पश्चिम बंगाल में करीबी मुकाबला, अधूरी बहुमत स्थिति से सरकार गठन का जोखिम बढ़ा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल किसी एक दल के पक्ष में साफ लहर नहीं दिखा रहे हैं और मुकाबला 148 सीटों के बहुमत आंकड़े के आसपास सिमटा हुआ है। सीट अनुमानों में मामूली उतार-चढ़ाव भी स्थिर सरकार और त्रिशंकु विधानसभा के बीच अंतर तय कर सकता है, जबकि अंतिम नतीजे 4 मई को घोषित होते हैं।
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में PMARQ और Matrize समेत अधिकतर एग्जिट पोल भाजपा को बहुमत के नजदीक 146–175 सीटें और तृणमूल कांग्रेस को 118–140 सीटें देते हैं।
- त्रिशंकु विधानसभा की आशंका बनी रहने पर राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार गठन के लिए बुला सकते हैं, और छोटे दलों-निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक रहेगा।
- स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन व पुनः चुनाव संभावना बढ़ती है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता संभावित है।
एग्जिट पोल अनुमानों में बहुमत रेखा पर टिकी तस्वीर
Financial Express के अनुसार, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बेहद करीबी दिख रहा है, जहां कई एग्जिट पोल बहुमत रेखा के आसपास सिमटी हुई तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस परिदृश्य में मामूली सीट बदलाव भी सरकार गठन की दिशा बदल सकता है।
PMARQ ने भाजपा को 150 से 175 सीटें और तृणमूल कांग्रेस को 118 से 138 सीटें मिलने का अनुमान दिया है। हालांकि इस अनुमान का निचला स्तर बहुमत के आंकड़े से थोड़ा ही ऊपर है, जिससे बढ़त को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
Matrize ने भाजपा के लिए 146 से 161 सीटें और तृणमूल कांग्रेस के लिए 125 से 140 सीटों का अनुमान जताया है। भाजपा का निचला स्तर 148 से नीचे रहने के कारण त्रिशंकु विधानसभा की आशंका बनी रहती है। Peoples Pulse समेत अन्य एजेंसियों के अनुमानों में भी सीट दायरे एक-दूसरे के करीब हैं, जिससे दोनों संभावनाएं खुली रहती हैं।
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में संवैधानिक प्रक्रिया
यदि कोई भी दल 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं करता है, तो राज्यपाल आम तौर पर सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का अवसर देते हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा बहुमत से पीछे रहने पर छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन विकल्प तलाश सकती है।किसी भी संभावित गठबंधन को विधानसभा पटल पर विश्वास मत के जरिए अपना बहुमत साबित करना होगा। यदि कोई व्यवहार्य व्यवस्था नहीं बनती है, तो राज्य में संक्षिप्त अवधि के लिए राष्ट्रपति शासन लग सकता है, जिसके बाद फिर से चुनाव कराए जाने की संभावना बनती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल अनुमानों पर फोकस किया गया था, जिनमें भाजपा को बहुमत रेखा पार करते दिखाया गया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आकलनों को खारिज कर अपनी वापसी का दावा किया था। उस लेख में विभिन्न एजेंसियों के सीट-आकलन, शिक्षक भर्ती घोटाले व राशन वितरण अनियमितताओं की जांचों के राजनीतिक असर और मतगणना से पहले बढ़ी अनिश्चितता के संदर्भ को भी रेखांकित किया गया था।
नवीनतम सरकार समाचार
- Forex
- Crypto