तमिलनाडु में सरकार गठन पर अनिश्चितता, विजय बहुमत नहीं जुटा पाए तो तीन संवैधानिक विकल्प
तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति राज्य में सरकार गठन को समयबद्ध संवैधानिक परीक्षा में बदल रही है। 10 मई को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले TVK प्रमुख विजय के सामने 118 विधायकों का समर्थन जुटाने की चुनौती है, जबकि DMK और AIADMK भी संभावित समीकरणों में सक्रिय हैं।
हाइलाइट्स
- TVK ने 108 सीटें जीतीं, कांग्रेस और छोटे दलों के समर्थन से बहुमत (119 सीटें) मिल सकता है, लेकिन स्पष्ट दावा अब तक नहीं बना।
- DMK अध्यक्ष स्टालिन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी विजय को सरकार बनाने देगी और छह महीने तक अस्थिर नहीं करेगी, जिससे बाहरी समर्थन या संयम की नई संभावनाएँ बनीं।
- यदि 10 मई तक कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता तो राष्ट्रपति शासन तथा छह महीने के भीतर नए चुनाव का विकल्प खुला, जिससे नीति व निवेश पर असर पड़ सकता है।
बहुमत परीक्षण की समयसीमा और संभावित समीकरण
Financial Express के अनुसार, TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और ऐसे में राज्यपाल पहले विजय को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं। लेकिन 118 के बहुमत आंकड़े तक नहीं पहुंचने पर राज्यपाल के सामने अन्य दल या गठबंधन को आमंत्रित करने, वैकल्पिक दावे पर विचार करने, या अंततः राष्ट्रपति शासन की सिफारिश जैसे विकल्प खुले रहते हैं।
वर्तमान अंकगणित में कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ TVK का आंकड़ा 113 तक पहुंचता है। यदि CPI, CPM और VCK, जिनके पास 2-2 सीटें हैं, विजय का समर्थन करते हैं तो यह संख्या 119 हो सकती है, जिससे बहुमत का रास्ता खुलता है।
दूसरी ओर, यदि विजय समर्थन जुटाने में विफल रहते हैं, तो DMK, कांग्रेस और छोटे दलों के साथ नया गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकती है। AIADMK, जिसने 47 सीटें जीती हैं, वह भी छोटे दलों और संभावित बागी विधायकों के सहारे दावा पेश करने की स्थिति तलाश सकती है।
DMK, AIADMK और राज्य पर असर
DMK अध्यक्ष और कार्यवाहक मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बयान में कहा है कि उनकी पार्टी विजय को सरकार बनाने देगी और कम से कम छह महीने तक उसे अस्थिर नहीं करेगी। इस रुख ने राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है, क्योंकि यह बाहरी समर्थन या रणनीतिक धैर्य, दोनों की संभावना खोलता है।AIADMK ने अपने कुछ निर्वाचित विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में स्थानांतरित किया है, ताकि दल-बदल या टूट-फूट की आशंका को रोका जा सके। पार्टी की ओर से कुछ शर्तों पर TVK को बाहर से समर्थन देने की संभावना भी बताई जा रही है, जबकि औपचारिक बातचीत जारी है।
यदि 10 मई तक कोई दल या गठबंधन बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने और विधानसभा भंग कर छह महीने के भीतर नए चुनाव कराने का रास्ता अपनाया जा सकता है। ऐसे परिदृश्य में मौजूदा राजनीतिक गतिरोध तमिलनाडु की प्रशासनिक निरंतरता, निवेश माहौल और नीति फैसलों पर भी असर डाल सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में तमिलनाडु में TVK के बहुमत संकट और चुनाव बाद सरकार गठन की अनिश्चितता पर फोकस किया गया था। उसमें बताया गया था कि 108 सीटें मिलने के बावजूद 118 के आंकड़े तक न पहुंचने से राज्यपाल के निमंत्रण, फ्लोर टेस्ट और वैकल्पिक समर्थन जुटाने की प्रक्रिया जटिल हो गई है, जबकि DMK-AIADMK के संभावित समीकरणों और राष्ट्रपति शासन/फिर से चुनाव की चर्चा भी तेज रही।
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