निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सार्वजनिक सवाल खड़े किए।
- 4 मई की मतगणना के लिए कोलकाता पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किए, चुनावी विश्वसनीयता और प्रशासनिक छवि पर उच्च राजनीतिक जोखिम बना हुआ है।
भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम पर बढ़ी चौकसी
Financial Express के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के स्ट्रॉन्गरूम और मतगणना केंद्र के आसपास प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ईवीएम की सुरक्षा को लेकर खुलकर सतर्कता दिखा रहे हैं। सखावत मेमोरियल स्कूल, जो भवानीपुर का नामित मतगणना केंद्र और ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम है, उसके 200 मीटर दायरे में पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू की गई है।
यह कदम उस घटनाक्रम के बाद उठाया गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्ट्रॉन्गरूम का अचानक दौरा किया और कथित संदिग्ध गतिविधियों पर चिंता जताई। बनर्जी ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों से ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायतें मिली हैं और उनकी पार्टी किसी भी संभावित हेरफेर को रोकने के लिए सतर्क रहेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के साथ निर्वाचन आयोग का रवैया एकतरफा है।
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम पर कड़ी निगरानी की बात कही है। यह सीट खास महत्व रखती है क्योंकि यहां ममता बनर्जी और अधिकारी आमने-सामने हैं, इसलिए मतदान के बाद का तनाव अब स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा और मतगणना की पारदर्शिता पर केंद्रित हो गया है।
मतगणना दिवस की तैयारी और राजनीतिक असर
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी मतगणना से पहले पार्टी उम्मीदवारों और काउंटिंग एजेंटों के साथ वर्चुअल बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य जमीनी स्तर की टीमों को कथित अनियमितताओं के खिलाफ सतर्क रखना और 4 मई को मतगणना के दौरान डेटा प्रवाह पर करीबी नजर सुनिश्चित करना है।कोलकाता पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई है ताकि किसी भी अनधिकृत पहुंच या राजनीतिक टकराव को रोका जा सके। इससे साफ है कि मतगणना से पहले सुरक्षा व्यवस्था अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि राज्य की चुनावी विश्वसनीयता और राजनीतिक वैधता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन गई है।
पश्चिम बंगाल की इस स्थिति का असर राज्य की व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक छवि पर भी पड़ता है, क्योंकि प्रमुख दल पहले ही चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे और संस्थाओं पर आरोप लगा रहे हैं। मतगणना तक का हर कदम अब उच्च राजनीतिक जोखिम, सख्त सुरक्षा प्रबंधन और चुनावी संस्थाओं पर बढ़ती निगरानी के बीच आगे बढ़ रहा है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में तृणमूल कांग्रेस द्वारा भाजपा और चुनाव आयोग पर कथित मिलीभगत के आरोपों की चर्चा की गई थी, जिसमें एक कथित CCTV वीडियो के आधार पर मतपेटियां/चुनावी सामग्री संबंधित पक्षों की मौजूदगी के बिना खोले जाने का दावा किया गया था। रिपोर्ट में ममता बनर्जी सहित पार्टी नेताओं के विरोध-प्रदर्शन और मतगणना से पहले एग्जिट पोल को लेकर उठे विवाद का भी उल्लेख था, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सियासी तनाव और बढ़ता दिखा।
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