भारत सरकार ने राजकोषीय दबाव के बीच पूंजीगत व्यय बनाए रखने की बात कही
वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट में निर्धारित 12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय को बनाए रखने पर जोर दे रही है। यह रुख ऐसे समय में सामने आ रहा है जब कर राजस्व की रफ्तार, आयातित एलपीजी पर निर्भरता और व्यापक राजकोषीय दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है।
हाइलाइट्स
- सरकार ने 12 लाख करोड़ रुपये के बजटित पूंजीगत व्यय को संरक्षित रखने और राजमार्ग, रेलवे व पोर्ट्स क्षेत्रों को फंड उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई।
- भारत की एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत आयात करने और इसमें से 90 प्रतिशत Hormuz जलडमरूमध्य से आने के कारण ऊर्जा आपूर्ति में बाहरी जोखिम बढ़ा।
- सरकार अनुसंधान एवं विकास के लिए पारंपरिक फंडिंग की बजाय AIF जैसे नए साधनों के जरिए स्टार्टअप व परिपक्व परियोजनाओं को निवेश देगी।
पूंजीगत व्यय प्राथमिकता और बजट रुख
Forbes India के अनुसार, व्यय सचिव Vumlunmang Vualnam ने शुक्रवार को Second Annual Isaac Centre for Public Policy Growth Conference में कहा कि सरकार 12 लाख करोड़ रुपये के बजटित पूंजीगत व्यय को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय तनाव वास्तविकता है, लेकिन राजमार्ग, रेलवे, शिपिंग और बंदरगाह क्षेत्रों को आवश्यक धन उपलब्ध कराया जा रहा है।
Vualnam ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में राजकोषीय सतर्कता पर जोर देने से महत्वपूर्ण खर्चों को बचाने का जानबूझकर निर्णय लिया गया। उनके मुताबिक, इस रुख ने ऐसे अनिश्चित समय में देश को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रखा है, जब वैश्विक घटनाक्रमों का अल्पकालिक असर अनुमानित करना कठिन है।
ऊर्जा जोखिम और अनुसंधान निवेश का असर
उन्होंने भारत की एलपीजी आपूर्ति शृंखला को एक अहम कमजोरी बताया। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत आयात करता है, और उसमें से 90 प्रतिशत Hormuz जलडमरूमध्य से होकर आता है, जिससे बाहरी झटकों का जोखिम बढ़ जाता है।Vualnam ने कहा कि पेट्रोल और उत्पाद शुल्क दरों में कटौती की गई है, फिर भी राजकोषीय दबाव बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि बदले हुए परिदृश्य में आने वाले महीनों में सकल कर प्राप्तियों की मजबूती एक बड़ा सवाल है, क्योंकि अस्थिर ऊर्जा बाजार और वैश्विक तनाव राजस्व अनुमान पर असर डाल सकते हैं।
उन्होंने अनुसंधान एवं विकास को नई राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया और कहा कि निवेश के तरीके में बदलाव किया जा रहा है। उनके अनुसार, मौजूदा सरकारी वैज्ञानिक संस्थानों को पारंपरिक फंडिंग देने के बजाय AIF जैसे नए साधनों के माध्यम से परिपक्व परियोजनाओं, स्टार्टअप और उद्यमियों को समर्थन देने पर जोर है, जबकि सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाने, सिंगल विंडो प्रणाली को लागू करने और नियामकीय बाधाएं घटाने पर भी ध्यान दे रही है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में होरमुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने की भारत की अपील पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान से वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और मानवीय आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। साथ ही, समुद्र में फंसे नाविकों और चालक दल की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं।
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